{"_id":"588f804a4f1c1b313de81335","slug":"dead-body-not-reached","type":"story","status":"publish","title_hn":"छठवें दिन भी नहीं पहुंचा शहीद का पार्थिव शरीर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
छठवें दिन भी नहीं पहुंचा शहीद का पार्थिव शरीर
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
Updated Mon, 30 Jan 2017 11:38 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कश्मीर के बांदीपारा गुरेज सेक्टर में हिमस्खलन में शहीद हुए बेल्हा के लाल विजय शुक्ला का शव छठवें दिन भी घर नहीं पहुंच सका। बर्फबारी के चलते हेलीकाप्टर शव लेकर आसमान में नहीं उड़ पा रहा है। इधर, घर पर चीखपुकार मची हुई है। पत्नी के साथ बेटी का रो-रोकर बुरा हाल हो जा रहा है। उनके साथ में रहने वाले सैनिक ने गांव पहुंचकर विजय के साथ हुए हादसे के बारे में परिजनों को जानकारी दी। अब मंगलवार को शव घर पहुंचने की संभावना जताई जा रही है।
फतनपुर थाना क्षेत्र के पांडेयतारा निवासी तीर्थराज शुक्ला की सबसे छोटी संतान विजय शुक्ला वर्ष 2002 में थल सेना में भर्ती हुए थे। जुलाई 2014 में उनकी तैनाती कश्मीर के बांदीपारा के गुरेज सेक्टर में हुई थी। 25 जनवरी को बर्फबारी के दौरान विजय शुक्ला हिमस्खलन में दब गए और साथियों के साथ शहीद हो गए। आखिरकार एवलांच की टीम 44 घंटे बाद विजय समेत दूसरे शहीद सैनिकों के शव को खोज सकी। इसकी जानकारी घर पर पहुंची तो कोहराम मचा हुआ है। पत्नी, बेटी के साथ गांव के लोग विजय के अंतिमदर्शन को बेताब हैं। बेसब्री से लोग शव का इंतजार कर रहे हैं। शहीद सैनिक विजय शुक्ला की याद में परिजनों की आंखों के आंसू सूख गए। 26 जनवरी से लगातार विलाप कर रहे माता पिता अपने लाल का चेहरा देखने के लिए तड़प रहे हैं। बेटी एसिका व पत्नी मनोरमा के साथ भाई बहन भी अंतिम दर्शन के लिए मोबाइल से सैन्य अधिकारियों से संपर्क कर रहे हैं।
विज्ञापन
फतनपुर थाना क्षेत्र के पांडेयतारा निवासी तीर्थराज शुक्ला की सबसे छोटी संतान विजय शुक्ला वर्ष 2002 में थल सेना में भर्ती हुए थे। जुलाई 2014 में उनकी तैनाती कश्मीर के बांदीपारा के गुरेज सेक्टर में हुई थी। 25 जनवरी को बर्फबारी के दौरान विजय शुक्ला हिमस्खलन में दब गए और साथियों के साथ शहीद हो गए। आखिरकार एवलांच की टीम 44 घंटे बाद विजय समेत दूसरे शहीद सैनिकों के शव को खोज सकी। इसकी जानकारी घर पर पहुंची तो कोहराम मचा हुआ है। पत्नी, बेटी के साथ गांव के लोग विजय के अंतिमदर्शन को बेताब हैं। बेसब्री से लोग शव का इंतजार कर रहे हैं। शहीद सैनिक विजय शुक्ला की याद में परिजनों की आंखों के आंसू सूख गए। 26 जनवरी से लगातार विलाप कर रहे माता पिता अपने लाल का चेहरा देखने के लिए तड़प रहे हैं। बेटी एसिका व पत्नी मनोरमा के साथ भाई बहन भी अंतिम दर्शन के लिए मोबाइल से सैन्य अधिकारियों से संपर्क कर रहे हैं।
विज्ञापन