{"_id":"577ff7684f1c1bca497f9b7c","slug":"fake-dap","type":"story","status":"publish","title_hn":"खुले बाजार में बिक रही नकली डीएपी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
खुले बाजार में बिक रही नकली डीएपी
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
Updated Sat, 09 Jul 2016 12:32 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
किसानों की गाढ़ी कमाई पर नकली खाद के सौदागरों की नजर टिक गई है। ग्रामीण इलाकों में इन दिनों डीएपी की मांग मांग बढ़ते ही ठगों का गिरोह सक्रिय हो गया है। जो गुणवत्तायुक्त खाद का भरोसा दिला कर उन्हें लूट रहे हैं। ग्रामीण इलाकों में धान की रोपाई चरम पर है। अच्छा उत्पादन लेने के लिए किसान डीएपी और यूरिया का छिड़काव करधान की रोपाई कर रहे हैं। साधन सहकारी समितियों पर तैनात सचिवों की हड़ताल तो समाप्त हो गई है, मगर कई समितियां ऐसी हैं जहां से खाद का वितरण नहीं किया जा रहा है। इससे किसान खुले बाजार से खाद लेेने को मजबूर हैं। डीएपी की खाद खुले बाजार में 1141 रुपये प्रति बोरी मिल रही है। दाम तो समितियों से मिलने वाली खाद के बराबर है। मगर बोरियों में भरी खाद खेतों में पड़ने के बाद भी नहीं गल रही है।
दरअसल में जिले में नकली खाद का कारोबार करने वाले लोग समितियों में हड़ताल होने के कारण अधिक सक्रिय हो गए हैं। इनका गिरोह इतना लंबा है कि यह साधन सहकारी समितियों पर भी हाथ फेरने से नहीं चूक रहे हैं। बीते वर्ष जिला कृषि अधिकारी की जांच में साधन सहकारी समिति पचखरा में दो सौ बोरी नकली डीएपी खाद मिली थी। इतनी भारी मात्रा में मिली खाद से यह बात साफ हो गई थी कि जिले में नकली खाद का कारोबार तेजी से हो रहा है। मगर अधिकारियों की लापरवाही के चलते इस दिशा में प्रभावी कदम नहीं उठाया जा रहा है।
विज्ञापन
दरअसल में जिले में नकली खाद का कारोबार करने वाले लोग समितियों में हड़ताल होने के कारण अधिक सक्रिय हो गए हैं। इनका गिरोह इतना लंबा है कि यह साधन सहकारी समितियों पर भी हाथ फेरने से नहीं चूक रहे हैं। बीते वर्ष जिला कृषि अधिकारी की जांच में साधन सहकारी समिति पचखरा में दो सौ बोरी नकली डीएपी खाद मिली थी। इतनी भारी मात्रा में मिली खाद से यह बात साफ हो गई थी कि जिले में नकली खाद का कारोबार तेजी से हो रहा है। मगर अधिकारियों की लापरवाही के चलते इस दिशा में प्रभावी कदम नहीं उठाया जा रहा है।
विज्ञापन