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आक्रोशित बंदियों ने छोड़ा खाना, जेल में की तोड़फोड़

Sun, 10 Sep 2017 07:23 PM IST
Updated Sun, 10 Sep 2017 07:23 PM IST
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आक्रोशित बंदियों ने छोड़ा खाना, जेल में की तोड़फोड़
प्रतापगढ़। बुखार से तप रहे बंदी की जेल में मौत पर आक्रोशित आधे बंदियों ने शनिवार रात को ही खाना छोड़ दिया। रविवार की सुबह जेल में निरुद्ध सभी बंदी भूख हड़ताल का एलान कर बैरकों में हंगामा करने लगे। गोलचक्कर में लगे गमले आदि तोड़ दिए। बवाल की आशंका को देखते हुए अधिकारी भारी पुलिस बल लेकर जेल पहुंचे। करीब आठ घंटे तक बंदियों से अफसरों की बातचीत होती रही। मांगों को पूरा करने के आश्वासन पर बंदी खाना खाने के लिए राजी हुए। तब जाकर प्रशासन ने राहत की सांस ली।
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जिला कारागार में चोरी के मामले में निरुद्ध बंदी सोनू पाठक (29) पुत्र भुवनचंद्र की शनिवार को जिला अस्पताल में मौत हो गई थी। बंदियों का आरोप था कि वह एक पखवारे से बुखार से पीड़ित था। उसका समय पर बेहतर इलाज कराया गया होता तो उसकी जान बच जाती। अंतिम समय में उसे जिला अस्पताल भेजा गया। उसकी मौत से क्षुब्ध होकर करीब तीन सौ बंदियों ने शनिवार रात खाना नहीं खाया। बंदी के मौत की खबर रविवार की सुबह तक सभी बंदियों को हो गई। इस पर जेल में निरुद्ध 724 बंदियों ने नाश्ता लेने से इंकार कर दिया। जेल प्रशासन के रवैये से आक्रोशित बंदियों ने भूख हड़ताल का एलान कर हंगामा करना शुरू कर दिया। सूत्रों की मानें तो बैरकों से बाहर निकले बंदी गोलचक्कर में रखे गमले समेत दूसरे सामान तोड़कर विरोध करने लगे। बंदियों को उग्र होता देख बंदीरक्षकों ने मामले की जानकारी जेल अधीक्षक को दी। बंदियों से जेल में बवाल होने की संभावना को देखते हुए जेल प्रशासन ने मामले से जिला प्रशासन को अवगत कराया।
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जानकारी मिलते ही अपर जिलाधिकारी सोमनाथ मौर्य, एसडीएम सदर पंकज वर्मा, एएसपी पश्चिमी बसंतलाल और सीओ सिटी राम आशीष यादव शहर कोतवाल व चौकी प्रभारियों को लेकर जेल पहुंचे। फोर्स को बाहर रोकने के बाद अधिकारी जेल में प्रवेश किए। जेल अधीक्षक से मामले की जानकारी के बाद अधिकारियों ने हंगामा कर भूख हड़ताल करने वाले बंदियों से मुलाकात की। करीब आठ घंटे तक होने वाली बातचीत में बंदियों ने मांग रखी कि समय पर बंदियों का समुचित इलाज कराया जाए। जिला अस्पताल से विशेषज्ञ डाक्टरों की टीम समय-समय पर बंदियों की जांच करने आए। जिन बंदियों को इलाज के लिए बाहर अस्पताल जाना जरूरी हो उन्हें तत्काल भेजा जाए। बंदियों ने एक माह के भीतर जेल में निरुद्ध दो बंदियों की बीमारी से मौत का मामला भी अधिकारियों के सामने उठाया। अधिकारियों ने भरोसा दिलाया कि उनकी मांगों को पूरा कराया जाएगा। जिसके बाद बंदियों ने भोजन करने के लिए हामी भर दी। तब जाकर प्रशासन ने राहत की सांस ली।
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जिला कारागार में निरुद्ध दो सौ बंदी वायरल फीवर से पीड़ित हैं। बंदियों को बुखार, सर्दी व जुकाम का इलाज जेल अस्पताल में होता है। सूत्रों की मानें तो इन बीमार मरीजों में लगभग 22 की हालत ऐसी है कि उनका उपचार खून, पेशाब की जांच के बाद ही हो सकता है। इसके बावजूद जेल प्रशासन मरीजों को पैथालाजी जांच के लिए बाहर नहीं भेजता। जिससे मरीजों की तबियत ठीक होने के बजाय बिगड़ती ही जाती है। इसके लिए पुलिस की गार्द न मिलने का बहाना जेल प्रशासन के पास रहता है। जेल में निरुद्ध बंदियों से मुलाकात करने के लिए परिवार के लोग सुबह से कारागार पहुंच गए थे। जेल में हंगामे के कारण बंदियों को मुलाकात के लिए परेशान होना पड़ा। अधिकारियों के बाहर निकलने के बाद ही बंदियों से परिवार के लोगों व करीबियों से मुलाकात कराने के लिए जेल प्रशासन माथापच्ची करने लगा।

एसडीएम सदर पंकज वर्मा का कहना है कि बीमार बंदियों के समुचित इलाज, विशेषज्ञ डाक्टरों से जेल में बंदियों का उपचार और चिकित्सकीय जांच के लिए जिला अस्पताल भेजने का इंतजाम करने के लिए गार्द की व्यवस्था की मांग बंदियों ने रखी थी। उनमे इस बात का गुस्सा था कि तबियत खराब होने की शिकायत के बाद भी उसे गंभीरता से नहीं लिया जाता। जिससे बंदियों की मौत हो रही है। उनकी मांगों को पूरा करने का आश्वासन दिया गया है। जिसके बाद बंदियों ने भूख हड़ताल समाप्त कर दिया। तोड़फोड़ जैसी कोई बात नही है।


जिला कारागार फैजाबाद से 3 अप्रैल 2017 को सोनू पाठक पुत्र भुवनचंद्र निवासी दसौली थाना बाघनाथ जनपद बाघेश्वर उत्तराखंड को कोहड़ौर में पिछले साल चोरी के मामले में वारंट बी के जरिए बेल्हा की जेल लाया गया था। तब से वह जेल में बंद था। उसके ऊपर इलाहाबाद में एक चोरी का मुकदमा दर्ज था। चोरी के दौरान उस पर वाहन चलाने का आरोप था। सोनू का जो मोबाइल नंबर जेल प्रशासन के पास था। वह बंद बता रहा। जिसके कारण पता नहीं चल सका। परिवार के लोगों को सूचना देने के लिए जेल के साथ ही पुलिस प्रशासन ने टेलीग्राम भेजा है। रविवार को उसका पोस्टमार्टम नहीं हो सका।
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