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टूटे ट्रैक से गुजार दी मरुधर एक्सप्रेस, टला बड़ा हादसा
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
Updated Fri, 01 Sep 2017 11:53 PM IST
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प्रतापगढ़
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
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प्रतापगढ़। वाराणसी से जोधपुर जा रही मरुधर एक्सप्रेस गुरुवार की रात साढ़े नौ बजे चिलबिला स्टेशन से पहले क्रासिंग के पास बड़े हादसे से बाल-बाल बच गई। ट्रेन चटकी पटरी से गुजर गई। हालांकि रेल महकमा इससे इनकार कर रहा है। उसका कहना है कि मरुधर के जाने के बाद ट्रैक फ्रैक्चर हुआ। घटना के चलते करीब चालीस मिनट तक वाराणसी-लखनऊ-फैजाबाद रूट बाधित रहा। इससे कई ट्रेनें बाधित हुईं। घटना से रेल महकमे में हड़कंप मच गया। आननफानन में अफसर और कर्मचारी मौके पर पहुंचे और खराबी दुरुस्त की।
प्रतापगढ़ से सटे चिलबिला जंक्शन से पहले क्रासिंग के पास गुरुवार की रात करीब साढ़े नौ बजे ट्रैक फ्रैक्चर हो गया था। इसके बारे में किसी को भनक तक नहीं थी। वाराणसी से जोधपुर जा रही मरुधर एक्सप्रेस टूट ट्रैक से ही धड़धड़ाते हुए निकल गई। तेज आवाज आने पर चालक ने इसकी जानकारी स्टेशन मास्टर चिलबिला के साथ कंट्रोलरूम को दी। सूचना मिलने पर ट्रैक फ्रैक्चर बताने वाली मशीन को रेलवे के कर्मचारियों ने देखा तो वह लाल थी। स्टेशन मास्टर ने इसकी जानकारी गेटमेन को दी। गेटमैन ने जाकर देखा तो पटरी चटकी थी। उसने विभाग के अफसरों को इसकी जानकारी दी। ट्रैक टूटने की जानकारी होते ही विभाग के अफसर परेशान हो गए। इधर से आने वाली ट्रेनों को रोक दिया गया। सरयू एक्सप्रेस व लखनऊ-प्रयाग पैसेंजर ट्रेन प्रतापगढ़ स्टेशन पर खड़ी कर दी गईं। दूसरी ओर चिलबिला स्टेशन पर मालगाड़ी रोक दी गई। काफी देर बाद मालगाड़ी को किसी तरह काशन पर गुजारा गया। थोड़ी देर में रेलवे के अफसर और कर्मचारी मौके पर पहुंचे और 40 मिनट के बाद किसी तरह समस्या दूर की। इसके बाद गुरुवार रात और शुक्रवार दिनभर ट्रेनों को काशन पर निकाला गया। प्रतापगढ़ स्टेशन अधीक्षक त्रिभुवन मिश्रा ने बताया कि मरूधर एक्सप्रेस के निकल जाने के बाद ट्रैक फ्रैक्चर हुआ था। इससे करीब 40 मिनट तक आवागमन बाधित रहा। इसके बाद काशन पर ट्रेनों को गुजारा गया। ट्रैक की निगरानी करने के लिए गैंगमैन मनीष कुमार की ड्यूटी लगाई गई थी। वह लाल और नीली बत्ती लेकर उसी स्थान पर बैठा रहा।
अंग्रेजों के जमाने के रेलवे ट्रैक को बदलने के लिए अब तक रेलवे के अफसर और कर्मचारी जहमत नहीं उठा रहे थे। चिलबिला में टूटे ट्रैक से मरुधर एक्सप्रेस के गुजरने से अफसरों के होश उड़गया। क्षतिग्रस्त हो चुके ट्रैक को बदलने के साथ जर्जर लकड़ी के जर्जर स्लीपर हटाकर पत्थर के लगाए जाने लगे। शुक्रवार दोपहर चार घंटे तक प्रतापगढ़-वाराणसी मेन लाइन पर ब्लाक लिया गया था। बेल्हा में आज भी अंग्रेजों के जमाने का रेलवे ट्रैक लोगों को दिखाई पड़ता है। लकड़ी के स्लीपर सड़ गए हैं। ट्रैक ऊंचा-नीचा हो गया है। चाभी गायब हो गई है तो लाइन बदलने वाला यंत्र क्षतिग्रस्त हो गया हैं।
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प्रतापगढ़ से सटे चिलबिला जंक्शन से पहले क्रासिंग के पास गुरुवार की रात करीब साढ़े नौ बजे ट्रैक फ्रैक्चर हो गया था। इसके बारे में किसी को भनक तक नहीं थी। वाराणसी से जोधपुर जा रही मरुधर एक्सप्रेस टूट ट्रैक से ही धड़धड़ाते हुए निकल गई। तेज आवाज आने पर चालक ने इसकी जानकारी स्टेशन मास्टर चिलबिला के साथ कंट्रोलरूम को दी। सूचना मिलने पर ट्रैक फ्रैक्चर बताने वाली मशीन को रेलवे के कर्मचारियों ने देखा तो वह लाल थी। स्टेशन मास्टर ने इसकी जानकारी गेटमेन को दी। गेटमैन ने जाकर देखा तो पटरी चटकी थी। उसने विभाग के अफसरों को इसकी जानकारी दी। ट्रैक टूटने की जानकारी होते ही विभाग के अफसर परेशान हो गए। इधर से आने वाली ट्रेनों को रोक दिया गया। सरयू एक्सप्रेस व लखनऊ-प्रयाग पैसेंजर ट्रेन प्रतापगढ़ स्टेशन पर खड़ी कर दी गईं। दूसरी ओर चिलबिला स्टेशन पर मालगाड़ी रोक दी गई। काफी देर बाद मालगाड़ी को किसी तरह काशन पर गुजारा गया। थोड़ी देर में रेलवे के अफसर और कर्मचारी मौके पर पहुंचे और 40 मिनट के बाद किसी तरह समस्या दूर की। इसके बाद गुरुवार रात और शुक्रवार दिनभर ट्रेनों को काशन पर निकाला गया। प्रतापगढ़ स्टेशन अधीक्षक त्रिभुवन मिश्रा ने बताया कि मरूधर एक्सप्रेस के निकल जाने के बाद ट्रैक फ्रैक्चर हुआ था। इससे करीब 40 मिनट तक आवागमन बाधित रहा। इसके बाद काशन पर ट्रेनों को गुजारा गया। ट्रैक की निगरानी करने के लिए गैंगमैन मनीष कुमार की ड्यूटी लगाई गई थी। वह लाल और नीली बत्ती लेकर उसी स्थान पर बैठा रहा।
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अंग्रेजों के जमाने के रेलवे ट्रैक को बदलने के लिए अब तक रेलवे के अफसर और कर्मचारी जहमत नहीं उठा रहे थे। चिलबिला में टूटे ट्रैक से मरुधर एक्सप्रेस के गुजरने से अफसरों के होश उड़गया। क्षतिग्रस्त हो चुके ट्रैक को बदलने के साथ जर्जर लकड़ी के जर्जर स्लीपर हटाकर पत्थर के लगाए जाने लगे। शुक्रवार दोपहर चार घंटे तक प्रतापगढ़-वाराणसी मेन लाइन पर ब्लाक लिया गया था। बेल्हा में आज भी अंग्रेजों के जमाने का रेलवे ट्रैक लोगों को दिखाई पड़ता है। लकड़ी के स्लीपर सड़ गए हैं। ट्रैक ऊंचा-नीचा हो गया है। चाभी गायब हो गई है तो लाइन बदलने वाला यंत्र क्षतिग्रस्त हो गया हैं।
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