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एआरटीओ आफिस में हुए लूट में घिरते जा रहे कर्मचारी
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
Updated Mon, 04 Apr 2016 10:54 PM IST
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पकड़े गए आरोपी ट्रांसपोर्ट का काम करते हैं।
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एआरटीओ कार्यालय में हुई 22 लाख की लूट की घटना अभी भी पुलिस के लिए पहेली बनी हुई है। पुलिस की शक की सूई अब एआरटीओ के कर्मचारियों के साथ दलालों पर घूम रही है। घटना के दिन कर्मचारियाें व दलालों के बीच मोबाइल पर हुई बात की पुलिस तहकीकात कर रही है। एआरटीओ कार्यालय में गुरुवार को दो नकाबपोश बदमाशों ने अंधाधुंध फायरिंग करते हुए स्वीपर रज्जन प्रसाद को गोली मारकर 22 लाख रुपये लूट लिए थे। घटना के बाद से कोतवाली पुलिस आरोपियों की धरपकड़ के लिए हाथ पैर मार रही है। लेकिन अभी तक किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंची है। पुलिस एआरटीओ कर्मचारियों व उनके साथ काम करने वाले सात-सात दलालों के मोबाइल रिकार्ड खंगाल रही है।
शहर कोतवाल हरिपाल सिंह यादव का मानना है कि कहीं न कहीं कैश के पास बैठने वाले कर्मचारी या फिर उनके दलालों ने फोन करके बदमाशाें को बुलाया होगा। घटना की जानकारी होने के बाद भी वे पुलिस को बताने से भाग रहे हैं। ऐसे में कर्मचारियों के साथ बैठने वाले सात-सात दलालों के मोबाइल का रिकार्ड और उनसे बात करने वाले लोगों का रिकार्ड खंगाला जा रहा है। उन्होंने बताया कि एआरटीओ कार्यालय में सात पटल बने हैं। सात लिपिक की तैनाती है। सातों लोग सात-सात दलाल अपने सहयोगी के रूप में रखे हैं। जिनकों अपने वेतन से प्रति दिन के तीन सौ रुपये एक दलाल को देने की बात कही है। इसमें सबसे बड़ी बात यह है कि एक लिपिक का वेतन लगभग तीस से 40 हजार रुपये हैं, मगर वे प्रतिमाह अच्छी खासी रकम दलालों पर खर्च कर देते हैं। ऐसे में अब पुलिस उनके खर्च का ब्यौरा भी जुटाने में लग गई है।
जेल से बाहर घूम रहे लुटेरों की कुंडली तैयार कर रही पुलिस
लूट व हत्या के मामले में जेल से छूटकर घर आए लोगों की सूची पुलिस तैयार कर रही है। एक-एक लोगों से मिलकर उनके मोबाइल की कॉल डिटेल निकलवा कर एआरटीओ लूटकांड को ट्रैस करने का प्रयास किया जा रहा है। घर छोड़कर फरार लोगों के परिजनों से उनका मोबाइल नंबर लेकर पुलिस संपर्क साधेगी। इसके बाद अपराधियों के मोबाइल व एआरटीओ कार्यालय के दलालों का नम्बर ट्रैस किया जाएगा। शहर कोतवाल हरिपाल ने बताया कि दलालों का भी अपराधियों से संपर्क हो सकता है। वह फोन करके उन्हें बुलाकर घटना करा सकते हैं। मोबाइल काल डिटेल के बाद घटना के खुलासे में काफी आसानी होगी।
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शहर कोतवाल हरिपाल सिंह यादव का मानना है कि कहीं न कहीं कैश के पास बैठने वाले कर्मचारी या फिर उनके दलालों ने फोन करके बदमाशाें को बुलाया होगा। घटना की जानकारी होने के बाद भी वे पुलिस को बताने से भाग रहे हैं। ऐसे में कर्मचारियों के साथ बैठने वाले सात-सात दलालों के मोबाइल का रिकार्ड और उनसे बात करने वाले लोगों का रिकार्ड खंगाला जा रहा है। उन्होंने बताया कि एआरटीओ कार्यालय में सात पटल बने हैं। सात लिपिक की तैनाती है। सातों लोग सात-सात दलाल अपने सहयोगी के रूप में रखे हैं। जिनकों अपने वेतन से प्रति दिन के तीन सौ रुपये एक दलाल को देने की बात कही है। इसमें सबसे बड़ी बात यह है कि एक लिपिक का वेतन लगभग तीस से 40 हजार रुपये हैं, मगर वे प्रतिमाह अच्छी खासी रकम दलालों पर खर्च कर देते हैं। ऐसे में अब पुलिस उनके खर्च का ब्यौरा भी जुटाने में लग गई है।
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जेल से बाहर घूम रहे लुटेरों की कुंडली तैयार कर रही पुलिस
लूट व हत्या के मामले में जेल से छूटकर घर आए लोगों की सूची पुलिस तैयार कर रही है। एक-एक लोगों से मिलकर उनके मोबाइल की कॉल डिटेल निकलवा कर एआरटीओ लूटकांड को ट्रैस करने का प्रयास किया जा रहा है। घर छोड़कर फरार लोगों के परिजनों से उनका मोबाइल नंबर लेकर पुलिस संपर्क साधेगी। इसके बाद अपराधियों के मोबाइल व एआरटीओ कार्यालय के दलालों का नम्बर ट्रैस किया जाएगा। शहर कोतवाल हरिपाल ने बताया कि दलालों का भी अपराधियों से संपर्क हो सकता है। वह फोन करके उन्हें बुलाकर घटना करा सकते हैं। मोबाइल काल डिटेल के बाद घटना के खुलासे में काफी आसानी होगी।
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