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दीपावली आज, शुभ मुहूर्त में करें लक्ष्मी-गणेश की पूजा
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कचहरी के बगल लगी दुकान पर लावा व चीनी के खिलौने खरीदते लोग। संवाद
- फोटो : PRATAPGARH
दिवाली पर शुभ मुहूर्त और लग्न में लक्ष्मी-गणेश की पूजा करने पर ही कृपा बरसती है। गोधूलि बेला में दीपदान और वृष लग्न में लक्ष्मी-गणेश की पूजा से घर में सुख-समृद्धि आती है। बृहस्पतिवार को गोधूलि बेला में शाम 5.30 बजे से दीपदान का शुभ लग्न है, जबकि शाम 6.04 से रात्रि 8.55 बजे तक वृष लग्न में पूजन का शुभ मुहूर्त है। इसके अलावा तंत्र-मंत्र जगाने के लिए निशीथकाल में 12.30 से 2.00 बजे तक शुभ लग्न है। विधि-विधान से होने वाली पूजा प्रारंभ करने के पहले भक्तों को पूर्ण तैयारी करनी चाहिए।
दिवाली के त्योहार पर मां लक्ष्मी-गणेश को प्रसन्न करने के लिए विधि-विधान से होने वाली पूजा के लिए शुभ मुहूर्त और लग्न का होना आवश्यक होता है। शाम को दीपदान 5.30 बजे से शुरू हो जाएगा। वृष लग्न में 6.04 से 8.55 बजे तक पूजा करने का शुभ मुहूर्त माना गया है। घर और बाहर दीपों से रोशन करने के बाद विधि-विधान से पूजन-अर्चन करना चाहिए। लक्ष्मी-गणेश के पूजन के लिए विशेष सावधानियां बरतनी चाहिए।
पूजन से पहले सभी सामग्रियों को पूजा स्थल पर एकत्रित कर लेना चाहिए। पूजा करने के लिए मन और चित्त को एकाग्र कर बैठना चाहिए। जब तक पूजा की रस्म पूरी न हो जाए तब तक वेदी से नहीं उठना चाहिए। लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए कमल का फूल और मोतीचूर का लड्डू चढ़ाना न भूले। गणेशजी की पूजा करते समय तुलसी दल भूलकर भी न चढ़ाएं।
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तंत्र, मंत्र जगाने वाले और शस्त्र की पूजा करने के लिए निशीथकाल में रात 12.30 से 2.00 तक शुभ लग्न है। इस अवधि में लोग पूजन-अर्चन कर सकते हैं। ज्योतिषाचार्य पं. आलोक मिश्रा ने बताया कि लक्ष्मी-गणेश की पूजा कभी भी और किसी भी समय की जा सकती है, मगर अमावस्या को होने वाली पूजा शुभ लग्न और मुहूर्त में होने पर फलदायक सिद्ध होती है।
लक्ष्मी के बाएं तरफ गणेश का लगाएं आसन
पूजा करते समय विशेष सावधानी बरतें। जिस आसन पर मां लक्ष्मी आसीन होंगी, उसी आसन पर बायीं तरफ गणपति का आसन लगाएं। हालांकि सामने जब आप बैठेंगे, तो वह आपके दाहिने तरफ हो जाएंगे। मान्यता है कि ऐसा करने से गणेशजी प्रसन्न होते हैं।
कैसे करें पूजन-अर्चन
मां लक्ष्मी-गणेश की पूजा करने से पहले मूर्ति को स्वच्छ जल से धुलकर पवित्र करना चाहिए। इसके बाद संपूर्ण पूजा स्थल पर गंगाजल छिड़कें। मां लक्ष्मी और गणेशजी का आह्वान करें। पुष्प, पल्लव, धूप, दीप, नैवेद्य अर्पित करने के बाद भोग लगाएं। माता को प्रसन्न करने के लिए आरती का पाठ करें। परिवार के मुखिया के पूजा करते समय सभी सदस्यों को अवश्य मौजूद रहना चाहिए।
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दिवाली के त्योहार पर मां लक्ष्मी-गणेश को प्रसन्न करने के लिए विधि-विधान से होने वाली पूजा के लिए शुभ मुहूर्त और लग्न का होना आवश्यक होता है। शाम को दीपदान 5.30 बजे से शुरू हो जाएगा। वृष लग्न में 6.04 से 8.55 बजे तक पूजा करने का शुभ मुहूर्त माना गया है। घर और बाहर दीपों से रोशन करने के बाद विधि-विधान से पूजन-अर्चन करना चाहिए। लक्ष्मी-गणेश के पूजन के लिए विशेष सावधानियां बरतनी चाहिए।
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पूजन से पहले सभी सामग्रियों को पूजा स्थल पर एकत्रित कर लेना चाहिए। पूजा करने के लिए मन और चित्त को एकाग्र कर बैठना चाहिए। जब तक पूजा की रस्म पूरी न हो जाए तब तक वेदी से नहीं उठना चाहिए। लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए कमल का फूल और मोतीचूर का लड्डू चढ़ाना न भूले। गणेशजी की पूजा करते समय तुलसी दल भूलकर भी न चढ़ाएं।
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तंत्र, मंत्र जगाने वाले और शस्त्र की पूजा करने के लिए निशीथकाल में रात 12.30 से 2.00 तक शुभ लग्न है। इस अवधि में लोग पूजन-अर्चन कर सकते हैं। ज्योतिषाचार्य पं. आलोक मिश्रा ने बताया कि लक्ष्मी-गणेश की पूजा कभी भी और किसी भी समय की जा सकती है, मगर अमावस्या को होने वाली पूजा शुभ लग्न और मुहूर्त में होने पर फलदायक सिद्ध होती है।
लक्ष्मी के बाएं तरफ गणेश का लगाएं आसन
पूजा करते समय विशेष सावधानी बरतें। जिस आसन पर मां लक्ष्मी आसीन होंगी, उसी आसन पर बायीं तरफ गणपति का आसन लगाएं। हालांकि सामने जब आप बैठेंगे, तो वह आपके दाहिने तरफ हो जाएंगे। मान्यता है कि ऐसा करने से गणेशजी प्रसन्न होते हैं।
कैसे करें पूजन-अर्चन
मां लक्ष्मी-गणेश की पूजा करने से पहले मूर्ति को स्वच्छ जल से धुलकर पवित्र करना चाहिए। इसके बाद संपूर्ण पूजा स्थल पर गंगाजल छिड़कें। मां लक्ष्मी और गणेशजी का आह्वान करें। पुष्प, पल्लव, धूप, दीप, नैवेद्य अर्पित करने के बाद भोग लगाएं। माता को प्रसन्न करने के लिए आरती का पाठ करें। परिवार के मुखिया के पूजा करते समय सभी सदस्यों को अवश्य मौजूद रहना चाहिए।