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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Pratapgarh News ›   Drug department does not know how many medical stores in the district

औषधि विभाग को नहीं पता जिले में कितने हैं मेडिकल स्टोर

Sun, 30 Dec 2018 01:21 AM IST
shailendra Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रतापगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रतापगढ़ Published by: shailendra Kumar Updated Sun, 30 Dec 2018 01:21 AM IST
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प्रतापगढ़। जिले में पंजीकृत और बिना लाइसेंस के संचालित मेडिकल स्टोर की औषधि विभाग को जानकारी नही है। जबकि शहर से लेकर गांव की बाजारों में बिना फार्मासिस्ट के कुकुरमुत्ते की तरह दवा की दुकानें संचालित हैं। जहां दवा के नाम पर मरीजों का शोषण होता है। दुकान संचालक ही मरीजों को दवाएं देता है।
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जिले में मरीजों का शोषण हर कदम पर होता है। भले ही केंद्र सरकार ने जिले के सरकारी अस्पतालों में जन औषधि केंद्र खुलवा दिया है लेकिन चिकित्सकों की लिखी दवाएं बाहर की दुकानों पर ही मिलती है। शहर से लेकर गांवों में मेडिकल स्टोर दिखाई पड़ता है। मेडिकल स्टोर पर मानक से इतर दवाओं की बिक्री होती है। खास बात यह है कि मानक के विपरीत शहर में संचालित मेडिकल स्टोरों पर दवाएं बिकती हैं। जिनकी जांच करने की फुर्सत औषधि विभाग के पास नहीं है। नतीजा सरकार के आदेश को ठेंगा दिखाते हुए मनमानी दाम पर दवाएं अलग-अलग कंपनियों का बेचा जाता है। मेडिकल स्टोर पर फार्मासिस्ट भी नहीं रहता बल्कि दुकान स्वामी ही मरीजों को दवाएं देता है। अधिकांश दवाओं की दुकानों पर फार्मासिस्ट नजर नहीं आते। जिलाधिकारी व अपर जिलाधिकारी के कार्यालय के करीब ही औषधि विभाग का कार्यालय है।
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यहां औषधि निरीक्षक के रूप में राहुल कुमार तैनात हैं। कार्यालय में लिपिक का काम धीरज कुमार के हवाले हैं। कार्यालय में ऐसा कोई रिकार्ड नहीं है। जहां से यह पता चल से कि जिले में कितने पंजीकृत मेडिकल स्टोर हैं। अपंजीकृत मेडिकल स्टोर की बात ही छोड़िए। शनिवार को करीब तीन राउंड जानकारी करने के लिए कार्यालय पहुंचने पर औषधि निरीक्षक से मुलाकात नहीं हो सकी।  उनका मोबाइल नंबर सेवा में नही है लगातार बताता रहा।  लिपिक औषधि कार्यालय धीरज कुमार का कहना है कि जिले में मेडिकल स्टोर के बारे में औषधि निरीक्षक ही जानकारी दे सकते हैं। वह बाहर निरीक्षण करने गए हैं। कार्यालय में ऐसा कोई रिकार्ड नहीं है। जिससे दवा की दुकानों के बारे में कोई जानकारी दी जा सके।
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