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गले नहीं उतर रही चार मौतों की कहानी
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
Updated Sat, 07 Mar 2015 10:37 PM IST
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कांशीराम कॉलोनी जोगापुर के ब्लाक संख्या 36 में मन्नीलाल समेत तीन मासूमों के जलकर मरने की पुलिसिया कहानी लोगों के गले नहीं उतर रही है। कॉलोनी में रहने वाले लोग हत्या की आशंका जता रहे हैं। चर्चा यह भी है कि मृतक अपनी बेटी से नाराज भी चल रहा था।
मन्नीलाल भले ही 15 दिन पहले कॉलोनी में आकर रहने लगा था लेकिन उसके स्वभाव से कॉलोनी में रहने वाले लोग परिचित हो गए थे। वह हमेशा अपने काम से ही मतलब रखता। मन्नीलाल, इतबारी, सोनू और मोनू की मौत मच्छर की क्वाइल से लगी आग से होना कालोनी के लोगों के गले नहीं उतर रहा है। लोगों का कहना है कि जिस तरह आग की चपेट में आकर लोग जलकर मरे हैं। ऐसा संभव नहीं हो सकता। कॉलोनी के रहने मनीष पाल समेत अन्य लोगों ने बताया कि ऐसा लगता है कि उन सभी को नशीला पदार्थ खिला दिया गया हो। बाद में घटना को दूसरा रूप देने के लिए खिड़की या दरवाजे से आग लगा दी गई हो।
बेटी सहरुल से इन दिनों मृतक मन्नीलाल नाराज भी चल रहा था। तभी तो शुक्रवार की रात अपने प्रेमी रामसिंह के साथ पहुंचीं सहरुल को उसने फटकार लगाते हुए कमरे में घुसने तक नहीं दिया जबकि वह काफी देर तक पिता को मनाने के लिए भी परेशान रही। पुलिस का दावा है कि क्वाइल से आग लगने के कारण हादसा हुआ है। यदि आग पहले किसी को आगोश में लेती तो दूसरे जाग जाते और शोर मचाते लेकिन ऐसा नहीं हो सका। शवों को देखने से ऐसा प्रतीत होता है कि जो जहां था वहीं जलकर मरा पड़ा था। वह अपने स्थान से हिल तक नहीं सका।
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भिक्षाटन कर अपनी बेटी सहरुल की परवरिश करने के बाद मन्नीलाल ने उसकी शादी सुल्तानपुर निवासी बुद्धू के साथ की थी। ढाई वर्ष पहले बुद्धू की मौत हो गई। इसके बाद वह अजीतनगर निवासी रामसिंह के साथ रहने लगी। पिता मन्नीलाल के पास रोशनी समेत पांच बच्चों को छोड़ दिया था। रामसिंह ने ही अपनी परिचित नसीमा से कह सुनकर सभी को जोगापुर कॉलोनी में रहने के लिए कमरे का इंतजाम कराया था।
कॉलोनी में रहने वाले मन्नीलाल और उसकी बेटी सहरुल से शुक्रवार की शाम किसी बात को लेकर तकरार भी हुई थी। कॉलोनी के लोगों की मानें तो रोशनी को लेकर कमरे पर पहुंची बेटी सहरुल को मन्नीलाल ने फटकारा था और नातिन को भी घुसने से मना कर दिया था। चर्चा यह थी कि मन्नीलाल के मना करने के बाद भी रोशनी होली के दिन रामसिंह के घर चली गई थी और शाम तक उसका पता नहीं था। इससे वह गुस्से में था। इस बाबत रामसिंह का कहना है कि दिन में होली के नाते मन्नीलाल बच्चों के साथ उसके घर आया था। बाद में सभी चले गए और रोशनी को छोड़ने वह गए लेकिन मन्नीलाल ने अज्ञात कारणों से उसे कमरे में नहीं घुसने दिया।
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मन्नीलाल भले ही 15 दिन पहले कॉलोनी में आकर रहने लगा था लेकिन उसके स्वभाव से कॉलोनी में रहने वाले लोग परिचित हो गए थे। वह हमेशा अपने काम से ही मतलब रखता। मन्नीलाल, इतबारी, सोनू और मोनू की मौत मच्छर की क्वाइल से लगी आग से होना कालोनी के लोगों के गले नहीं उतर रहा है। लोगों का कहना है कि जिस तरह आग की चपेट में आकर लोग जलकर मरे हैं। ऐसा संभव नहीं हो सकता। कॉलोनी के रहने मनीष पाल समेत अन्य लोगों ने बताया कि ऐसा लगता है कि उन सभी को नशीला पदार्थ खिला दिया गया हो। बाद में घटना को दूसरा रूप देने के लिए खिड़की या दरवाजे से आग लगा दी गई हो।
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बेटी सहरुल से इन दिनों मृतक मन्नीलाल नाराज भी चल रहा था। तभी तो शुक्रवार की रात अपने प्रेमी रामसिंह के साथ पहुंचीं सहरुल को उसने फटकार लगाते हुए कमरे में घुसने तक नहीं दिया जबकि वह काफी देर तक पिता को मनाने के लिए भी परेशान रही। पुलिस का दावा है कि क्वाइल से आग लगने के कारण हादसा हुआ है। यदि आग पहले किसी को आगोश में लेती तो दूसरे जाग जाते और शोर मचाते लेकिन ऐसा नहीं हो सका। शवों को देखने से ऐसा प्रतीत होता है कि जो जहां था वहीं जलकर मरा पड़ा था। वह अपने स्थान से हिल तक नहीं सका।
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भिक्षाटन कर अपनी बेटी सहरुल की परवरिश करने के बाद मन्नीलाल ने उसकी शादी सुल्तानपुर निवासी बुद्धू के साथ की थी। ढाई वर्ष पहले बुद्धू की मौत हो गई। इसके बाद वह अजीतनगर निवासी रामसिंह के साथ रहने लगी। पिता मन्नीलाल के पास रोशनी समेत पांच बच्चों को छोड़ दिया था। रामसिंह ने ही अपनी परिचित नसीमा से कह सुनकर सभी को जोगापुर कॉलोनी में रहने के लिए कमरे का इंतजाम कराया था।
कॉलोनी में रहने वाले मन्नीलाल और उसकी बेटी सहरुल से शुक्रवार की शाम किसी बात को लेकर तकरार भी हुई थी। कॉलोनी के लोगों की मानें तो रोशनी को लेकर कमरे पर पहुंची बेटी सहरुल को मन्नीलाल ने फटकारा था और नातिन को भी घुसने से मना कर दिया था। चर्चा यह थी कि मन्नीलाल के मना करने के बाद भी रोशनी होली के दिन रामसिंह के घर चली गई थी और शाम तक उसका पता नहीं था। इससे वह गुस्से में था। इस बाबत रामसिंह का कहना है कि दिन में होली के नाते मन्नीलाल बच्चों के साथ उसके घर आया था। बाद में सभी चले गए और रोशनी को छोड़ने वह गए लेकिन मन्नीलाल ने अज्ञात कारणों से उसे कमरे में नहीं घुसने दिया।