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वाराणसी भगदड़ में महिला की मौत
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़।
Updated Sun, 16 Oct 2016 11:42 PM IST
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बाबा जय गुरुदेव की शोभायात्रा में शामिल होने के लिए जनपद से भी हजारों भक्त शुक्रवार को गए थे। राजघाट पुल पर मची भगदड़ में मानधाता के शोभीपुर की महिला की मौत हो गई। जबकि तरौल की महिला जीवन और मौत से संघर्ष कर रही है। परिजनों की कुशलता के लिए अपने परेशान रहे।
वाराणसी के रामनगर के डोमरी गांव में बाबा जय गुरुदेव धर्म प्रचारक संस्था की ओर से दो दिवसीय आध्यात्मिक समागम का आयोजन किया गया था। शनिवार की सुबह शोभायात्रा निकाली गई। राजघाट पुल पर मची भगदड़ में मानधाता थाना क्षेत्र के शोभीपुर की कमलेश उर्फ गुलाली देवी (58) पत्नी पन्नालाल व तरौल की रहने वाली राजकुमारी (60) भी फंस गईं। भगदड़ के चलते दोनों लोग पैरों तले कुचली गईं। दोनों को अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां डाक्टरों ने गुलाली देवी को मृत घोषित कर दिया। जबकि राजकुमारी का अस्पताल में जीवन और मौत के बीच संघर्ष कर रही है।
खबर मिलते ही घर में कोहराम मच गया। आनन-फानन में परिजन वाराणसी के लिए रवाना हुए। जिन लोगों के परिजन बाबा जय गुरुदेव के समागम में शामिल होने गए थे। उनके परिवार के लोग कुशलता जानने के लिए खासे परेशान रहे। समागम में शामिल होने गए लोग भी परिजनों को अपनी कुशलता बताने के लिए परेशान रहे। जिनकी बात परिजनों से नहीं हो सकी। उनकी तलाश करने के लिए परिवार के लोग वाराणसी के लिए रवाना हो गए। मृतका के चार बेटी व दो बेटे हैं। दो बेटियों की शादी हो चुकी है।
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बेल्हा में जय गुरुदेव के चालीस हजार अनुयायी
प्रतापगढ़(ब्यूरो)। जिले में बाबा जय गुरुदेव के लगभग चालीस हजार से अधिक अनुयायी हैं। चिलबिला स्थित मुख्य आश्रम में स्थापना दिवस पर उमड़ने वाली भीड़ को संभालने के लिए पुलिस कर्मियों को पसीना बहाना पड़ता है। वाराणसी में शाकाहार, सदाचार और शराब बंदी के प्रचार के दौरान राजघाट पुल पर हुए हादसे के बाद बेल्हा में बाबा के अनुयायियों ने गहरी शोक संवेदना व्यक्त की है। चिलबिला क्रासिंग पर स्थित बाबा के आश्रम में वैसे तो बराबर भक्तों का आना-जाना लगा रहता है। मगर स्थापना दिवस पर जुटने वाली भीड़ पुलिस प्रशासन के लिए चुनौती बन जाती है। मुख्यालय का प्रमुख आश्रम होने के कारण वर्ष में एक बार स्थापना दिवस पर बड़ी संख्या में भक्त उपस्थित होते हैं। जिला प्रभारी सूर्यबली सिंह के नेतृत्व में होेने वाले इस कार्यक्रम में जिले से लगभग चालीस हजार भक्त एकत्रित होते हैं। ग्रामीण इलाकों में बाबा के छोटे-मोटे कई आश्रम हैं, मगर मुख्यालय स्तर पर एक ही आश्रम है, हालांकि बाबाजी के भव्य आश्रम के निर्माण के लिए गोडे़ में नया प्लाट खरीदा गया है।
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वाराणसी के रामनगर के डोमरी गांव में बाबा जय गुरुदेव धर्म प्रचारक संस्था की ओर से दो दिवसीय आध्यात्मिक समागम का आयोजन किया गया था। शनिवार की सुबह शोभायात्रा निकाली गई। राजघाट पुल पर मची भगदड़ में मानधाता थाना क्षेत्र के शोभीपुर की कमलेश उर्फ गुलाली देवी (58) पत्नी पन्नालाल व तरौल की रहने वाली राजकुमारी (60) भी फंस गईं। भगदड़ के चलते दोनों लोग पैरों तले कुचली गईं। दोनों को अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां डाक्टरों ने गुलाली देवी को मृत घोषित कर दिया। जबकि राजकुमारी का अस्पताल में जीवन और मौत के बीच संघर्ष कर रही है।
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खबर मिलते ही घर में कोहराम मच गया। आनन-फानन में परिजन वाराणसी के लिए रवाना हुए। जिन लोगों के परिजन बाबा जय गुरुदेव के समागम में शामिल होने गए थे। उनके परिवार के लोग कुशलता जानने के लिए खासे परेशान रहे। समागम में शामिल होने गए लोग भी परिजनों को अपनी कुशलता बताने के लिए परेशान रहे। जिनकी बात परिजनों से नहीं हो सकी। उनकी तलाश करने के लिए परिवार के लोग वाराणसी के लिए रवाना हो गए। मृतका के चार बेटी व दो बेटे हैं। दो बेटियों की शादी हो चुकी है।
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बेल्हा में जय गुरुदेव के चालीस हजार अनुयायी
प्रतापगढ़(ब्यूरो)। जिले में बाबा जय गुरुदेव के लगभग चालीस हजार से अधिक अनुयायी हैं। चिलबिला स्थित मुख्य आश्रम में स्थापना दिवस पर उमड़ने वाली भीड़ को संभालने के लिए पुलिस कर्मियों को पसीना बहाना पड़ता है। वाराणसी में शाकाहार, सदाचार और शराब बंदी के प्रचार के दौरान राजघाट पुल पर हुए हादसे के बाद बेल्हा में बाबा के अनुयायियों ने गहरी शोक संवेदना व्यक्त की है। चिलबिला क्रासिंग पर स्थित बाबा के आश्रम में वैसे तो बराबर भक्तों का आना-जाना लगा रहता है। मगर स्थापना दिवस पर जुटने वाली भीड़ पुलिस प्रशासन के लिए चुनौती बन जाती है। मुख्यालय का प्रमुख आश्रम होने के कारण वर्ष में एक बार स्थापना दिवस पर बड़ी संख्या में भक्त उपस्थित होते हैं। जिला प्रभारी सूर्यबली सिंह के नेतृत्व में होेने वाले इस कार्यक्रम में जिले से लगभग चालीस हजार भक्त एकत्रित होते हैं। ग्रामीण इलाकों में बाबा के छोटे-मोटे कई आश्रम हैं, मगर मुख्यालय स्तर पर एक ही आश्रम है, हालांकि बाबाजी के भव्य आश्रम के निर्माण के लिए गोडे़ में नया प्लाट खरीदा गया है।