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कृषि विधेयक के विरोध में प्रदर्शन, नारेबाजी
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मांगों को लेकर जुलूस निकाल कर प्रदर्शन करते कांग्रेस कार्यकर्ता।
- फोटो : PRATAPGARH
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कृषि विधेयक के विरोध में भारतीय किसान यूनियन के भारत बंद के आह्वान पर कांग्रेस, सपा और भाकपा भी समर्थन पर उतर आई। अंबेडकर चौराहा और पुलिस लाइन चौराहे पर धरना-प्रदर्शन कर कार्यकर्ताओं ने कृषि विधेयक को कंपनीराज और बंधुआ मजदूरी की उपमा देते हुए काले कानून को वापस लेने की मांग की है।
भारतीय किसान यूनियन के कार्यकर्ताओं ने चेताया है कि अगर सरकार ने विधेयक को वापस नहीं लिया, तो विरोध का स्वर और तेजी से उठेगा। भारत बंद को लेकर पुलिस सुबह से ही सक्रिय रही। जुलूस निकालने और प्रदर्शन करने वालों को पुलिस ने रोकने का प्रयास नहीं किया, बल्कि वह मूकदर्शक बनी रही।
कृषि विधेयक के विरोध में भारतीय किसान यूनियन के भारत बंद का असर तो बेल्हा में देखने को नहीं मिला, मगर किसान यूनियन के समर्थन में सपा किसान कर्फ्यू, कांग्रेस और माकपा के कार्यकर्ता समर्थन में उतर आए। अंबेडकर चौराहे और पुलिस लाइन चौराहे पर प्रदर्शन कर भारतीय किसान यूनियन के जिलाध्यक्ष रमाकांत यादव ने कहा कि 1943-44 में बंगाल में जब सूखा पड़ा था, तब ईस्ट इंडिया कंपनी के अनाज भंडारण के कारण 40 लाख लोग भूख से मर गए थे। मोदी सरकार एक बार फिर कंपनीराज को जन्म देना चाहती है। उन्होंने कहा कि कृषि विधेयक से किसानों का नहीं कंपनियों का अधिक फायदा होगा। इस मौके पर राजेश मिश्र, राम आनंद वर्मा, पवन कुमार मिश्र, श्याम लाल, रामचंद्र यादव, पप्पू यादव प्रमुख रुप से मौजूद रहे।
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कांग्रेस जिलाध्यक्ष बृजेंद्र मिश्र ने कहा कि किसान आश्वासन एवं कृषि सेवा पर करार विधेयक, कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य विधेयक, आवश्यक वस्तु अधिनियम संशोधन विधेयक को किसानों के लिए घातक बताया। अंबेडकर चौराहे पर जुलूस निकाल कर प्रदर्शन किया और नारेबाजी करते हुए कचहरी पहुंचकर राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन सौंपा। कांग्रेसियों ने चेताया है कि अगर केंद्र सरकार ने अमल नहीं कि विरोध झेलना होगा। इस मौके पर यमुना प्रसाद पांडेय, संतोष त्रिपाठी, करुण पांडेय, मनोज पांडेय, राजनारायण पांडेय, संतोष शर्मा, श्याम शंकर तिवारी प्रमुख रूप से मौजूद रहे।
अखिल भारतीय किसान सभा ने कचहरी में धरना-प्रदर्शन कर कृषि विधेयक का विरोध किया। जिलाध्यक्ष कमरुद्दीन और महामंत्री निर्भय प्रताप सिंह के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन करते हुए कहा कि किसानों की अनदेखी करने वाली सरकार की कलई खुल चुकी है। महामंत्री ने कहा कि किसान विरोधी विधेयक को किसी भी दशा में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। किसान सभा का समर्थन भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी मार्क्सवादी ने विरोध प्रदर्शन में शामिल होकर किसानों के लिए काला कानून बताया। भाकपा के जिलामंत्री रामबरन सिंह, गंगा सिंह, राजमणि पांडेय, लाल बहादुर तिवारी प्रमुख रूप से मौजूद रहे।
सपाइयों ने कृषि विधेयक को काला कानून बताते हुए जमकर प्रदर्शन कर नारेबाजी की और किसान हित में विधेयक को वापस लेने की मांग उठाई। जिला महासचिव अनीस खान ने कहा कि मोदी सरकार से किसानों को यह उम्मीद नहीं थी। मोदी इस तरह किसानों को विश्वास में लेने का प्रयास कर रहे हैं, जैसे वह किसानों के बहुत बड़े हितैषी हैं। सपा कार्यकर्ताओं पर हो रहे उत्पीड़न पर प्रदेश सरकार के खिलाफ जमकर भड़ास निकाली। इस मौके पर मो. इरशाद, शांति सिंह, सचिन शर्मा, महेंद्र यादव, राजू यादव, गीता यादव, अभिषेक तिवारी प्रमुख रूप से मौजूद रहे।
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भारतीय किसान यूनियन के कार्यकर्ताओं ने चेताया है कि अगर सरकार ने विधेयक को वापस नहीं लिया, तो विरोध का स्वर और तेजी से उठेगा। भारत बंद को लेकर पुलिस सुबह से ही सक्रिय रही। जुलूस निकालने और प्रदर्शन करने वालों को पुलिस ने रोकने का प्रयास नहीं किया, बल्कि वह मूकदर्शक बनी रही।
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कृषि विधेयक के विरोध में भारतीय किसान यूनियन के भारत बंद का असर तो बेल्हा में देखने को नहीं मिला, मगर किसान यूनियन के समर्थन में सपा किसान कर्फ्यू, कांग्रेस और माकपा के कार्यकर्ता समर्थन में उतर आए। अंबेडकर चौराहे और पुलिस लाइन चौराहे पर प्रदर्शन कर भारतीय किसान यूनियन के जिलाध्यक्ष रमाकांत यादव ने कहा कि 1943-44 में बंगाल में जब सूखा पड़ा था, तब ईस्ट इंडिया कंपनी के अनाज भंडारण के कारण 40 लाख लोग भूख से मर गए थे। मोदी सरकार एक बार फिर कंपनीराज को जन्म देना चाहती है। उन्होंने कहा कि कृषि विधेयक से किसानों का नहीं कंपनियों का अधिक फायदा होगा। इस मौके पर राजेश मिश्र, राम आनंद वर्मा, पवन कुमार मिश्र, श्याम लाल, रामचंद्र यादव, पप्पू यादव प्रमुख रुप से मौजूद रहे।
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कांग्रेस जिलाध्यक्ष बृजेंद्र मिश्र ने कहा कि किसान आश्वासन एवं कृषि सेवा पर करार विधेयक, कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य विधेयक, आवश्यक वस्तु अधिनियम संशोधन विधेयक को किसानों के लिए घातक बताया। अंबेडकर चौराहे पर जुलूस निकाल कर प्रदर्शन किया और नारेबाजी करते हुए कचहरी पहुंचकर राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन सौंपा। कांग्रेसियों ने चेताया है कि अगर केंद्र सरकार ने अमल नहीं कि विरोध झेलना होगा। इस मौके पर यमुना प्रसाद पांडेय, संतोष त्रिपाठी, करुण पांडेय, मनोज पांडेय, राजनारायण पांडेय, संतोष शर्मा, श्याम शंकर तिवारी प्रमुख रूप से मौजूद रहे।
अखिल भारतीय किसान सभा ने कचहरी में धरना-प्रदर्शन कर कृषि विधेयक का विरोध किया। जिलाध्यक्ष कमरुद्दीन और महामंत्री निर्भय प्रताप सिंह के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन करते हुए कहा कि किसानों की अनदेखी करने वाली सरकार की कलई खुल चुकी है। महामंत्री ने कहा कि किसान विरोधी विधेयक को किसी भी दशा में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। किसान सभा का समर्थन भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी मार्क्सवादी ने विरोध प्रदर्शन में शामिल होकर किसानों के लिए काला कानून बताया। भाकपा के जिलामंत्री रामबरन सिंह, गंगा सिंह, राजमणि पांडेय, लाल बहादुर तिवारी प्रमुख रूप से मौजूद रहे।
सपाइयों ने कृषि विधेयक को काला कानून बताते हुए जमकर प्रदर्शन कर नारेबाजी की और किसान हित में विधेयक को वापस लेने की मांग उठाई। जिला महासचिव अनीस खान ने कहा कि मोदी सरकार से किसानों को यह उम्मीद नहीं थी। मोदी इस तरह किसानों को विश्वास में लेने का प्रयास कर रहे हैं, जैसे वह किसानों के बहुत बड़े हितैषी हैं। सपा कार्यकर्ताओं पर हो रहे उत्पीड़न पर प्रदेश सरकार के खिलाफ जमकर भड़ास निकाली। इस मौके पर मो. इरशाद, शांति सिंह, सचिन शर्मा, महेंद्र यादव, राजू यादव, गीता यादव, अभिषेक तिवारी प्रमुख रूप से मौजूद रहे।

नांगो को लेकर कचहरी में एसडीएम को ज्ञापन देते भाकियू के कार्यकता।- फोटो : PRATAPGARH

जिलाधिकारी कार्यालय के सामने मांगों को लेकर प्रदर्शन करते सपा के कार्यकर्ता।- फोटो : PRATAPGARH