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घर-घर मोतियाबिंद से पीड़ित, ऑपरेशन करने के लिए महज तीन डॉक्टर
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सर्दियों की शुरुआत होने के बाद जिले के सरकारी अस्पतालों में मोतियाबिंद का ऑपरेशन कराने के लिए मरीजों की कतार लग रही है। भीड़ अधिक होने के कारण लोगों को दस से पंद्रह दिन बाद का समय दिया जा रहा है। दरअसल, जिले में मेडिकल कॉलेज समेत सभी सरकारी अस्पतालों में सिर्फ तीन नेत्र सर्जन हैं। जबकि मोतियाबिंद के मरीज घर-घर हैं। डॉक्टरों से समय न मिल पाने के कारण मजबूरी में लोगों को निजी अस्पतालों का चक्कर काटना पड़ रहा है।
जिले में तकरीबन हर घर में बुजुर्ग मोतियाबिंद से पीड़ित हैं। ठंड के दिनों में ऑपरेशन कराने के लिए वे परेशान हो रहे हैं। दरअसल, चिकित्सक ठंड के दिनों में ही मोतियाबिंद का ऑपरेशन कराने के लिए लोगों को सलाह देते हैं। ऐसे में सर्दियों की शुरुआत होते ही अस्पतालों में भीड़ उमड़ने लगी है। लोग सीएचसी-पीएचसी के साथ मेडिकल कॉलेज के चक्कर काट रहे हैं। मरीजों की संख्या ज्यादा होने के कारण दस से पंद्रह दिन बाद लोगों को ऑपरेशन के लिए डेट दी जा रही है।
मजबूरी में लोग प्रयागराज या फिर अमेठी के गौरीगंज स्थित राजीव गांधी नेत्र चिकित्सालय के चक्कर काट रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, सप्ताह भर के अंदर मेडिकल कॉलेज के नेत्र सर्जन विवेक त्रिपाठी डेढ़ सौ से अधिक मोतियाबिंद के मरीजों का ऑपरेशन कर चुके हैं। ढाई हजार लोगों को ऑपरेशन के लिए चिह्नित किया गया है।
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इसके अलावा जिले में सिर्फ कुंडा सीएचसी और महेशगंज पीएचसी में ही नेत्र सर्जन की तैनाती है। यहां भी ऑपरेशन कराने के लिए मरीजों की लंबी कतार है। लालगंज, पट्टी और रानीगंज क्षेत्र में एक भी नेत्र सर्जन की तैनाती नहीं हुई है। इससे यहां के मरीजों को परेशान होना पड़ रहा है।
मुफ्त ऑपरेशन का दावा, लिया जा रहा सुविधा शुल्क
स्वास्थ्य विभाग दावा करता है कि मोतियाबिंद के ऑपरेशन का कोई शुल्क नहीं लगता है। शासन की ओर से मुफ्त लेंस की व्यवस्था की जाती है, मगर सरकारी अस्पताल के लेंस को स्वास्थ्य विभाग के अफसर ही प्राइवेट अस्पतालों में भेज देते हैं। उसी लेंस को अधिकांश प्राइवेट अस्पताल संचालक मरीजों का ऑपरेशन के बाद लगाते हैं। लेंस के नाम पर मोटी रकम वसूलते हैं।
सरकारी अस्पतालों में सुविधा शुल्क नहीं लगता है। मुफ्त में ऑपरेेशन किया जा रहा है। मरीजों को चिह्नित कर ब्लॉकवार कैंप लगातर मोतियाबिंद के मरीजों का ऑपरेशन कराया जा रहा है। -डॉ. एसके सिंह, डिप्टी सीएमओ
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जिले में तकरीबन हर घर में बुजुर्ग मोतियाबिंद से पीड़ित हैं। ठंड के दिनों में ऑपरेशन कराने के लिए वे परेशान हो रहे हैं। दरअसल, चिकित्सक ठंड के दिनों में ही मोतियाबिंद का ऑपरेशन कराने के लिए लोगों को सलाह देते हैं। ऐसे में सर्दियों की शुरुआत होते ही अस्पतालों में भीड़ उमड़ने लगी है। लोग सीएचसी-पीएचसी के साथ मेडिकल कॉलेज के चक्कर काट रहे हैं। मरीजों की संख्या ज्यादा होने के कारण दस से पंद्रह दिन बाद लोगों को ऑपरेशन के लिए डेट दी जा रही है।
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मजबूरी में लोग प्रयागराज या फिर अमेठी के गौरीगंज स्थित राजीव गांधी नेत्र चिकित्सालय के चक्कर काट रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, सप्ताह भर के अंदर मेडिकल कॉलेज के नेत्र सर्जन विवेक त्रिपाठी डेढ़ सौ से अधिक मोतियाबिंद के मरीजों का ऑपरेशन कर चुके हैं। ढाई हजार लोगों को ऑपरेशन के लिए चिह्नित किया गया है।
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इसके अलावा जिले में सिर्फ कुंडा सीएचसी और महेशगंज पीएचसी में ही नेत्र सर्जन की तैनाती है। यहां भी ऑपरेशन कराने के लिए मरीजों की लंबी कतार है। लालगंज, पट्टी और रानीगंज क्षेत्र में एक भी नेत्र सर्जन की तैनाती नहीं हुई है। इससे यहां के मरीजों को परेशान होना पड़ रहा है।
मुफ्त ऑपरेशन का दावा, लिया जा रहा सुविधा शुल्क
स्वास्थ्य विभाग दावा करता है कि मोतियाबिंद के ऑपरेशन का कोई शुल्क नहीं लगता है। शासन की ओर से मुफ्त लेंस की व्यवस्था की जाती है, मगर सरकारी अस्पताल के लेंस को स्वास्थ्य विभाग के अफसर ही प्राइवेट अस्पतालों में भेज देते हैं। उसी लेंस को अधिकांश प्राइवेट अस्पताल संचालक मरीजों का ऑपरेशन के बाद लगाते हैं। लेंस के नाम पर मोटी रकम वसूलते हैं।
सरकारी अस्पतालों में सुविधा शुल्क नहीं लगता है। मुफ्त में ऑपरेेशन किया जा रहा है। मरीजों को चिह्नित कर ब्लॉकवार कैंप लगातर मोतियाबिंद के मरीजों का ऑपरेशन कराया जा रहा है। -डॉ. एसके सिंह, डिप्टी सीएमओ