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केरोसिन से तैयार किया जा रहा पेट्रोल और डीजल
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
Updated Sat, 20 Feb 2016 11:22 PM IST
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क्षेत्र में केरोसिन से पेट्रोल और डीजल तैयार किया जा रहा है। बाकायदा इसके लिए प्लांट लगाया गया है। फूलमती स्थित इस प्लांट में भारी मात्रा में केरोसिन लाया जाता है और पेट्रोल और डीजल के रूप में परिवर्तित करके उसे पेट्रोलपंपों पर सप्लाई कर दिया जाता है। यह गोरखधंधा काफी दिनों से चल रहा है, लेकिन अधिकारियों का ध्यान इस पर नहीं जा रहा है।
हथिगवां थाना क्षेत्र के फूलमती धाम के पास प्लांट लगाकर केरोसिन से डीजल और पेट्रोल बनाया जा रहा है। सारा कार्य रात में ही संचालित होता है। यही नहीं रात में ही केरोसिन की गाड़ियां आती हैं और सुबह वह पेट्रोल डीजल में परिवर्तित होकर निकल जाती हैं। पूर्व में सीओ कमल कुमार ने इसकी धरपकड़ की थी, लेकिन बाद में उनके जाने के बाद यह कार्य फिर से अनवरत चल रहा है।
इससे इस क्षेत्र के सैकड़ों लोगों की गाड़ियां समय से पहले ही खराब हो रही हैं। यही नहीं किसान डीजल का उपयोग जिस इंजन में करते हैं वह इंजन भी ज्यादा दिन नहीं चल पाता। गाड़ियां ऐवरेज भी कम देती हैं और जल्द ही उनके इंजन बोल जाते हैं। आश्चर्य इस बात का है कि इसकी जानकारी सभी को है, लेकिन कोई बोलने को तैयार नहीं है। इस गोरखधंधे को एक डीजल और पेट्रोल की दुकान की आड़ में चलाया जा रहा है।
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पूर्व में दूर-दूर तक पेट्रोल पंप नहीं थे। इस पर जिलापूर्ति कार्यालय से इस तरह की दुकानें कस्बों में चलाने के लिए लाइसेंस दिया जाता था। अब जबकि लगभग हर कस्बे में पेट्रोल पंप हो गए हैं तो यह दुकानें धीरे-धीरे विलुप्त हो गईं लेकिन इसमें मिलावट करने के लिए ही कुछ दुकानें चल रही हैं।
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हथिगवां थाना क्षेत्र के फूलमती धाम के पास प्लांट लगाकर केरोसिन से डीजल और पेट्रोल बनाया जा रहा है। सारा कार्य रात में ही संचालित होता है। यही नहीं रात में ही केरोसिन की गाड़ियां आती हैं और सुबह वह पेट्रोल डीजल में परिवर्तित होकर निकल जाती हैं। पूर्व में सीओ कमल कुमार ने इसकी धरपकड़ की थी, लेकिन बाद में उनके जाने के बाद यह कार्य फिर से अनवरत चल रहा है।
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इससे इस क्षेत्र के सैकड़ों लोगों की गाड़ियां समय से पहले ही खराब हो रही हैं। यही नहीं किसान डीजल का उपयोग जिस इंजन में करते हैं वह इंजन भी ज्यादा दिन नहीं चल पाता। गाड़ियां ऐवरेज भी कम देती हैं और जल्द ही उनके इंजन बोल जाते हैं। आश्चर्य इस बात का है कि इसकी जानकारी सभी को है, लेकिन कोई बोलने को तैयार नहीं है। इस गोरखधंधे को एक डीजल और पेट्रोल की दुकान की आड़ में चलाया जा रहा है।
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पूर्व में दूर-दूर तक पेट्रोल पंप नहीं थे। इस पर जिलापूर्ति कार्यालय से इस तरह की दुकानें कस्बों में चलाने के लिए लाइसेंस दिया जाता था। अब जबकि लगभग हर कस्बे में पेट्रोल पंप हो गए हैं तो यह दुकानें धीरे-धीरे विलुप्त हो गईं लेकिन इसमें मिलावट करने के लिए ही कुछ दुकानें चल रही हैं।