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लाल के इंतजार में पथरा गईं आंखें, 48 दिन बाद सऊदी से आया शव
Thu, 30 May 2019 12:16 AM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
Published by: विनोद सिंह
Updated Thu, 30 May 2019 12:16 AM IST
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राहुल कुमार
- फोटो : pratapgarh
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कमाने के लिए सऊदी अरब गए कोहड़ौर इलाके के युवक की सडक़ हादसे में हुई मौत के 48 दिन बाद बुधवार को उसका शव लाया जा सका। रात 12 उसका शव विमान से लखनऊ पहुंचा। परिजन शव लेने के लिए रवाना हो गए हैं।
कमाने के लिए गए लाल की मौत के बाद भारी सदमे से गुजर रहे परिजनों की आंखें उसके इंतजार में पथरा गईं। शव लाने के लिए उन्होंने पीएमओ से लेकर विदेश मंत्रालय तक गुहार लगाई। सरकार के सक्रिय होने के बाद आखिरकार 48 दिन बाद घर के लोग उसका अंतिम दर्शन कर सकेेंगे। गुरुवार को शव घर पहुंचेगा।
मूल रूप से सुलतानपुर जनपद के अमसपुर बरहूपुर निवासी जमुना प्रसाद का बेटा राहुल कुमार (25) मां की मौत के बाद मौसा मोतीलाल के घर चंदुआडीह कोडऱी थाना कोहड़ौर में रहता था। 26 जून 2017 को वह सउदी अरब के अलजौफ में काम करने के लिए वीजा लेकर पहुंचा।
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वहां एक कफील के घर पर माली का काम करने लगा। 2 अप्रैल को राहुल अपने आजमगढ़ के दोस्त के साथ दूसरे दोस्तों से मिलने के लिए जा रहा था। रास्ते में सडक़ दुर्घटना में राहुल व उसके दोस्त की मौत हो गई। खबर घर पहुंची तो कोहराम मच गया।
घर के लोगों ने उसका शव लाने के लिए कफील से संपर्क किया, लेकिन बात नहीं बन सकी। इससे घरवाले परेशान हो गए। उन्होंने बेटे का शव लाने के लिए प्रधानमंत्री कार्यालय और विदेश मंत्रालय का दरवाजा खटखटाया।
राहुल की याद में परिवार के लोगों की आंखों के आंसू सूख गए। उसकी तस्वीर देखकर परिजन बेहोश हो जाते। इलाके के लोग उनकी मदद के लिए आगे आए।
आखिरकार लोगों का प्रयास रंग लाया और सरकार के हस्तक्षेप के बाद राहुल का शव 48 दिन बाद बुधवार की देर रात लखनऊ एयरपोर्ट पहुंचा। जिसे लेने के लिए पहले से ही पिता जमुना प्रसाद व मौसा मोतीलाल पहुंच गए थे। शव देखते ही दोनों बिलखने लगे। गुरुवार की सुबह शव घर पहुंचेगा। जिसके बाद उसका परिजन अंतिम संस्कार करेंगे।
अमीर आदमी बनने का सपना रह गया अधूरा
राहुल ने सउदी अरब में काम करने के लिए घर से निकलने से पहले अपने पिता जमुना प्रसाद व मौसा मोतीलाल को भरोसा दिलाया कि वह दिन-रात मेहनत कर खूब रुपया कमाएगा। ताकि परिवार की गरीबी दूर कर सके। फिलहाल उसका यह सपना अधूरा रह गया। जिंदा राहुल की जगह उसकी लाश परिवार के लोगों को देखने को मिली।
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कमाने के लिए गए लाल की मौत के बाद भारी सदमे से गुजर रहे परिजनों की आंखें उसके इंतजार में पथरा गईं। शव लाने के लिए उन्होंने पीएमओ से लेकर विदेश मंत्रालय तक गुहार लगाई। सरकार के सक्रिय होने के बाद आखिरकार 48 दिन बाद घर के लोग उसका अंतिम दर्शन कर सकेेंगे। गुरुवार को शव घर पहुंचेगा।
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मूल रूप से सुलतानपुर जनपद के अमसपुर बरहूपुर निवासी जमुना प्रसाद का बेटा राहुल कुमार (25) मां की मौत के बाद मौसा मोतीलाल के घर चंदुआडीह कोडऱी थाना कोहड़ौर में रहता था। 26 जून 2017 को वह सउदी अरब के अलजौफ में काम करने के लिए वीजा लेकर पहुंचा।
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वहां एक कफील के घर पर माली का काम करने लगा। 2 अप्रैल को राहुल अपने आजमगढ़ के दोस्त के साथ दूसरे दोस्तों से मिलने के लिए जा रहा था। रास्ते में सडक़ दुर्घटना में राहुल व उसके दोस्त की मौत हो गई। खबर घर पहुंची तो कोहराम मच गया।
घर के लोगों ने उसका शव लाने के लिए कफील से संपर्क किया, लेकिन बात नहीं बन सकी। इससे घरवाले परेशान हो गए। उन्होंने बेटे का शव लाने के लिए प्रधानमंत्री कार्यालय और विदेश मंत्रालय का दरवाजा खटखटाया।
राहुल की याद में परिवार के लोगों की आंखों के आंसू सूख गए। उसकी तस्वीर देखकर परिजन बेहोश हो जाते। इलाके के लोग उनकी मदद के लिए आगे आए।
आखिरकार लोगों का प्रयास रंग लाया और सरकार के हस्तक्षेप के बाद राहुल का शव 48 दिन बाद बुधवार की देर रात लखनऊ एयरपोर्ट पहुंचा। जिसे लेने के लिए पहले से ही पिता जमुना प्रसाद व मौसा मोतीलाल पहुंच गए थे। शव देखते ही दोनों बिलखने लगे। गुरुवार की सुबह शव घर पहुंचेगा। जिसके बाद उसका परिजन अंतिम संस्कार करेंगे।
अमीर आदमी बनने का सपना रह गया अधूरा
राहुल ने सउदी अरब में काम करने के लिए घर से निकलने से पहले अपने पिता जमुना प्रसाद व मौसा मोतीलाल को भरोसा दिलाया कि वह दिन-रात मेहनत कर खूब रुपया कमाएगा। ताकि परिवार की गरीबी दूर कर सके। फिलहाल उसका यह सपना अधूरा रह गया। जिंदा राहुल की जगह उसकी लाश परिवार के लोगों को देखने को मिली।