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बिजली जैसी कड़कड़ाहट, लगा फट गया आसमान
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़।
Updated Sun, 20 Nov 2016 11:42 PM IST
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‘भोर में करीब साढ़े तीन से चार बजे के बीच का समय था। ट्रेन अपनी रफ्तार में थी। एस-6 कोच के सभी यात्री बेफ्रिक सो रहे थे। अचानक बिजली जैसी कड़कड़ाहट हुई और लगा कि आसमान फट गया हो। कई यात्री एक-दूसरे पर गिर पड़े। किसी को कुछ समझ में नहीं आया। अचानक चीखपुकार और चीत्कार गूंजने लगी। चारों तरफ लोग बचाने की गुहार लगा रहे थे, लेकिन कोई उनकी मदद नहीं कर रहा था। किसी तरह हिम्मत बांधकर गेट खोलकर देखा तो दिल-दिमाग सन्न रह गया। ट्रेन की कई बोगियां पलट गई थीं। उनकी भी बोगी पटरी से उतरी थी। भगवान का शुक्र था कि पलटी नहीं। चारों तरफ लाशें और रोते-तड़पते घायल दिखाई दे रहे थे। दिल-दिमाग सुन्न हो गया। पत्नी और बच्चों की याद आते ही अचानक बेहोशी टूटी। सभी बोगी में ही इधर-उधर गिर पड़े थे, लेकिन किसी को चोटें नहीं आई थीं।’
रविवार भोर में कानपुर के पास दुर्घटनाग्रस्त हुई इंदौर-पटना एक्सप्रेस से यात्रा कर रहे राकेश श्रीवास्तव घटना के बारे में बताते हुए कांप रहे थे। कहा, ईश्वर की कृपा थी कि चारों लोग सही सलामत बच गए।
कंधई के बिबियाकरनपुर गांव के रहने वाले राकेश श्रीवास्तव पत्नी ज्योत्सना श्रीवास्तव पुत्र हिमांशु और बेटी तृषा के साथ एक सप्ताह पहले भाई की लड़की की शादी में शामिल होने के इंदौर गए थे। शादी में शिरकत करने के बाद वे इंदौर-पटना एक्सप्रेस से परिवार के साथ घर लौट रहे थे। कोच एस-6 में सुल्तानपुर तक उनका आरक्षण था। सब लोग नींद में थे। अचानक भोर में साढ़े तीन से चार के बीच तेज आवाज के साथ झटका लगा। लोग सीटों से नीचे गिर पड़े। लगा आकाश से बिजली ट्रेन पर गिर पड़ी हो। शोर मच गया कि ट्रेन पलट गई है। सभी जान बचाकर भागना शुरू कर दिए। कोच से बाहर निकले तो वहां का मंजर देखकर सहम गए। कई बोगियां क्षतिग्रस्त हो चुकी थीं। लोग सिर्फ चिल्ला रहे थे। खूनी मंजर देखकर कलेजा मुंह को आ गया। कई कोच टेढ़े हो गए थे। चक्के आसमान की तरफ थे। कई कोच जमीन में तिरछे पड़े थे। कई के परखचे उड़ गए थे। उसमें फंसे लोग चिल्ला-चिल्ला मदद की गुहार लगा रहे थे। कई मर चुके थे। उनकी लाशें कोचों के बीच फंसी हुई थी। हर तरफ चीख और चिल्लाने की आवाजें आ रही थीं। वे भागकर अपने कोच में गाए और परिवार को लेकर नीचे उतरे।
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ट्रेन हादसे में इलाहाबाद की बुजर्ग महिला की मौत
कानपुर में हुए ट्रेन हादसे में सरायइनायत के अलमापुर गांव की बुजुर्ग शकुंतला देवी (68) की जान चली गई। उनके पति भी गंभीर घायल हुए जबकि बेटी-दामाद जख्मी हैं। वे गुजरात में तीर्थयात्रा के बाद लौट रहे थे। अस्पताल से यहां घर में फोन आया तो परिवार में कोहराम मच गया। बेटे-बेटियों समेत रिश्तेदार रोने-बिलखने लगे। बेटे समेत कुछ रिश्तेदार कानपुर रवाना हो गए। उनके गांव में भी शोक छाया है।
अलमापुर गांव निवासी किसान श्यामदत्त पांडेय के दो बेटे हैं संतोष और कमलेश। चार बेटियां हैं। बड़ी बेटी देवसुता का ब्याह सोरांव में रैया गांव निवासी रेलवे अफसर शिवानंद दुबे से किया गया था। शिवानंद की तैनाती वाराणसी स्थित डीजल रेल कारखाना (डीरेका) में है। 11 नवंबर को श्यामदत्त पत्नी शकुंतला के साथ वाराणसी में बेटी-दामाद के पास गए। वहां से वे सभी गुजरात में तीर्थयात्रा पर निकल गए थे। शनिवार शाम वे इंदौर-पटना एक्सप्रेस से वाराणसी लौट रहे थे। मगर ट्रेन कानपुर में दुर्घटनाग्रस्त हो गई। सुबह श्यामदत्त के बेटे कमलेश को कानपुर के अस्पताल से फोन आया। उसे बताया गया कि ट्रेन हादसे में उसकी मां शकुंतला देवी की मौत हो गई है।
पिता श्यामदत्त गंभीर रूप से घायल हैं। जबकि उनके बेटी-दामाद को हल्की चोट पहुंची है। इस खबर से घर में सभी स्तब्ध रह गए। पूरे गांव में हल्ला मच गया। सभी गमगीन हो गए। मां की मौत और पिता श्यामदत्त के घायल होने की जानकारी मिलते ही बाकी तीन बेटियां सरस्वती, माया, विद्योत्तमा भी रोते-बिलखते मायके आ गईं। बेटे-बेटियों को माता-पिता के तीर्थयात्रा से लौटने का इंतजार था मगर आई मनहूस खबर। एक पुत्र कमलेश कुछ रिश्तेदारों संगकानपुर के लिए रवाना हो गया। शाम को अमर उजाला टीम मृत महिला के घर पहुंची तो सभी शोक में डूूबे थे। परिजनों ने बताया कि रिश्तेदार
आधी रात तक कानपुर से शवलेकर आएंगे।
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रविवार भोर में कानपुर के पास दुर्घटनाग्रस्त हुई इंदौर-पटना एक्सप्रेस से यात्रा कर रहे राकेश श्रीवास्तव घटना के बारे में बताते हुए कांप रहे थे। कहा, ईश्वर की कृपा थी कि चारों लोग सही सलामत बच गए।
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कंधई के बिबियाकरनपुर गांव के रहने वाले राकेश श्रीवास्तव पत्नी ज्योत्सना श्रीवास्तव पुत्र हिमांशु और बेटी तृषा के साथ एक सप्ताह पहले भाई की लड़की की शादी में शामिल होने के इंदौर गए थे। शादी में शिरकत करने के बाद वे इंदौर-पटना एक्सप्रेस से परिवार के साथ घर लौट रहे थे। कोच एस-6 में सुल्तानपुर तक उनका आरक्षण था। सब लोग नींद में थे। अचानक भोर में साढ़े तीन से चार के बीच तेज आवाज के साथ झटका लगा। लोग सीटों से नीचे गिर पड़े। लगा आकाश से बिजली ट्रेन पर गिर पड़ी हो। शोर मच गया कि ट्रेन पलट गई है। सभी जान बचाकर भागना शुरू कर दिए। कोच से बाहर निकले तो वहां का मंजर देखकर सहम गए। कई बोगियां क्षतिग्रस्त हो चुकी थीं। लोग सिर्फ चिल्ला रहे थे। खूनी मंजर देखकर कलेजा मुंह को आ गया। कई कोच टेढ़े हो गए थे। चक्के आसमान की तरफ थे। कई कोच जमीन में तिरछे पड़े थे। कई के परखचे उड़ गए थे। उसमें फंसे लोग चिल्ला-चिल्ला मदद की गुहार लगा रहे थे। कई मर चुके थे। उनकी लाशें कोचों के बीच फंसी हुई थी। हर तरफ चीख और चिल्लाने की आवाजें आ रही थीं। वे भागकर अपने कोच में गाए और परिवार को लेकर नीचे उतरे।
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ट्रेन हादसे में इलाहाबाद की बुजर्ग महिला की मौत
कानपुर में हुए ट्रेन हादसे में सरायइनायत के अलमापुर गांव की बुजुर्ग शकुंतला देवी (68) की जान चली गई। उनके पति भी गंभीर घायल हुए जबकि बेटी-दामाद जख्मी हैं। वे गुजरात में तीर्थयात्रा के बाद लौट रहे थे। अस्पताल से यहां घर में फोन आया तो परिवार में कोहराम मच गया। बेटे-बेटियों समेत रिश्तेदार रोने-बिलखने लगे। बेटे समेत कुछ रिश्तेदार कानपुर रवाना हो गए। उनके गांव में भी शोक छाया है।
अलमापुर गांव निवासी किसान श्यामदत्त पांडेय के दो बेटे हैं संतोष और कमलेश। चार बेटियां हैं। बड़ी बेटी देवसुता का ब्याह सोरांव में रैया गांव निवासी रेलवे अफसर शिवानंद दुबे से किया गया था। शिवानंद की तैनाती वाराणसी स्थित डीजल रेल कारखाना (डीरेका) में है। 11 नवंबर को श्यामदत्त पत्नी शकुंतला के साथ वाराणसी में बेटी-दामाद के पास गए। वहां से वे सभी गुजरात में तीर्थयात्रा पर निकल गए थे। शनिवार शाम वे इंदौर-पटना एक्सप्रेस से वाराणसी लौट रहे थे। मगर ट्रेन कानपुर में दुर्घटनाग्रस्त हो गई। सुबह श्यामदत्त के बेटे कमलेश को कानपुर के अस्पताल से फोन आया। उसे बताया गया कि ट्रेन हादसे में उसकी मां शकुंतला देवी की मौत हो गई है।
पिता श्यामदत्त गंभीर रूप से घायल हैं। जबकि उनके बेटी-दामाद को हल्की चोट पहुंची है। इस खबर से घर में सभी स्तब्ध रह गए। पूरे गांव में हल्ला मच गया। सभी गमगीन हो गए। मां की मौत और पिता श्यामदत्त के घायल होने की जानकारी मिलते ही बाकी तीन बेटियां सरस्वती, माया, विद्योत्तमा भी रोते-बिलखते मायके आ गईं। बेटे-बेटियों को माता-पिता के तीर्थयात्रा से लौटने का इंतजार था मगर आई मनहूस खबर। एक पुत्र कमलेश कुछ रिश्तेदारों संगकानपुर के लिए रवाना हो गया। शाम को अमर उजाला टीम मृत महिला के घर पहुंची तो सभी शोक में डूूबे थे। परिजनों ने बताया कि रिश्तेदार
आधी रात तक कानपुर से शवलेकर आएंगे।