{"_id":"5719165d4f1c1baa208b494b","slug":"crime-in-nauhar-hussainpur","type":"story","status":"publish","title_hn":"संतान नहीं होने के गम में आशा बहू ने दी जान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
संतान नहीं होने के गम में आशा बहू ने दी जान
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
Updated Thu, 21 Apr 2016 11:57 PM IST
विज्ञापन
crime
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कंधई थाना के नौहर हुसैनपुर की आशा बहू ने संतान के गम में आग लगाकर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली। घटना में गृहस्थी का सारा सामान भी जल गया। सूचना मिलने पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
नगर कोतवाली के ढे़रहना गांव निवासी जयकरन सिंह ने अपनी बेटी रेखा सिंह (35) की शादी वर्ष 2001 में कंधई थाना क्षेत्र के नौहर हुसैनपुर निवासी सुरेन्द्र प्रताप सिंह के साथ की थी। शादी के बाद रेखा सिंह का चयन आशा बहू के पद पर हो गया। वह गांव में बराबर कार्य भी करती थी। शादी के इतने दिनों बाद भी उसकी कोख सूनी रही। संतान न होने का गम उसे बराबर सातता रहता था। जय करन की मानें तोबच्चा पैदा न होने से रेखा काफी परेशान रहती थी। उसका इलाज भी कराया गया। इसके बाद भी उसे संतान का सुख नहीं मिल सका। गुरुवार की सुबह वह घर में अकेली थी। पति एक बारात में गया था। सास-ससुर खेत में गए थे।
वह भी पाही से लौटी और अपने कमरे का दरवाजा बंद कर स्वयं के ऊपर केरोसिन उड़ेल कर आग लगा ली। उसकी चीख के साथ कमरे से धुआं उठता देख आसपास के लोग दौड़ पड़े। भीतर से बंद दरवाजा तोड़कर लोग घुसे तो रेखा को आग का गोला बना देखा। उसे बचाने के लिए आग बुझाने लगे। किसी तरह आग बुझाकर उसे लोग जिला अस्पताल लाए। जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। खबर मिलते ही मायके के लोगों के साथ ही आसपास के गांव की आशा बहुएं भी अस्पताल पहुंच गईं।
विज्ञापन
विज्ञापन
नगर कोतवाली के ढे़रहना गांव निवासी जयकरन सिंह ने अपनी बेटी रेखा सिंह (35) की शादी वर्ष 2001 में कंधई थाना क्षेत्र के नौहर हुसैनपुर निवासी सुरेन्द्र प्रताप सिंह के साथ की थी। शादी के बाद रेखा सिंह का चयन आशा बहू के पद पर हो गया। वह गांव में बराबर कार्य भी करती थी। शादी के इतने दिनों बाद भी उसकी कोख सूनी रही। संतान न होने का गम उसे बराबर सातता रहता था। जय करन की मानें तोबच्चा पैदा न होने से रेखा काफी परेशान रहती थी। उसका इलाज भी कराया गया। इसके बाद भी उसे संतान का सुख नहीं मिल सका। गुरुवार की सुबह वह घर में अकेली थी। पति एक बारात में गया था। सास-ससुर खेत में गए थे।
विज्ञापन
वह भी पाही से लौटी और अपने कमरे का दरवाजा बंद कर स्वयं के ऊपर केरोसिन उड़ेल कर आग लगा ली। उसकी चीख के साथ कमरे से धुआं उठता देख आसपास के लोग दौड़ पड़े। भीतर से बंद दरवाजा तोड़कर लोग घुसे तो रेखा को आग का गोला बना देखा। उसे बचाने के लिए आग बुझाने लगे। किसी तरह आग बुझाकर उसे लोग जिला अस्पताल लाए। जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। खबर मिलते ही मायके के लोगों के साथ ही आसपास के गांव की आशा बहुएं भी अस्पताल पहुंच गईं।
विज्ञापन