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बेल्हा में एसटीएफ भी फेल
Updated Thu, 15 Nov 2018 10:59 PM IST
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बेल्हा में एसटीएफ भी फेल
हत्या का खुलासा व बैंक लूटने वाले बदमाशों को खोजने में हांफ गई एसटीएफ, टूट रहा लोगों का भरोसा
सनसनीखेज घटनाओं को अंजाम देने वाले बदमाशों की धरपकड़ का मिलता है टारगेट
केस -1
सपा नेता के भाई के हत्यारों को नहीं खोज सकी एसटीएफ
नगर कोतवाली के सिनेमा रोड स्थित सैलून पर शेविंग कराते समय 5 फरवरी 2018 की रात बाइक सवार बदमाशों ने सपा नेता मनीष पाल के भाई आशीष उर्फ जान की गोली मारकर हत्या कर दी थी। घटना के बाद हत्यारे भाग निकले। कोतवाली पुलिस कई दिनों तक हाथ पैर चलाती रही, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। घटना का खुलासा करने के लिए एसटीएफ लगाई गई, नतीजा सिफर रहा।
केस-2
नगर कोतवाली के अष्टभुजानगर स्थित शिवम गैस एजेंसी के कैशियर राजेश पाल को 26 अप्रैल को दिनदहाड़े गोली मारकर बाइक सवार बदमाश सवा 11 लाख रुपये लूट ले गए। कोतवाली पुलिस के हार मारने के बाद घटना को अंजाम देने वाले बदमाशों की धरपकड़ के लिए एसटीएफ को लगाया गया। अभी तक बदमाश हाथ नहीं लगे।
केस-3
व्यापारी भाइयों के हत्यारोपियों को खोजने में रही नाकाम
कोहड़ौर बाजार में रंगदारी न देने पर व्यापारी श्यामसुंदर व श्याममूरत को बदमाशों ने गोलियों से भून दिया। इस घटना के बाद पुलिस प्रशासन में हडक़ंप मच गया। व्यापारियों में आक्रोश को देखते हुए उसी समय एसटीएफ को बदमाशों की धरपकड़ के लिए लगा दिया गया। काफी दिनों तक बदमाशों को एसटीएफ मुंबई, उड़ीसा से लेकर गुजरात तक खोजती रही, लेकिन कामयाब नहीं हो सकी। शातिर बदमाशों के तंत्र के आगे एसटीएफ फेल रही।
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केस-4
बैंक डकैती में भी एसटीएफ को नहीं मिली कामयाबी
अंतू में ग्रामीण बैंक में डकैती डालकर बदमाश 6 लाख रुपये लूट ले गए थे। बैंक लूटने वालों की तलाश में घटना वाले दिन ही एसटीएफ पहुंच गई। लुटेरों को पकडने के लिए जाल बिछाया, लेकिन कामयाबी नहीं मिली। सूत्रों की मानें तो एसटीएफ को बदमाशों के छिपने की सटीक जानकारी थी, लेकिन कदम नहीं बढ़ाया। नतीजा बैंक लूटने के बाद बदमाश भागने में कामयाब रहे। सीसीटीवी फुृटेज के सहारे बदमाशों की तलाश में जुटी एसटीएफ के पहले एसपी की स्पेशल क्राइम ब्रांच की टीम ने बदमाश अभिषेक सरोज को दबोच लिया। इसके बाद घटना में शामिल दूसरे बदमाश एसटीएफ के हाथ लग गए।
केस-5
एसटीएफ की मुखबिरी के शक में मारा गया बृजेश
कंधई थाना क्षेत्र के मधुपुर मिश्र का पुरवा निवासी बृजेश मिश्रा की अदावत कई लोगों से चल रही थी। बैंक डकैती व व्यापारी भाइयों की हत्या में अंकुर सरोज उर्फ हब्बू का नाम आते ही एसटीएफ ने बृजेश को अपने पाले में शामिल कर लिया। पुलिस सूत्रों की मानें तो कभी हब्बू के साथ रहने वाले बृजेश को उसकी कमजोरी पता थी। हब्बू को पकड़वाने के लिए एसटीएफ व सुलतानपुर पुलिस बृजेश की मदद लेनी लगी। पुलिस की मुखबिरी के शक व पुरानी अदावत में बृजेश की 10 नवंबर को भोर बाइक सवार बदमाश गोलियों से भूनकर भाग निकले। घटना के बाद पहुंची एसटीएफ इलाहाबाद की टीम ने तीन दिनों से डेरा डाल रखा है लेकिन अभी तक बदमाश एसटीएफ के हाथ नहीं लगे।
केस-6
एमआर के हत्यारों का भी नहीं लगा सुराग
मानधाता थाना क्षेत्र के हरचेतपुर भगवतगंज में 16 अक्तूबर को नई बाइक से घर जा रहे एमआर बजरंग बहादुर सिंह की गोली मारकर हत्या करने के बाद बदमाशों ने बाइक लूट ली। घटना का खुलासा करने के लिए मानधाता पुलिस के साथ ही क्राइम ब्रांच को लगाया गया लेकिन मामले में कामयाबी न मिलती देख एसटीएफ भी काम करने लगी। तमाम खोजबीन के बाद भी घटना का अनावरण करने में पुलिस व एसटीएफ कामयाब नहीं हो सकी।
अमर उजाला ब्यूरो
प्रतापगढ़। जिले की कई बड़ी घटनाओं में पुलिस की नाकामी के बाद एसटीएफ को लगाया गया, लेकिन यहां वह भी फेल हो गई। कई सनसनीखेज बड़ी वारदातों के खुलासे के लिए लखनऊ और इलाहाबाद से एसटीएफ को लगाया गया, लेकिन वह बदमाशों को पकडने और घटनाओं का खुलासा करने में नाकाम रही। ऐसे अब लोगों का एसटीएफ के ऊपर से भी भरोसा उठता जा रहा है। कोहड़ौर में व्यापारी भाइयों की हत्या हो या फिर अंतू में बैंक डकैती। नगर कोतवाली में सपा नेता के भाई की हत्या हो या फिर मानधाता में एमआर की हत्या। इन सभी मामलों में एसटीएफ का तंत्र अभी तक कारगर नहीं हो सका। जिसके चलते शातिर इनामी अपराधी जिले में खूनखराबा करने के साथ ही लूटपाट की घटनाओं को अंजाम देने के बाद खुली हवा में सांस ले रहे हैं। जबकि एसटीएफ की टीम को 50 हजार के इनामी बदमाशों को पकडने या फिर सनसनीखेज घटनाओं का खुलासा करने का टारगेट अफसरों द्वारा दिया जाता है।
इनसेट----
बदमाशों के हाथ से निकलने के बाद एक दूसरे पर फोड़ते हैं ठीकरा
इनामी बदमाशों की धरपकड़ के लिए एसटीएफ लखनऊ व इलाहाबाद की टीम ने बराबर जनपद में डेरा डाल रखा है। कोहड़ौर में व्यापारी भाइयों की हत्या का मामला हो या फिर अंतू की बैंक डकैती। घटना के बाद एसटीएफ सक्रिय हुई। यह सिविल पुलिस को अच्छा नहीं लगा। बदमाशों के हाथ से निकलने के बाद एसटीएफ सिविल पुलिस को जिम्मेदार ठहराती रही और सिविल पुलिस एसटीएफ को। चूंकि एसटीएफ धरपकड़ के लिए सिविल पुलिस को अपने साथ नहीं लेती और न ही किसी प्रकार की जानकारी देती है। इससे पुलिस को बाद में भनक लगती है।
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हत्या का खुलासा व बैंक लूटने वाले बदमाशों को खोजने में हांफ गई एसटीएफ, टूट रहा लोगों का भरोसा
सनसनीखेज घटनाओं को अंजाम देने वाले बदमाशों की धरपकड़ का मिलता है टारगेट
केस -1
सपा नेता के भाई के हत्यारों को नहीं खोज सकी एसटीएफ
नगर कोतवाली के सिनेमा रोड स्थित सैलून पर शेविंग कराते समय 5 फरवरी 2018 की रात बाइक सवार बदमाशों ने सपा नेता मनीष पाल के भाई आशीष उर्फ जान की गोली मारकर हत्या कर दी थी। घटना के बाद हत्यारे भाग निकले। कोतवाली पुलिस कई दिनों तक हाथ पैर चलाती रही, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। घटना का खुलासा करने के लिए एसटीएफ लगाई गई, नतीजा सिफर रहा।
केस-2
नगर कोतवाली के अष्टभुजानगर स्थित शिवम गैस एजेंसी के कैशियर राजेश पाल को 26 अप्रैल को दिनदहाड़े गोली मारकर बाइक सवार बदमाश सवा 11 लाख रुपये लूट ले गए। कोतवाली पुलिस के हार मारने के बाद घटना को अंजाम देने वाले बदमाशों की धरपकड़ के लिए एसटीएफ को लगाया गया। अभी तक बदमाश हाथ नहीं लगे।
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व्यापारी भाइयों के हत्यारोपियों को खोजने में रही नाकाम
कोहड़ौर बाजार में रंगदारी न देने पर व्यापारी श्यामसुंदर व श्याममूरत को बदमाशों ने गोलियों से भून दिया। इस घटना के बाद पुलिस प्रशासन में हडक़ंप मच गया। व्यापारियों में आक्रोश को देखते हुए उसी समय एसटीएफ को बदमाशों की धरपकड़ के लिए लगा दिया गया। काफी दिनों तक बदमाशों को एसटीएफ मुंबई, उड़ीसा से लेकर गुजरात तक खोजती रही, लेकिन कामयाब नहीं हो सकी। शातिर बदमाशों के तंत्र के आगे एसटीएफ फेल रही।
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बैंक डकैती में भी एसटीएफ को नहीं मिली कामयाबी
अंतू में ग्रामीण बैंक में डकैती डालकर बदमाश 6 लाख रुपये लूट ले गए थे। बैंक लूटने वालों की तलाश में घटना वाले दिन ही एसटीएफ पहुंच गई। लुटेरों को पकडने के लिए जाल बिछाया, लेकिन कामयाबी नहीं मिली। सूत्रों की मानें तो एसटीएफ को बदमाशों के छिपने की सटीक जानकारी थी, लेकिन कदम नहीं बढ़ाया। नतीजा बैंक लूटने के बाद बदमाश भागने में कामयाब रहे। सीसीटीवी फुृटेज के सहारे बदमाशों की तलाश में जुटी एसटीएफ के पहले एसपी की स्पेशल क्राइम ब्रांच की टीम ने बदमाश अभिषेक सरोज को दबोच लिया। इसके बाद घटना में शामिल दूसरे बदमाश एसटीएफ के हाथ लग गए।
केस-5
एसटीएफ की मुखबिरी के शक में मारा गया बृजेश
कंधई थाना क्षेत्र के मधुपुर मिश्र का पुरवा निवासी बृजेश मिश्रा की अदावत कई लोगों से चल रही थी। बैंक डकैती व व्यापारी भाइयों की हत्या में अंकुर सरोज उर्फ हब्बू का नाम आते ही एसटीएफ ने बृजेश को अपने पाले में शामिल कर लिया। पुलिस सूत्रों की मानें तो कभी हब्बू के साथ रहने वाले बृजेश को उसकी कमजोरी पता थी। हब्बू को पकड़वाने के लिए एसटीएफ व सुलतानपुर पुलिस बृजेश की मदद लेनी लगी। पुलिस की मुखबिरी के शक व पुरानी अदावत में बृजेश की 10 नवंबर को भोर बाइक सवार बदमाश गोलियों से भूनकर भाग निकले। घटना के बाद पहुंची एसटीएफ इलाहाबाद की टीम ने तीन दिनों से डेरा डाल रखा है लेकिन अभी तक बदमाश एसटीएफ के हाथ नहीं लगे।
केस-6
एमआर के हत्यारों का भी नहीं लगा सुराग
मानधाता थाना क्षेत्र के हरचेतपुर भगवतगंज में 16 अक्तूबर को नई बाइक से घर जा रहे एमआर बजरंग बहादुर सिंह की गोली मारकर हत्या करने के बाद बदमाशों ने बाइक लूट ली। घटना का खुलासा करने के लिए मानधाता पुलिस के साथ ही क्राइम ब्रांच को लगाया गया लेकिन मामले में कामयाबी न मिलती देख एसटीएफ भी काम करने लगी। तमाम खोजबीन के बाद भी घटना का अनावरण करने में पुलिस व एसटीएफ कामयाब नहीं हो सकी।
अमर उजाला ब्यूरो
प्रतापगढ़। जिले की कई बड़ी घटनाओं में पुलिस की नाकामी के बाद एसटीएफ को लगाया गया, लेकिन यहां वह भी फेल हो गई। कई सनसनीखेज बड़ी वारदातों के खुलासे के लिए लखनऊ और इलाहाबाद से एसटीएफ को लगाया गया, लेकिन वह बदमाशों को पकडने और घटनाओं का खुलासा करने में नाकाम रही। ऐसे अब लोगों का एसटीएफ के ऊपर से भी भरोसा उठता जा रहा है। कोहड़ौर में व्यापारी भाइयों की हत्या हो या फिर अंतू में बैंक डकैती। नगर कोतवाली में सपा नेता के भाई की हत्या हो या फिर मानधाता में एमआर की हत्या। इन सभी मामलों में एसटीएफ का तंत्र अभी तक कारगर नहीं हो सका। जिसके चलते शातिर इनामी अपराधी जिले में खूनखराबा करने के साथ ही लूटपाट की घटनाओं को अंजाम देने के बाद खुली हवा में सांस ले रहे हैं। जबकि एसटीएफ की टीम को 50 हजार के इनामी बदमाशों को पकडने या फिर सनसनीखेज घटनाओं का खुलासा करने का टारगेट अफसरों द्वारा दिया जाता है।
इनसेट----
बदमाशों के हाथ से निकलने के बाद एक दूसरे पर फोड़ते हैं ठीकरा
इनामी बदमाशों की धरपकड़ के लिए एसटीएफ लखनऊ व इलाहाबाद की टीम ने बराबर जनपद में डेरा डाल रखा है। कोहड़ौर में व्यापारी भाइयों की हत्या का मामला हो या फिर अंतू की बैंक डकैती। घटना के बाद एसटीएफ सक्रिय हुई। यह सिविल पुलिस को अच्छा नहीं लगा। बदमाशों के हाथ से निकलने के बाद एसटीएफ सिविल पुलिस को जिम्मेदार ठहराती रही और सिविल पुलिस एसटीएफ को। चूंकि एसटीएफ धरपकड़ के लिए सिविल पुलिस को अपने साथ नहीं लेती और न ही किसी प्रकार की जानकारी देती है। इससे पुलिस को बाद में भनक लगती है।