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गोधूलि बेला में दीपदान, वृष लग्न में करें लक्ष्मी-गणेश की पूजा
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गोधूलि बेला में दीपदान, वृष लग्न में करें लक्ष्मी-गणेश की पूजा
शुभ मुहूर्त में करें लक्ष्मी-गणेश की पूजा, बरसेगी कृपा
शाम को 6.45 से रात्रि 8.41 बजे तक है पूजन का उपयुक्त समय
तंत्र, मंत्र जगाने के लिए निशीथकाल है शुभ लग्न
प्रतापगढ़। दिवाली पर शुभ मुहूर्त और लग्न में लक्ष्मी-गणेश की पूजा करने पर ही कृपा बरसती है। गोधूलि बेला में दीपदान और वृष लग्न में लक्ष्मी-गणेश की पूजा से भक्त पर लक्ष्मी-गणेश की कृपा बरसती है। शाम छह बजे से 7.15 तक दीपदान का शुभ लग्न है, जबकि वृष लग्न शाम 6.45 से रात्रि 8.41 बजे तक शुभ मुहूर्त है। जबकि तंत्र, मंत्र जगाने के लिए निशीथकाल में 12.20 से 3.27 तक शुभ लग्न है। विधि-विधान से होने वाली पूजा प्रारंभ करने के पहले भक्तों को पूर्ण तैयारी करनी चाहिए।
दिवाली त्योहार पर मां लक्ष्मी- गणेश को प्रसन्न करने के लिए विधि-विधान से होने वाली पूजा के लिए शुभ मुहूर्त और लग्न का होना आवश्यक होता है। शाम को दीपदान के लिए 6.0 बजे से 7.15 वृष लग्न में 6.45 से 8.41 बजे तक पूजा करने का शुभ मुहूर्त माना गया है। घर और बाहर दीपों से रोशन करने के बाद विधि-विधान से पूजन-अर्चन करना चाहिए। लक्ष्मी-गणेश के पूजन के लिए विशेष सावधानियां बरतनी चाहिए। पूजन से पहले सभी सामग्रियों को पूजा स्थल पर एकत्रित कर लेना चाहिए। पूजा करने के लिए मन और चित्त को एकाग्र करके बैठना चाहिए। जब तक पूजा की रस्म पूरी न हो जाए तब तक वेदी से नहीं उठना चाहिए। लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए कमल का फूल और मोती चूर का लड्डू चढ़ाना न भूले। मगर गणेशजी की पूजा करते समय तुलसी दल को भूलकर भी न चढ़ाएं। गणेशजी तुलसी दल से अप्रसन्न होते हैं। इससे आपकी पूजा सफल नहीं होगी। तंत्र, मंत्र जगाने वाले और शस्त्र की पूजा करने के लिए निशीथकाल का 12.20 से 3.27 तक शुभ लग्न है। इस अवधि में लोग पूजन-अर्चन कर सकते हैं। पं. ओम प्रकाश पांडेय अनिरुध्द जगन्नाथ ने बताया कि लक्ष्मी-गणेश की पूजा कभी भी और किसी भी समय की जा सकती है। मगर अमावस्या को होने वाली पूजा शुभ लग्न और मुहूर्त में होने पर फलदायक सिद्ध होती है।
एक बीता से अधिक बड़ी नहीं होनी चाहिए मूर्ति
लक्ष्मी- गणेश की प्रतिमा खरीदते समय सावधानी बरतनी चाहिए। जो मूर्ति आप खरीद रहे हैं, वह आपके एक बीता (अगूंठा और बीच के उंगली की लंबाई के बराबर) से अधिक बड़ी नहीं होनी चाहिए।
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लक्ष्मी के बाएं तरफ गणेश का लगाएं आसन
पूजा करते समय विशेष सावधानी बरते, जिस आसन पर मां लक्ष्मी आसीन होंगी, उसी आसन पर बाई तरफ गण्ेाशजी का आसन लगाएं। हालांकि सामने जब आप बैठेंगे, तो आपके दाहिने तरफ हो जाएंगे। मगर ऐसी मान्यता है कि ऐसा करने से गणेश जी प्रसन्न होते हैं।
कैसे करें पूजन-अर्चन
मां लक्ष्मी,गणेश की पूजा करने के पहले मूर्ति को स्वच्छ जल से धुल कर पवित्र करना चाहिए। इसके बाद संपूर्ण पूजा स्थल पर गंगाजल का छिड़के। मां लक्ष्मी और गणेशजी का आह्वान करें। पुष्प, पल्लव, धूप, दीप, नैवेद्य अर्पित करने के बाद भोग लगाएं। माता को प्रसन्न करने के लिए आरती का पाठ करें। परिवार के मुखिया के पूजा करते समय सभी सदस्यों को अवश्य मौजूद रहना चाहिए। ऐसी मान्यता है कि पूजा चाहे जिस रुप में कि जाए, मगर मूर्ति में कुछ पल के लिए मां लक्ष्मी और गणेश अवतरित होती हैं। उस समय मौजूद लोगों को आशीर्वाद देती हैं।
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शुभ मुहूर्त में करें लक्ष्मी-गणेश की पूजा, बरसेगी कृपा
शाम को 6.45 से रात्रि 8.41 बजे तक है पूजन का उपयुक्त समय
तंत्र, मंत्र जगाने के लिए निशीथकाल है शुभ लग्न
प्रतापगढ़। दिवाली पर शुभ मुहूर्त और लग्न में लक्ष्मी-गणेश की पूजा करने पर ही कृपा बरसती है। गोधूलि बेला में दीपदान और वृष लग्न में लक्ष्मी-गणेश की पूजा से भक्त पर लक्ष्मी-गणेश की कृपा बरसती है। शाम छह बजे से 7.15 तक दीपदान का शुभ लग्न है, जबकि वृष लग्न शाम 6.45 से रात्रि 8.41 बजे तक शुभ मुहूर्त है। जबकि तंत्र, मंत्र जगाने के लिए निशीथकाल में 12.20 से 3.27 तक शुभ लग्न है। विधि-विधान से होने वाली पूजा प्रारंभ करने के पहले भक्तों को पूर्ण तैयारी करनी चाहिए।
दिवाली त्योहार पर मां लक्ष्मी- गणेश को प्रसन्न करने के लिए विधि-विधान से होने वाली पूजा के लिए शुभ मुहूर्त और लग्न का होना आवश्यक होता है। शाम को दीपदान के लिए 6.0 बजे से 7.15 वृष लग्न में 6.45 से 8.41 बजे तक पूजा करने का शुभ मुहूर्त माना गया है। घर और बाहर दीपों से रोशन करने के बाद विधि-विधान से पूजन-अर्चन करना चाहिए। लक्ष्मी-गणेश के पूजन के लिए विशेष सावधानियां बरतनी चाहिए। पूजन से पहले सभी सामग्रियों को पूजा स्थल पर एकत्रित कर लेना चाहिए। पूजा करने के लिए मन और चित्त को एकाग्र करके बैठना चाहिए। जब तक पूजा की रस्म पूरी न हो जाए तब तक वेदी से नहीं उठना चाहिए। लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए कमल का फूल और मोती चूर का लड्डू चढ़ाना न भूले। मगर गणेशजी की पूजा करते समय तुलसी दल को भूलकर भी न चढ़ाएं। गणेशजी तुलसी दल से अप्रसन्न होते हैं। इससे आपकी पूजा सफल नहीं होगी। तंत्र, मंत्र जगाने वाले और शस्त्र की पूजा करने के लिए निशीथकाल का 12.20 से 3.27 तक शुभ लग्न है। इस अवधि में लोग पूजन-अर्चन कर सकते हैं। पं. ओम प्रकाश पांडेय अनिरुध्द जगन्नाथ ने बताया कि लक्ष्मी-गणेश की पूजा कभी भी और किसी भी समय की जा सकती है। मगर अमावस्या को होने वाली पूजा शुभ लग्न और मुहूर्त में होने पर फलदायक सिद्ध होती है।
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एक बीता से अधिक बड़ी नहीं होनी चाहिए मूर्ति
लक्ष्मी- गणेश की प्रतिमा खरीदते समय सावधानी बरतनी चाहिए। जो मूर्ति आप खरीद रहे हैं, वह आपके एक बीता (अगूंठा और बीच के उंगली की लंबाई के बराबर) से अधिक बड़ी नहीं होनी चाहिए।
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लक्ष्मी के बाएं तरफ गणेश का लगाएं आसन
पूजा करते समय विशेष सावधानी बरते, जिस आसन पर मां लक्ष्मी आसीन होंगी, उसी आसन पर बाई तरफ गण्ेाशजी का आसन लगाएं। हालांकि सामने जब आप बैठेंगे, तो आपके दाहिने तरफ हो जाएंगे। मगर ऐसी मान्यता है कि ऐसा करने से गणेश जी प्रसन्न होते हैं।
कैसे करें पूजन-अर्चन
मां लक्ष्मी,गणेश की पूजा करने के पहले मूर्ति को स्वच्छ जल से धुल कर पवित्र करना चाहिए। इसके बाद संपूर्ण पूजा स्थल पर गंगाजल का छिड़के। मां लक्ष्मी और गणेशजी का आह्वान करें। पुष्प, पल्लव, धूप, दीप, नैवेद्य अर्पित करने के बाद भोग लगाएं। माता को प्रसन्न करने के लिए आरती का पाठ करें। परिवार के मुखिया के पूजा करते समय सभी सदस्यों को अवश्य मौजूद रहना चाहिए। ऐसी मान्यता है कि पूजा चाहे जिस रुप में कि जाए, मगर मूर्ति में कुछ पल के लिए मां लक्ष्मी और गणेश अवतरित होती हैं। उस समय मौजूद लोगों को आशीर्वाद देती हैं।