{"_id":"571cf42c4f1c1b742f8b52c8","slug":"divyang-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"खाना-नाश्ता नहीं मिलने पर दिव्यांगों ने छोड़ी पढ़ाई ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
खाना-नाश्ता नहीं मिलने पर दिव्यांगों ने छोड़ी पढ़ाई
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
Updated Sun, 24 Apr 2016 10:40 PM IST
विज्ञापन
pratapgarh
दिव्यांगों को नाश्ता और खाना नहीं मिलने से पढ़ाई छोड़ दी है। विभागीय अधिकारियों की कमीशनबाजी के चलते दोपहर में कभी एक बजे और कभी तीन बजे भोजन दिया जाता है। इससे तंग आकर अभिभावकों ने अपने 59 बच्चों को विकलांग केंद्र से हटा लिया है। वार्डेन की शिकायत के बाद भी विभागीय अधिकारी नहीं चेत रहे हैं। पौष्टिक आहार के नाम पर बच्चों को घटिया नाश्ता और खाना परोसा जा रहा है।
बेसिक शिक्षा विभाग में सर्व शिक्षा अभियान के तहत शहर में दो दिव्यांग शिविर चलाया जा रहा है। पहला केंद्र पुलिस लाइन स्थित पूर्व माध्यमिक विद्यालय में खुला हुआ है, तो दूसरा शुकुलपुर प्राइमरी स्कूल में संचालित है। पुलिस लाइन के बच्चों को केंद्र पर ही खाना बनाकर खिलाया जाता है, जबकि शुकुलपुर केंद्र पर यहीं से खाना पहुंचाया जाता है। इससे अक्सर खाना और नाश्ता पहुंचने में देरी होती है और बच्चे से भूख से कराह उठते हैं। खाना देर से मिलने की बात एक दिन की नहीं है, बल्कि ऐसा प्राय: होता है। दिव्यांग केंद्र का जब शुभारंभ किया गया तो पुलिस लाइन में 46 और शुकुलपुर में 35 बच्चे नामांकित थे। बगैर वर्तमान में यह संख्या घटकर आधे से भी कम हो गई है। रविवार को शुकुलपुर में आठ और पुलिस लाइन में 14 बच्चे मौजूद मिले। नाश्ता और खाना देर से और गुणवत्ता हीन मिलने के कारण 59 बच्चों ने पढ़ाई छोड़ दी।
बच्चों की संख्या में अचानक आई कमी का मुख्य कारण ठेकेदार की मनमानी बताई जा रही है। बच्चों को पौष्टिक भोजन के नाम पर घटिया खाना दिया जा रहा है। वह भी कभी दोपहर में एक बजे और कभी तीन बजे शाम को दिया जाता है। भूख से कराहने वाले बच्चे कभी-कभी भूख बर्दास्त नहीं होने पर रोने लगते हैं। ऐसी दशा में शिक्षक अपने जेब से खर्च कर बच्चों को नाश्ता कराते हैं। बोलने में अक्षम बच्चों ने इशारे में ही बताया कि खाना काफी घटिया होता है, इसलिए खाने की इच्छा नहीं होती है। ऐसा नहीं है कि इसकी शिकायत बीएसए कार्यालय तक नहीं पहुंचती है। शुकुलपुर केंद्र की वार्डेन सीमा देवी प्रति सप्ताह यह शिकायतें बीएसए कार्यालय भेजती हैं, मगर कमीशन खाने में मस्त अधिकारी इस ओर देखना पसंद नहीं करते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
बेसिक शिक्षा विभाग में सर्व शिक्षा अभियान के तहत शहर में दो दिव्यांग शिविर चलाया जा रहा है। पहला केंद्र पुलिस लाइन स्थित पूर्व माध्यमिक विद्यालय में खुला हुआ है, तो दूसरा शुकुलपुर प्राइमरी स्कूल में संचालित है। पुलिस लाइन के बच्चों को केंद्र पर ही खाना बनाकर खिलाया जाता है, जबकि शुकुलपुर केंद्र पर यहीं से खाना पहुंचाया जाता है। इससे अक्सर खाना और नाश्ता पहुंचने में देरी होती है और बच्चे से भूख से कराह उठते हैं। खाना देर से मिलने की बात एक दिन की नहीं है, बल्कि ऐसा प्राय: होता है। दिव्यांग केंद्र का जब शुभारंभ किया गया तो पुलिस लाइन में 46 और शुकुलपुर में 35 बच्चे नामांकित थे। बगैर वर्तमान में यह संख्या घटकर आधे से भी कम हो गई है। रविवार को शुकुलपुर में आठ और पुलिस लाइन में 14 बच्चे मौजूद मिले। नाश्ता और खाना देर से और गुणवत्ता हीन मिलने के कारण 59 बच्चों ने पढ़ाई छोड़ दी।
विज्ञापन
बच्चों की संख्या में अचानक आई कमी का मुख्य कारण ठेकेदार की मनमानी बताई जा रही है। बच्चों को पौष्टिक भोजन के नाम पर घटिया खाना दिया जा रहा है। वह भी कभी दोपहर में एक बजे और कभी तीन बजे शाम को दिया जाता है। भूख से कराहने वाले बच्चे कभी-कभी भूख बर्दास्त नहीं होने पर रोने लगते हैं। ऐसी दशा में शिक्षक अपने जेब से खर्च कर बच्चों को नाश्ता कराते हैं। बोलने में अक्षम बच्चों ने इशारे में ही बताया कि खाना काफी घटिया होता है, इसलिए खाने की इच्छा नहीं होती है। ऐसा नहीं है कि इसकी शिकायत बीएसए कार्यालय तक नहीं पहुंचती है। शुकुलपुर केंद्र की वार्डेन सीमा देवी प्रति सप्ताह यह शिकायतें बीएसए कार्यालय भेजती हैं, मगर कमीशन खाने में मस्त अधिकारी इस ओर देखना पसंद नहीं करते हैं।
विज्ञापन