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मुखबिरी के शक में मारा गया बृजेश
Updated Sun, 11 Nov 2018 12:43 AM IST
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किशुनगंज। कंधई इलाके में ताबड़तोड़ फायरिंग कर बृजेश की हत्या की वजह फौरी तौर पर मुखबिरी मानी जा रही है। पुलिस आशंका जता रही है कि उसकी हत्या में एक लाख के ईनामी बदमाश हब्बू का हाथ हो सकता है। कंधई थाने में दरोगा पर जानलेवा हमले के मामले में गवाह बनने के बाद से बृजेश को लगातार जान से मारने की धमकियां मिल रही थीं। कोहड़ौर में कुछ माह पहले हुए डबल मर्डर व अंतू में बैंक डकैती की घटना के बाद एसटीएफ और पुलिस से बृजेश की नजदीकी बढ़ गई थी। यह बात बृजेश के विरोधियों को अखर रही थी। तीन माह पहले भी उसे गोली मारी गई थी, लेकिन वह बच गया था। तब से वह बाहर बहुत कम निकलता था। पुलिस आरोपियों की तलाश में दबिश का दावा ही करती रही और धमकी देने वाले आरोपी उसे गोलियों से भूनकर भागने में कामयाब हो गए।
कंधई थाना क्षेत्र के मधुपुर मिश्र का पुरवा निवासी बृजेश मिश्रा का इलाके में दबदबा था। 15 नवंबर 2015 को कंधई थाने में तैनात दरोगा रणजीत पांडेय के ऊपर जानलेवा हमला हुआ था। जिसमे बृजेश गवाह बन गया था। पुलिस ने हमले में हब्बू उर्फ अंकुर निवासी मदुरा रानीगंज थाना कोहड़ौर का नाम खोला था। ग्रामीणों की मानें तो तब से बृजेश को लगातार धमकी मिलती रहती थी। 3 अगस्त 2017 को जफरापुर मोड़ के पास भी उस पर हमला हुआ था। इस मामले में पुलिस ने हब्बू पासी समेत चार लोगों को नामजद किया था। कंधई मधुपुर में भरत मिलाप के दौरान हुई मारपीट व फायरिंग में बृजेश के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज हुआ था। बृजेश की अदावत धीरे-धीरे बढ़ती ही जा रही थी।
5 अगस्त 2018 को नगर कोतवाली के बेनीपुर में बाइक सवार चार बदमाशों ने बृजेश को गोली मारी थी। हालांकि गोली लगने के बाद भी वह बच गया था। उसके सारे विरोधी एकजुट हो गए थे। वह बृजेश के करीबियों से संदेश भेजते थे कि वह उनके कामों में बाधा बन रहा है। वह दुनिया में रहने नहीं पाएगा। इस बात की जानकारी पुलिस को भी थी। चर्चाओं पर यकीन करें तो दरोगा पर हुए जानलेवा हमले के अलावा पुलिस की मुखबिरी भी बृजेश की हत्या की वजह बनी। कंधई थानाध्यक्ष ने बताया कि मृतक के ऊपर भी आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। दरोगा पर हुए जानलेवा हमले में बृजेश के गवाह होने की जानकारी नहीं है। नामजद आरोपी शमशाद व उसके साथियों से करीब चार साल पहले मारपीट हुई थी। जिसके बाद उनके बीच हमेशा जंग छिड़े रहने की बात सामने आ रही है।
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कंधई थाना क्षेत्र के मधुपुर मिश्र का पुरवा निवासी बृजेश मिश्रा का इलाके में दबदबा था। 15 नवंबर 2015 को कंधई थाने में तैनात दरोगा रणजीत पांडेय के ऊपर जानलेवा हमला हुआ था। जिसमे बृजेश गवाह बन गया था। पुलिस ने हमले में हब्बू उर्फ अंकुर निवासी मदुरा रानीगंज थाना कोहड़ौर का नाम खोला था। ग्रामीणों की मानें तो तब से बृजेश को लगातार धमकी मिलती रहती थी। 3 अगस्त 2017 को जफरापुर मोड़ के पास भी उस पर हमला हुआ था। इस मामले में पुलिस ने हब्बू पासी समेत चार लोगों को नामजद किया था। कंधई मधुपुर में भरत मिलाप के दौरान हुई मारपीट व फायरिंग में बृजेश के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज हुआ था। बृजेश की अदावत धीरे-धीरे बढ़ती ही जा रही थी।
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5 अगस्त 2018 को नगर कोतवाली के बेनीपुर में बाइक सवार चार बदमाशों ने बृजेश को गोली मारी थी। हालांकि गोली लगने के बाद भी वह बच गया था। उसके सारे विरोधी एकजुट हो गए थे। वह बृजेश के करीबियों से संदेश भेजते थे कि वह उनके कामों में बाधा बन रहा है। वह दुनिया में रहने नहीं पाएगा। इस बात की जानकारी पुलिस को भी थी। चर्चाओं पर यकीन करें तो दरोगा पर हुए जानलेवा हमले के अलावा पुलिस की मुखबिरी भी बृजेश की हत्या की वजह बनी। कंधई थानाध्यक्ष ने बताया कि मृतक के ऊपर भी आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। दरोगा पर हुए जानलेवा हमले में बृजेश के गवाह होने की जानकारी नहीं है। नामजद आरोपी शमशाद व उसके साथियों से करीब चार साल पहले मारपीट हुई थी। जिसके बाद उनके बीच हमेशा जंग छिड़े रहने की बात सामने आ रही है।
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