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करोड़ों रुपये खर्च फिर भी नहीं चमका शहर

Wed, 03 Aug 2016 12:22 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़ Updated Wed, 03 Aug 2016 12:22 AM IST
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बीते कुछ सालों में शहर का दायरा बढ़ा, आबादी बढ़ी, लोगों की जरूरतें बढ़ीं, लेकिन शहरियों को सुविधाओं के नाम पर कुछ भी नहीं हासिल हुआ। उनकी दुश्वारियां जहां की तहां हैं। करोड़ों खर्च करने के बाद भी शहर बदसूरत ही रह गया। विकास और शहर को चमकाने के लिए हर दिन कार्ययोजना और फाइलें तैयार होती रहीं, लेकिन नतीजा सिफर रहा। कुछ काम हुआ भी तो देखरेख के अभाव में सब चौपट हो गया। हालात जस के तस हैं। आठ साल बाद भी मोहल्लों में सीवर लाइन नहीं बिछाई जा सकी। सीवर ट्रीटमेंट प्लांट भी चालू नहीं हो सका। शहरी मुसीबतों के कहर से कराह रहे हैं, लेकिन फिलहाल उन्हें आराम मिलता नहीं दिखाई दे रहा। इस हालात पर नगर पालिका प्रशासन ठोस कदम नहीं उठा रहा तो जिला प्रशासन ने भी आंखें बंद कर रखी हैं। मोहल्लों की गलियों में आज भी अंधेरा है। शहर के दो पार्कों को छोड़कर अन्य में नगरवासियों को बैठना तो दूर खड़ा होना भी गंवारा नहीं होता।  
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शहरियों की समस्याओं को देखते हुए वर्ष 2007 में तत्कालीन सांसद गोपालजी के प्रयास से सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट व सीवर लाइन बिछाने के लिए शासन से मंजूरी मिली थी। 8.5 करोड़ रुपये खर्च होने के बाद सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट बनकर तैयार तो हो गया, लेकिन आज तक चालू नहीं हो सका। इतनी रकम खर्च करने के बाद भी शहरियों को इसका फायदा नहीं मिल सका। यदि सीवरेज प्लांट प्रारंभ हो गया होता तो सई नदी में नगर की गंदगी न जाती। वर्ष 2007 में नागरिकों को सपा सरकार ने सीवर लाइन की सौगात दी थी। कई सालों तक टेंडर के बाद भी काम नहीं प्रारंभ हो सका। काफी प्रयास के बाद नगर में सीवर लाइन बिछाने का काम प्रारंभ हो सका। अभी शहर के कई हिस्से में सीवर के लिए पाइप लाइन तक बिछाई नहीं जा सकी है। इससे शहरियों को जलनिकासी समेत अन्य समस्याओं का सामना करना पड़ता है। लोगों के शौचालयों का गंदा पानी सीधे नालों में गिरते हुए नदी में पहुंच रहा है।
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चौराहों को चमकाने व लकदक करने के लिए नगर पालिका परिषद ने करीब दस सालों में पचास लाख से भी अधिक रुपये खर्च कर दिए, लेकिन नतीजा ढाक के तीन पात ही रहा। शहर के सभी चौराहे वीरान पड़े हैं। कई साल पहले चौराहों पर स्थापित प्रतिमाओं को नया लुक देने के बाद लाइटिंग व फौव्वारा लगाया गया। शहर के करीब दस से चौराहों का कायाकल्प में नगर पालिका ने 50 लाख से अधिक  खर्च कर दिए, देखरेख के अभाव में सब बर्बाद हो गया। मौजूदा समय में सभी चौराहों के फौव्वारे बंद पड़े हैं। भंगवाचुंगी, न्यू कालोनी बाबागंज, पंजाबी मार्केट,  श्रीराम तिराहा, छत्रपति शिवाजी चौराहा सूने पड़े हैं। लाइटें व फौव्वारा गायब है। केवल कंपनी बाग में लगा फौव्वारा ही चालू है।
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