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Pratapgarh News: मोतिहारी हादसे में मृत मजदूरों का शव पहुंचा घर

Tue, 27 Dec 2022 05:00 AM IST
Allahabad Bureau इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Tue, 27 Dec 2022 05:00 AM IST
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Dead body of laborers reached home in Motihari accident
मानिकपुर के रैकवारन का पुरवा कियावां में बुधई की बिलखती पत्नी को सांत्वना देती गांव की महिलाएं। ? - फोटो : PRATAPGARH
बिहार प्रांत के मोतिहारी में सासाराम ईंट-भट्ठे पर मजदूरी करने गए चारों मृत मजदूरों का शव रविवार की देर रात घर पहुंचते ही कोहराम मच गया। परिजन शव से लिपटक रोने लगे। गांव के लोग भी अपने आंसू नहीं रोक सके। सोमवार दोपहर बाद परिजनों ने शवों का अंतिम संस्कार कर दिया। तीन दिनों से उनके घरों में चूल्हा तक नहीं जला।
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कुंडा कोतवाली क्षेत्र के लरू झलिहन गांव निवासी सुभाष सरोज, पूरे खींचर सरियावां निवासी दीपक सरोज, मानिकपुर के कियावां निवासी बुधई सरोज व शिवचरन का पुरवा निवासी अनिल सरोज बिहार के मोतिहारी जिले में ईंट भट्ठे पर काम करते थे। शुक्रवार की शाम ईंट भट्ठे की चिमनी फटने के दौरान चारों की मौत हो गई। रविवार की देर रात एंबुलेंस से सभी का शव घर लाया गया। शव पहुंचते ही परिजन रोने बिलखने लगे। सुबह परिजनों ने ग्रामीणों के साथ शवों का अंतिम संस्कार किया। इन मौतों के बाद से गांव में सन्नाटा पसरा है।
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मोतिहारी के प्राइवेट अस्पताल में घायलों का हो रहा इलाज
लरू केसरी का पुरवा निवासी भोला सरोज, बहरामई के अमरेश सरोज व बड़ेरा के सुरेंद्र कुमार का इलाज जिला अस्पताल में चल रहा था। परिजनों ने वहां के इलाज से अंसतोष जाहिर किया तो उन्हें वहीं के एक प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया गया है। अभी भी इनमें से कुछ की हालत गंभीर है।
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बच्चों की शादी नहीं कर पाया बुधई
रैकवारन का पुरवा कियावां निवासी बुधवई सरोज के बच्चे बड़े हो गए हैं लेकिन अभी वह एक भी बेटे की शादी नहीं कर पाया है। उसकी पत्नी सुशीला देवी घर का काम देखती है। उसका बेटे रोहित (20) मोहित (17) व साहिल (12) हैं। वह इस बार भट्ठे से लौटने के बाद बड़े बेटे की शादी करने की तैयारी में था। इसके लिए उसकी पत्नी से बात भी हुई थी। बेटे की शादी करने की बात उसके मन में ही रह गई। इसकी चर्चा करते हुए उसकी पत्नी सुशीला रोने लगती।

भाई के साथ गया होता सुभाष तो बच जाती जान
कुंडा। क्षेत्र के लरू झलिहन निवासी सुभाष सरोज अपने भाई नन्हें को साथ लेकर भोला मिस्त्री के साथ गया था। अगर वह नन्हें के साथ दूसरे भट्ठे पर चला जाता तो उसकी जान बच जाती। अब यही बात परिजनों की जुबान है। उसकी पत्नी मीना बेटा आशिक व दो बेटियां नंदनी व गुंजा का रो-रोकर बुरा हाल है। घर में कमाने वाला वहीं अकेला व्यक्ति था। अब उसके नहीं होने से पत्नी व बच्चों का सहारा छिन गया है।
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