फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Pratapgarh News ›   hot to consume morabba

हाय रब्बा, कहां खपेगा इतना मुरब्बा

Thu, 17 Nov 2016 11:56 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़।
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़। Updated Thu, 17 Nov 2016 11:56 PM IST
विज्ञापन
hot to consume morabba
न्‍यूूज
नोटबंदी की मार से आंवला इंटस्ट्री भी चरमरा गई है। हजार और पांच सौ के नोट बंद होने के बाद बेल्हा में आंवला से बने उत्पादों की बिक्री में 60 प्रतिशत तक गिरावट आई है। बड़ी फैक्ट्रियों में ऑनलाइन और चेक से भुगतान होने के कारण थोड़ी राहत है, लेकिन छोटी इकाईयों में तैयार माल फंस गया है। रिटेल में बिक्री नहीं हो रही है और रुपये के अभाव में संचालक माल बाहर नहीं भेज पा रहे हैं। आंवला प्रोडक्ट के लिए आर्डर तो देशभर से आए हैं, लेकिन रकम का इंतजाम न होने के चलते फैक्ट्री मालिक माल नहीं भेज रहे हैं।
विज्ञापन


शहर के साथ ही आसपास के इलाके में 50 से अधिक छोटी-बड़ी इकाईयों में आंवला प्रोडक्ट तैयार किए जाते हैं। आंवले से मुरब्बा, कैंडी, अचार, चटपटा, जूस, लड्डू, बर्फी आदि बनाकर आसपास के जिलों के साथ ही दिल्ली, मुंबई, बंगलोर और दक्षिण भारत में भेजा जाता है। जिले के दुकानदार भी इन्हीं फैक्ट्रियों से माल उठाते हैं। नोटबंदी के बाद से आंवला का व्यापार बुरी तरह से प्रभावित हो गया है। छोटे दुकानदार रुपये के अभाव में प्रोडक्ट लेने नहीं जा रहे हैं। उनका तर्क है कि आंवला उत्पाद रोजमर्रा की चीज नहीं हैं। नकदी की समस्या के चलते ग्राहक सिर्फ जरूरी चीजें खरीद रहे हैं। ऐसे में उन्हें इतने रुपये नहीं मिल रहे कि माल का उठान कर सकें। हालांकि बड़ी फैक्ट्रियों में हालात थोड़े से जुदा है। बड़ा नेटवर्क होने के कारण बाहर के कस्टमर और थोक व्यापारी इनका भुगतान ऑनलाइन और चेक से कर दे रहे हैं। बावजूद इसके 30 से 40 प्रतिशत तक इनका भी कारोबार प्रभावित हुआ है। आंवला उत्पादों के बड़े कारोबारियों की मानें तो जिले में एक दिन में 20 लाख का कारोबार होता था जो अब सिमटकर सात से आठ लाख पर आ गया है। पचास टन से अधिक तैयार माल फंसा है। बाहर से आर्डर भी मिले हैं, लेकिन नगदी के चक्कर में डिलवरी नहीं हो पा रही है।
विज्ञापन


पुष्पांजलि ग्रामोद्योग के सेल्स प्रभारी पारितोष शुक्ला ने बताया कि 50 से 60 प्रतिशत तक बिक्री घटी है। बड़े  शहरों के व्यापारी तो ऑनलाइन भुगतान कर दे रहे हैं, लेकिन इलाहाबाद, जौनपुर, सुल्तानपुर, बनारस समेत आसपास के जिलों के व्यापारी आर्डर तो कर दिए हैं, लेकिन पैसा नहीं भेज पा रहे हैं। कुछ लोगों ने किसी तरह 10 प्रतिशत भुगतान किया है। इंडिका फूड प्रोडक्ट के मालिक आलोक खंडेलवाल ने बताया कि रिटेल का आर्डर कम हो गया है। 20 प्रतिशत तक व्यापार प्रभावित हुआ है। माया इंडस्ट्रीज के मालिक पवन अग्रवाल ने बताया कि बाहर के व्यापारियों ने संभाल रखा है। उनका पेमेंट सीधे खाते में आ रहा है। बीस प्रतिशत तक व्यापार प्रभावित हुआ है।
विज्ञापन
विज्ञापन


 
विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें हर राज्य और शहर से जुड़ी क्राइम समाचार की
ब्रेकिंग अपडेट।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed