{"_id":"5a3e69b64f1c1bbd208b8574","slug":"141514039734-pratapgarh-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"जेल में बंदियों के पास हैं महंगे मोबाइल","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
जेल में बंदियों के पास हैं महंगे मोबाइल
Updated Sat, 23 Dec 2017 08:05 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
प्रतापगढ़। जिला कारागार में अधिकारियों के निरीक्षण के दौरान सबकुछ आल इज वेल मिलता है। जबकि जेल में बंदी महंगे मोबाइल सेट का प्रयोग करते हैं। उनके पास मनोरंजन के साधन के अलावा प्रतिबंधित सामग्री भी है, लेकिन तलाशी के दौरान बंदीरक्षक या पुलिसकर्मी उसे खोज नहीं पाते। मोबाइल या फिर दूसरी प्रतिबंधित चीजें भी जेल के अंदर बंदीरक्षकों की मिलीभगत के कारण ही पहुंची हैं।
जिला कारागार हमेशा सुर्खियों में रहता है। कभी बंदी की मौत तो कभी मोबाइल या दूसरे प्रतिबंधित सामग्री बरामद होते रहते हैं। नए जेल अधीक्षक ने बंदियों पर शिकंजा कसा, लेकिन अभी भी दबंग बंदी मनमानी करने से बाज नहीं आ रहे हैं। 20 दिसंबर को जेल में निरुद्ध बंदी ने फेसबुक पर कारागार के भीतर महंगे मोबाइल से खींची गई फोटो अपलोड कर दी। जिसके बाद जेल प्रशासन के साथ ही जिला प्रशासन में हड़कंप मच गया था। यहां तक 21 दिसंबर की रात एडीएम सोमदत्त मौर्य और अपर पुलिस अधीक्षक पूर्वी जेल पहुंचे। भारी पुलिस बल के साथ पहुंचे अधिकारियों ने बैरकों की गहनता से छानबीन की लेकिन कुछ हाथ नहीं लगा।
शुक्रवार को जिला जज, जिलाधिकारी व पुलिस अधीक्षक भी जेल पहुंचे। जेल में सबकुछ आल इज वेल मिला। आरोपों को सच माना जाए तो जेल में निरुद्ध बंदियों की गतिविधियों से जेल प्रशासन भले ही परिचित न हो, लेकिन हकीकत यही है कि बहुत से ऐसे बंदी हैं जिनके पास प्रतिबंधित सामग्री मौजूद है। वह खतरा टलने पर उसका प्रयोग मनोरंजन के लिए करने लगते हैं। जेल में मोबाइल पर अंकुश लगाने के लिए जैमर भी लगाए गए हैं, लेकिन उससे फायदा होता नहीं दिख रहा है। जैमर की क्षमता टू जी मोबाइल रोकने की है। मौजूदा समय में बंदियों के पास 4जी सिम उपलब्ध हैं। जेल अधीक्षक आरके त्रिपाठी का दावा है कि कम संसाधन के बावजूद बंदियों पर अंकुश लगाने का प्रयास हो रहा है। रात में औचक छापेमारी की जाती है। दिन में भी निगाह रखी जा रही है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि बहुत दिनों से बिगड़ी व्यवस्था को सुधारने में वक्त लगेगा।
विज्ञापन
जिला कारागार में बंदियों पर की कई सख्ती का असर देखने को मिल रहा है। सूत्रों की मानें तो अभी तक जेल में निरुद्ध आम बंदी अपने परिवार के लोगों से बातचीत करने के लिए दबंग बंदियों को 20 रुपये प्रति मिनट के हिसाब से देते थे। अब सख्ती के बाद जेल में मोबाइल से बात करने का रेट बढ़ गया है। अब जेल में निरुद्ध बंदियों को बातचीत करने के लिए 30 रुपये देने पड़ रहे हैं। जेल में निरुद्ध दबंग बंदी महंगे चाइनीज फोन का इस्तेमाल कर रहे हैं। जेल सूत्रों की मानें तो कई चाइनीज कंपनियों के मोबाइल पर जैमर का असर नहीं पड़ता। ऐसे मोबाइलों का प्रयोग जेल में निरुद्ध बंदी करने लगे हैं। तलाशी लेने के कारण बंदी भी बैरक आने वाले रास्ते पर नजर रखते हैं। खतरा देखते ही बंदी प्रतिबंधित सामग्री को सुरक्षित स्थान पर छिपा देते हैं। ताकि निरीक्षण के दौरान कुछ भी न मिल सके।
विज्ञापन
जिला कारागार हमेशा सुर्खियों में रहता है। कभी बंदी की मौत तो कभी मोबाइल या दूसरे प्रतिबंधित सामग्री बरामद होते रहते हैं। नए जेल अधीक्षक ने बंदियों पर शिकंजा कसा, लेकिन अभी भी दबंग बंदी मनमानी करने से बाज नहीं आ रहे हैं। 20 दिसंबर को जेल में निरुद्ध बंदी ने फेसबुक पर कारागार के भीतर महंगे मोबाइल से खींची गई फोटो अपलोड कर दी। जिसके बाद जेल प्रशासन के साथ ही जिला प्रशासन में हड़कंप मच गया था। यहां तक 21 दिसंबर की रात एडीएम सोमदत्त मौर्य और अपर पुलिस अधीक्षक पूर्वी जेल पहुंचे। भारी पुलिस बल के साथ पहुंचे अधिकारियों ने बैरकों की गहनता से छानबीन की लेकिन कुछ हाथ नहीं लगा।
विज्ञापन
शुक्रवार को जिला जज, जिलाधिकारी व पुलिस अधीक्षक भी जेल पहुंचे। जेल में सबकुछ आल इज वेल मिला। आरोपों को सच माना जाए तो जेल में निरुद्ध बंदियों की गतिविधियों से जेल प्रशासन भले ही परिचित न हो, लेकिन हकीकत यही है कि बहुत से ऐसे बंदी हैं जिनके पास प्रतिबंधित सामग्री मौजूद है। वह खतरा टलने पर उसका प्रयोग मनोरंजन के लिए करने लगते हैं। जेल में मोबाइल पर अंकुश लगाने के लिए जैमर भी लगाए गए हैं, लेकिन उससे फायदा होता नहीं दिख रहा है। जैमर की क्षमता टू जी मोबाइल रोकने की है। मौजूदा समय में बंदियों के पास 4जी सिम उपलब्ध हैं। जेल अधीक्षक आरके त्रिपाठी का दावा है कि कम संसाधन के बावजूद बंदियों पर अंकुश लगाने का प्रयास हो रहा है। रात में औचक छापेमारी की जाती है। दिन में भी निगाह रखी जा रही है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि बहुत दिनों से बिगड़ी व्यवस्था को सुधारने में वक्त लगेगा।
विज्ञापन
जिला कारागार में बंदियों पर की कई सख्ती का असर देखने को मिल रहा है। सूत्रों की मानें तो अभी तक जेल में निरुद्ध आम बंदी अपने परिवार के लोगों से बातचीत करने के लिए दबंग बंदियों को 20 रुपये प्रति मिनट के हिसाब से देते थे। अब सख्ती के बाद जेल में मोबाइल से बात करने का रेट बढ़ गया है। अब जेल में निरुद्ध बंदियों को बातचीत करने के लिए 30 रुपये देने पड़ रहे हैं। जेल में निरुद्ध दबंग बंदी महंगे चाइनीज फोन का इस्तेमाल कर रहे हैं। जेल सूत्रों की मानें तो कई चाइनीज कंपनियों के मोबाइल पर जैमर का असर नहीं पड़ता। ऐसे मोबाइलों का प्रयोग जेल में निरुद्ध बंदी करने लगे हैं। तलाशी लेने के कारण बंदी भी बैरक आने वाले रास्ते पर नजर रखते हैं। खतरा देखते ही बंदी प्रतिबंधित सामग्री को सुरक्षित स्थान पर छिपा देते हैं। ताकि निरीक्षण के दौरान कुछ भी न मिल सके।