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नहीं बना वार्ड, कहा जाएं आयुष्मान भारत योजना के मरीज  

Tue, 19 Feb 2019 12:24 AM IST
विनोद सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रतापगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रतापगढ़ Published by: विनोद सिंह Updated Tue, 19 Feb 2019 12:24 AM IST
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Do not make ward, be told patients of Ayushman Bharat scheme
ayushman bharat
 आयुष्मान भारत योजना के पात्र मरीजों का प्राइवेट की तर्ज पर सरकारी अस्पताल में बेहतर इलाज करने का दावा स्वास्थ्य विभाग करता है। मगर जनपद के जिला महिला अस्पताल के साथ ही एक भी नर्सिंगहोम में अलग से आयुष्मान भारत योजना के पात्र मरीजों को भर्ती कर इलाज करने के लिए अलग से कोई वार्ड नहीं बनाया गया है।
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ऐसे में जिला महिला अस्पताल में जहां एक बेड पर दो से तीन मरीजों को भर्ती किया जा रहा है, वहीं प्राइवेट अस्पताल संचालक भर्ती करने से इनकार कर दे रहे हैं। दबाव में भर्ती कर लेते हैं तो हालत नाजुक बताकर रेफर कर देते हैं। इसके चलते गरीब परिवार के लोगों को आयुष्मान भारत योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
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इलाज के अभाव में किसी की जान न जाए। समय रहते बेहतर से बेहतर उनका इलाज हो, इसके लिए शासन ने आयुष्मान भारत योजना शुरू की है। इस योजना के तहत जनपद के पांच नर्सिंगहोम और 17 सीएचसी को चयनित किया गया है। शासन ने सरकारी अस्पतालों में अलग से आयुष्मान भारत  योजना के वार्ड का निर्माण कराने के साथ ही चिकित्सकों और कर्मचारियों को तैनात करने के लिए आदेश दिया था।
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इतना ही नहीं जरूरत समझने पर पात्र मरीजों को मेडिकल स्टोर से दवा खरीदकर देने के लिए कहा था। मगर बेल्हा में ठीक इसके विपरीत हो रहा है। जिला अस्पताल को छोड़ दिया जाए तो बाकी महिला अस्पताल और अन्य सीएचसी में अभी तक आयुष्मान भारत के पात्र मरीजों को भर्ती कर इलाज करने के लिए अतिरिक्त वार्ड का निर्माण नहीं किया गया है।

ऐसे में जिला महिला अस्पताल में आने वाले आयुष्मान भारत के मरीजों को एक बेड पर दो से तीन प्रसव पीड़िताओं को भर्ती कर चिकित्सक इलाज करते हैं। सरकारी अस्पताल में जो दवा नहीं मिलती है वह अन्य मरीजों की तरह आयुष्मान भारत के मरीजों से भी खरीदवाई जाती है। जबकि शासन ने पात्र मरीजों का पांच लाख रुपये तक मुफ्त में इलाज कराने के लिए सीएमओ को आदेश दिया है। सरकारी अस्पताल में जांच और इलाज की व्यवस्था न होने पर प्राइवेट में कराने को कहा है। मगर स्वास्थ्य विभाग के मुखिया इससे अंजान बने हैं। मरीज परेशान हो रहे हैं।  
           
प्राइवेट अस्पताल संचालक भर्ती करने से खड़े कर देते हैं हाथ             
आयुष्मान भारत योजना के पात्रता का कार्ड लेकर प्राइवेट अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों को पहले तो अस्पताल संचालक भर्ती करने से इनकार कर देते हैं। दबाव में भर्ती भी कर लेते हैं तो कमीशन वाली दवा सेटिंग वाले मेडिकल स्टोर से खरीदवाते हैं। मरीजों से पैसा दिलाते हैं। डर वश मरीज इसकी शिकायत भी सीएमओ से नहीं करता है। मगर सीएमओ कभी इसकी जांच तक नहीं कराते हैं।              
           
 जनपद के जिला महिला अस्पताल के साथ ही एक भी नर्सिंगहोम में अलग से आयुष्मान भारत योजना के पात्र मरीजों को भर्ती कर इलाज करने के लिए अलग से कोई वार्ड नहीं बनाया गया है।           
जिला और महिला अस्पताल के साथ सीएचसी में अल्ट्रासाउंड, सीटी स्कैन और एमआरआई जांच की व्यवस्था नहीं है। ऐसे में मरीज परेशान होते हैं। चिकित्सक जांच लिख देते हैं तो मरीज पैसा खर्च कर जांच कराते हैं।  

डीएम ने लगाई क्लास
डीएम शंभु कुमार ने आयुष्मान भारत योजना के पात्र मरीजों को इसका लाभ न मिल पाने के कारण नाराजगी जताई। उन्होंने सीएमओ के साथ ही गौरा, रानीगंज और बेलखरनाथ सीएचसी अधीक्षक की जमकर क्लास लगाई। मरीजों को भर्ती कर इलाज करने के लिए आदेश दिया है।  

           
सौ बेड के अस्पताल का संचालन जल्द ही शुरू हो जाएगा। उसी अस्पताल में दस बेड का अतिरिक्त आयुष्मान भारत वार्ड बना दिया जाएगा। रही बात जांच की तो सीएमएस को कहा गया है कि वह सरकारी मद से जांच कराएं। प्राइवेट अस्पताल संचालक भर्ती कर इलाज नहीं कर रहे हैं तो पीड़ित शिकायत करें, तत्काल कार्रवाई की जाएगी।
अरविंद कुमार श्रीवास्तव, सीएमओ।
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