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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Pratapgarh News ›   CoronaVirus: Quarantine stayed for 14 days in Unnao, 8 youths left for settlement on foot

CoronaVirus: उन्नाव में 14 दिन रहे क्वारंटीन, छुट्टी मिली तो पैदल ही बस्ती के लिए निकल पड़े 8 युवक

Fri, 17 Apr 2020 12:05 AM IST
विनोद सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़ Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 17 Apr 2020 12:05 AM IST
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CoronaVirus: Quarantine stayed for 14 days in Unnao, 8 youths left for settlement on foot
कानपुर से पैदल बेल्हा पहुंचे बस्ती जा रहे लोग। - फोटो : pratapgarh
कानपुर में दिहाड़ी मजदूरी करने वाले बस्ती जनपद के आठ युवक अपने घर के लिए पैदल ही चले, लेकिन भाग्य ने साथ नहीं दिया। सभी को उन्नाव में क्वारंटीन करा दिया गया। 14 दिनों के बाद छुट्टी मिली तो पैदल ही निकल पड़े। प्रयागराज के रास्ते वह बेल्हा पहुंचे। रास्ते में मांगकर खाना खाया और हैंडपंपों पर अपनी प्यास बुझाई। दहशत इतनी हो गई थी कि पुलिस वाहनों का हूटर सुनकर सभी छिप जाते।
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जनपद बस्ती के लालगंज कस्बा निवासी रामेंद्र कुमार, अनुज, मणिकानंद, रामसुमेर, बबलू, मनोज, शांतनु व मोहित वर्मा कानपुर में दिहाड़ी मजदूरी करते थे। कोरोना संक्रमण के चलते लाकडाउन को देखते हुए जब दिल्ली से दिहाड़ी मजदूरों का घरों की ओर पलायन हुआ तो यह सभी भी घरों के लिए निकल पड़े, लेकिन इनकी किस्मत ने साथ नहीं दिया।
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उन्नाव पहुंचने पर सभी को पुलिस ने पकड़ लिया। इसके बाद सभी को 14 दिनों के लिए क्वारंटीन करा दिया गया। नियमित जांच भी होती रही। वहां से छुट्टी मिली तो घर चल दिए। सभी भटकते हुए घर की ओर चल पड़े। इन लोगों ने प्रयागराज का रास्ता पकड़ लिया। रास्ते में जो वाहन भी मिलते वह बैठाने से मना कर देते। पुलिस वाहनों के हूटर सुनकर सभी भयभीत होकर छिप जाते।
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तीन दिन बाद गुरुवार को सभी प्रतापगढ़ पहुंचे। रामेंद्र ने बताया कि रास्ते में कुछ स्थानों पर पुलिस ने रोका, लेकिन क्वारंटीन का प्रमाण पत्र देखकर आगे जाने दिया। रास्ते में लोगों से मांगकर खाना खाया। सड़क किनारे लगे हैंडपंपों पर प्यास बुझाई। तीन दिन से लगातार चल रहे हैं। सभी के पैरों में सूूजन तक आ चुकी थी, लेकिन घर पहुंचने की मजबूत इच्छा शक्ति के चलते सभी पैदल ही आगे बढ़ते रहे।

अभी उन लोगों को 200 किमी का सफर तय कर घर पहुंचना है। बहुत से लोगों ने खुद आगे आकर लंच पैकेट पकड़ाया। कुछ लोगों ने पानी के बोतल भी दिए। ऐसे में उन लोगों का हौसला बढ़ता रहा।

पुलिसकर्मियों ने मदद की, दुत्कारा भी

उन्नाव से प्रयागराज जनपद तक का सफर तय करने में इन लोगों को तीन दिन का समय लग गया। रास्ते में पुलिसकर्मियों से बचने का वह लोग पूरा प्रयास करते रहे। कभी बचने की जगह नहीं मिली तो पुलिसकर्मी रोक लेते। कुछ पुलिसकर्मी अच्छी तरह से पेश आए तो कुछ ने दुत्कारा भी। 

जिंदगी भर याद रहेगा यह मंजर

बस्ती के युवकों ने बताया कि कोरोना महामारी से बचाव के लिए किए गए लाकडाउन के बाद पैदा हुए हालात जिंदगी भर याद रहेंगे। एक समय तो ऐसा लगा कि क्वारंटाइन केंद्र जीवन का आखिरी पड़ाव होगा। वहां से निकलने के बाद फिर नई जिंदगी मिली। चूंकि वहां बहुत से ऐसे लोग भी थे जिनके अंदर सर्दी जुकाम के लक्षण थे। यह अनुभव जिंदगी भर याद रहेगा। 
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