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बंदियों के लिए सुरक्षित नहीं है जिला जेल

Mon, 09 Jul 2018 11:39 PM IST
प्रतापगढ़ ब्यूरो
प्रतापगढ़ ब्यूरो Updated Mon, 09 Jul 2018 11:39 PM IST
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no safe jail for prisoner
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बेल्हा की जेल भी बंदियों के लिए महफूज नहीं है। यहां भी जेल मैनुअल के विपरीत प्रतिबंधित सामग्री औचक निरीक्षण में मिलती रही हैं। जेल में निरुद्ध आठ हार्डकोर अपराधियों के बावजूद सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं हैं। जेल प्रशासन की सेटिंग से बंदियों के पास प्रतिबंधित सामग्री पहुंच जाती है। यहां तक कि आम लोगों के लिए जेल मैनुअल का हवाला देने वाला जेल प्रशासन प्रभावशाली बंदियों के आगे घुटने टेकता रहता है। औचक निरीक्षण में जेल के भीतर शराब की बोतलें, मोबाइल व खाने पीने की सामग्री मिल चुकी हैं।

जिला कारागार में 458 बंदियों को निरुद्ध करने के लिए कुल 12 बैरकें हैं। अस्पताल, महिला व बच्चा बैरक अलग हैं। मौजूदा समय में हर बैरकों में 50 से लेकर 70 बंदी रखे गए हैं। इन बैरकों में हार्डकोर के शातिर बंदी निरुद्ध हैं। पूर्व में जिला प्रशासन के औचक निरीक्षण में बैरकों की छतों व नालियों में अंग्रेजी, देशी और बीयर की खाली व भरी बोतलें अफसरों ने निरीक्षण के दौरान बरामद की हैं। इतना ही नहीं मोबाइल और प्रतिबंधित खाद्य सामग्री भी मिली हैं।
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मामले में तत्कालीन जिलाधिकारी अमृत त्रिपाठी ने जेल प्रशासन के खिलाफ कार्रवाई के लिए शासन को पत्र भेजा था। जेल अधीक्षक ने अज्ञात बंदियों के खिलाफ नगर कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया था। पूर्व जेल अधीक्षक राम कुमार त्रिपाठी के समय में भी करीब आधा दर्जन से अधिक मोबाइल मिले। बंदियों की सेवा करने वाले कई बंदी रक्षकों पर नगर कोतवाली में मुकदमा भी दर्ज हुआ। इन सबके बावजूद मौजूदा समय में जेल मैनुअल का पालन नहीं हो रहा है। सूत्रों की माने तो जेल के भीतर निरुद्ध बंदियों के बीच वर्चस्व को लेकर आए दिन मारपीट होती रहती है। कुछ दिनों पहले जेल में निरुद्ध शहजाद को दूसरे बंदियों ने जमकर पीटा था। इससे उसका हाथ फ्रैक्चर तक हो गया था। घटना को पचाने में जेल प्रशासन ने पूरी ताकत झोंक दी थी। सीओ कुंडा जियाउल हक के हत्यारोपी समेत प्रशासनिक आधार पर गैर जिलों से आए आठ हार्डकोर के अपराधी जेल में बंद हैं। शातिर अपराधियों के बीच वर्चस्व को लेकर तकरार होती रहती है।
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बागपत जेल में हुई वारदात के बाद हाईअलर्ट जारी कर दिया गया है। सुबह से ही बैरकों की जांच कराई जा रही है। हार्डकोर बंदियों के ऊपर बराबर नजर रखने का प्रयास किया जा रहा है। औचक छापेमारी का भी प्लान तैयार है। ताकि अप्रिय वारदात न हो सके। तलाशी के दौरान प्रतिबंधित सामग्री अब नहीं मिल रही। अब मुलाकात करने के लिए आने वाले लोगों की तलाशी चौकी के पुलिसकर्मी नहीं लेते। पीएसी भी हटा ली गई है। इसलिए पुलिस अधीक्षक को अतिरिक्त पत्र भेजा गया है।  
एके सिंह, जेलर।
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