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जेल में चल रही बंदियों की ‘सरकार’

Sun, 07 Jun 2015 11:31 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़ Updated Sun, 07 Jun 2015 11:31 PM IST
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crime in pratapgarh
जेल में निरुद्ध बंदियों पर जेलर के ‘टेरर‘ का प्रभाव रहता है। इससे बेलगाम बंदी भी जेलर के खौफ से कांपते रहते हैं। लेकिन बेल्हा की जेल में जेलर के ‘टेरर‘ पर बंदियों का ‘टेरर‘ भारी पड़ रहा है। जेल में निरुद्ध अपराधियों की राजनैतिक पहुंच व दबंगई के चलते जेलर की हनक गायब है। इन्हीं वजहों से जेल बंदियों के लिए किसी फाइव स्टार होटल से कम नहीं है। जिला जेल हमेशा सुर्खियों में रहा है। कभी बंदियों के बीच मारपीट तो कभी बंदियों की मौत को लेकर। अधिकारियों के निरीक्षण में जेल के भीतर प्रतिबंधित सामग्री भी बरामद होती रहती है। शनिवार को निरीक्षण में अधिकारियों के हाथ केवल एक मोबाइल चार्जर लगा था। हालांकि अधिकारियों को यह बात अच्छी तरह मालूम थी कि जेल में बंदी मनमानी करते हैं। बंदियों को गच्चा देकर रविवार को अधिकारियों ने छापेमारी की।
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 इसके बाद तो हकीकत सभी के सामने आ गई। जेल में निरुद्ध दबंग बंदियों के ऐशोआराम को देख अधिकारी दंग रह गए। उनके लिए तो जेल किसी फाइव स्टार होटल से कम नहीं। सीधे सादे बंदियों को वह अपनी सेवा में लगाए रहते हैं। कभी भी वे काम में नहीं लगाए जाते। जेल में दबंग बंदी अपनी अलग ही सरकार चलाते हैं। उनकी मनमानी को जेल अधिकारी रोकने का साहस नहीं कर पाते। इसके पीछे का जोर कारण सामने आ रहा है, वह चौंकाने वाला है। दबंग बंदी अपनी ऊंची राजनैतिक पहुंच के कारण जेलर के ‘टेरर‘ को दबा देते हैं। यदि उन्हें थोड़ी भी दिक्कत हुई तो वे तत्काल अपने आका को अवगत करा देते हैं। इसके बाद होने वाली फजीहत जेल अधिकारियों के लिए गले की हड्डी बनने लगती है। राजनैतिक प्रेशर और दबंग बंदियों के भय से जेल प्रशासन उनके अनर्गल कार्यों को देखते हुए भी आंख बंद कर लेता है। गत दिनों जेल में दो गुटों की भिड़ंत हो गई थी। जिला प्रशासन का दबाव देखते हुए बंदियों ने अपने आका के प्रभाव का प्रयोग किया। इसके बाद कार्रवाई की प्रक्रिया ही बंद करनी पड़ी। यहां तक कि घायल बंदी ने हमलावरों को पहचानने से ही इनकार कर दिया।
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