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गोदी चढ़े, लाठी टेकी और मजबूत किया लोकतंत्र
Mon, 13 May 2019 12:59 AM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
Published by: विनोद सिंह
Updated Mon, 13 May 2019 12:59 AM IST
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पट्टी के उडैयाडीह बूथ पर 103 वर्षीय वृद्ध को लेकर पहुंचे परिजन।
- फोटो : pratapgarh
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‘वतन के नाम पर मेरे पांव में आ जाती है जान, पांव उनके हैं कमजोर जो वोट नहीं देते। आने से मेरे बूथ पर गर देश सुधर जाएगा, तो मजबूरियां मेरे पांव की बेड़ी नहीं हो सकतीं।’ कवि नागेंद्र अनुज की यह पंक्तियां मतदान के दिन बूथों पर सटीक दिखीं। पैर से मजबूत तमाम लोग वोट डालने घर से नहीं निकले।
मगर बुजुर्ग देश का भविष्य संवारने के लिए मतदान में पीछे नहीं रहे। दिव्यांग और बुजुर्ग जोश में आकर मतदान करने बूथों पर पहुंचे। उनका जोश देखते ही बनता रहा। वहीं दिव्यांग माता-पिता को श्रवण बनकर बेटों ने मतदान कराया।
शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक बुजुर्गों में वोट डालने को लेकर गजब का उत्साह रहा। वह खुद चल पाने में असमर्थ थे, लेकिन लोकतंत्र की मजबूती के लिए फिक्रमंद थे। शायद उनकी यही चिंता परिजनों की गोद में बैठ कर उन्हें बूथ तक खींच ले गई। कई वृद्ध महिलाएं भी लाठी टेकती हुईं मतदान करने के लिए बूथों पर पहुंचीं।
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सगरासुंदरपुर मतदान केंद्र पर वोट देने के लिए रामदीन लाठी के सहारे पहुंचे। शहर में अजीत नगर मतदान केंद्र पर बुजुर्ग पिता रामलाल का सहारा बनकर बेटा नंदलाल उन्हें मतदान के लिए ले गया। पट्टी तहसील बूथ पर दिव्यांग बेटे रमेश को उसकी मां सीता मतदान कराने पहुंचीं। रानीगंज विधानसभा क्षेत्र के सरायगनई निवासी दिव्यांग रामलाल सरोज ट्राई साइकिल से मतदान करने पहुंचा। गांगपाटी में दिव्यांग राजकुमार मत देने के लिए अकेले पहुंचा।
पट्टी विधानसभा के उड़ैयाडीह मतदान केंद्र पर 103 साल की प्यारी देवी को वोट दिलाने के लिए उनका बेटा लेकर पहुंचा। रानीगंज विधानसभा क्षेत्र के रसोइयां में अभिलाषी पांडेय भी मतदान करने पहुंचीं। पट्टी के सकरा बूथ पर दिव्यांग राम सिंह अकेले मतदान करने पहुंचे। जबकि पूरबगांव मतदान केंद्र पर अकेले वोट देने के लिए अस्सी साल की चंद्रावती देवी पहुंचीं।
कोहड़ौर प्राइमरी स्कूल में 105 साल की सरस्वती देवी को मतदान कराने के लिए परिजन गोद में लेकर पहुंचे। प्राथमिक विद्यालय नजियापुर में नजमा पत्नी सत्तार को वोट दिलाने के लिए बेटा आया। आसपुर देवसरा मतदान केंद्र पर 110 साल की चतुरा अपने बच्चों के साथ ठेले पर मतदान करने पहुंचीं।
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मगर बुजुर्ग देश का भविष्य संवारने के लिए मतदान में पीछे नहीं रहे। दिव्यांग और बुजुर्ग जोश में आकर मतदान करने बूथों पर पहुंचे। उनका जोश देखते ही बनता रहा। वहीं दिव्यांग माता-पिता को श्रवण बनकर बेटों ने मतदान कराया।
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शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक बुजुर्गों में वोट डालने को लेकर गजब का उत्साह रहा। वह खुद चल पाने में असमर्थ थे, लेकिन लोकतंत्र की मजबूती के लिए फिक्रमंद थे। शायद उनकी यही चिंता परिजनों की गोद में बैठ कर उन्हें बूथ तक खींच ले गई। कई वृद्ध महिलाएं भी लाठी टेकती हुईं मतदान करने के लिए बूथों पर पहुंचीं।
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सगरासुंदरपुर मतदान केंद्र पर वोट देने के लिए रामदीन लाठी के सहारे पहुंचे। शहर में अजीत नगर मतदान केंद्र पर बुजुर्ग पिता रामलाल का सहारा बनकर बेटा नंदलाल उन्हें मतदान के लिए ले गया। पट्टी तहसील बूथ पर दिव्यांग बेटे रमेश को उसकी मां सीता मतदान कराने पहुंचीं। रानीगंज विधानसभा क्षेत्र के सरायगनई निवासी दिव्यांग रामलाल सरोज ट्राई साइकिल से मतदान करने पहुंचा। गांगपाटी में दिव्यांग राजकुमार मत देने के लिए अकेले पहुंचा।
पट्टी विधानसभा के उड़ैयाडीह मतदान केंद्र पर 103 साल की प्यारी देवी को वोट दिलाने के लिए उनका बेटा लेकर पहुंचा। रानीगंज विधानसभा क्षेत्र के रसोइयां में अभिलाषी पांडेय भी मतदान करने पहुंचीं। पट्टी के सकरा बूथ पर दिव्यांग राम सिंह अकेले मतदान करने पहुंचे। जबकि पूरबगांव मतदान केंद्र पर अकेले वोट देने के लिए अस्सी साल की चंद्रावती देवी पहुंचीं।
कोहड़ौर प्राइमरी स्कूल में 105 साल की सरस्वती देवी को मतदान कराने के लिए परिजन गोद में लेकर पहुंचे। प्राथमिक विद्यालय नजियापुर में नजमा पत्नी सत्तार को वोट दिलाने के लिए बेटा आया। आसपुर देवसरा मतदान केंद्र पर 110 साल की चतुरा अपने बच्चों के साथ ठेले पर मतदान करने पहुंचीं।