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Corona Effect: होटल संचालकों की टूटी कमर, 80 प्रतिशत कर्मचारियों को घटाया, नहीं निकल रहा खर्च
Fri, 03 Jul 2020 05:54 PM IST
विनोद सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
Published by: विनोद सिंह
Updated Fri, 03 Jul 2020 05:54 PM IST
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रेस्टोरेंट
- फोटो : PTI
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वैश्विक महामारी कोरोना के संक्रमण ने होटल और रेस्टोरेंट संचालकों की कमर तोड़कर रख दी है। पहले चरण के लॉकडाउन के बाद 80 प्रतिशत कर्मचारियों को बाहर करने के बाद भी होटल और रेस्टोरेंट का खर्च नहीं निकल पा रहा है। आलम यह है कि रेस्टोरेंट में ग्राहक न के बराबर आ रहे हैं। होटल में रुकने वालों की संख्या भी न के बराबर है। ऐसेे में कर्मचारियों की सैलरी भी निकालना मुश्किल हो रहा है।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : pixabay
शहर में अधिकांश होटल ऐेसे हैं, जिनमें रेस्टोरेंट भी खुला हुआ है। संचालकों ने ऐसा इसलिए किया है कि होटल में जो रहने के लिए रुकेगा, उसे नाश्ता और भोजन करने के लिए बाहर नहीं जाना होगा। कोरोना संक्रमण काल ने उनका पूरा धंधा ही चौपट कर दिया है।
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रेस्टोरेंट
- फोटो : Instagram
तीन माह के लॉक डाउन से होटल संचालकों की रीढ़ ही टूट गई है। सिद्धार्थ होटल के मैनेजर संतोष सिंह ने बताया कि लॉकडाउन में होटल का धंधा पूरी तरह चौपट हो गया है। रेस्टोरेंट में न कोई खाना खाने आ रहा है, और न ही होटल में ठहरने कोई आ रहा है।
restaurant
होटल और रेस्टोरेंट में लॉकडाउन के पहले 40 कर्मचारी काम करते थे, मगर वर्तमान में सिर्फ आठ कर्मचारी हैं। आलम यह है कि इनका वेतन, बिजली का बिल, जनरेटर का खर्च निकलना मुश्किल हो रहा है। शशांक होटल के संचालक शिवशंकर सिंह ने बताया कि लॉकडाउन से होटल का कारोबार पूरी तरह शून्य हो गया है। स्नेह होटल के संचालक विष्णु खंडेलवाल कहते हैं कि लॉकडाउन के बाद स्थिति बहुत खराब हो गई है। उम्मीद थी कि कुछ दिनों में संभल जाएगी, मगर ऐसा नहीं हो रहा है। प्रतिदिन का खर्च निकालना भी मुश्किल हो रहा है।
restaurant
उत्पादन ठप रहने से डिमांड व सप्लाई का संतुलन बिगड़ गया है। इससे पूरी अर्थव्यवस्था चरमरा गई है। इसका असर सीधे आम आदमी पर ही पड़ेगा।