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बिना पंजीकरण मेडिकल स्टोरों में संचालित हो रहे क्लीनिक
Mon, 10 Jun 2019 12:42 AM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
Published by: विनोद सिंह
Updated Mon, 10 Jun 2019 12:42 AM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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सीएमओ की नाक के नीचे संचालित हो रहे ज्यादातर मेडिकल स्टोर क्लीनिक बन गए हैं। एक-एक मेडिकल स्टोर पर तीन से चार चिकित्सक बैठते हैं। मरीजों का इलाज करते हैं, मगर सीएमओ इससे पूरी तरह अनजान बने हैं। वह कार्रवाई करने से दूर भाग रहे है। इसका फायदा मेडिकल स्टोर संचालक उठा रहे हैं।
शहर से लेकर ग्रामीणांचल के बाजारों में स्थित मेडिकल स्टोर क्लीनिक बन गए हैं। संचालक मेडिकल स्टोर का लाइसेंस बनवाकर तीन से चार एमडी चिकित्सकों को बैठाते हैं। मरीजों से चार से पांच सौ रुपये फीस लेकर उनका इलाज कराते हैं। मगर इससे सीएमओ व उनके स्वास्थ्य कर्मचारी पूरी तरह से अंजान बने हैं।
सीएमओ की नाक के नीचे भी यह खेल चल रहा है। इन दिनों श्रीराम तिराहे से लेकर जीआईसी के बगल तक स्थित मेडिकल स्टोरों पर जनपद के सरकारी या फिर प्राइवेट चिकित्सकों के साथ ही गैरजनपद के चिकित्सक आते हैं। वह चार से पाच सौ रुपये फीस लेकर मरीजों का इलाज करते हैं। डॉक्टर जिस मेडिकल स्टोर पर बैठते हैं, वहीं की सेटिंग वाली दवा लिखते हैं। मरीजों को किसी दूसरे मेडिकल स्टोर पर डॉक्टर की दवा नहीं मिल पाती है।
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महज दो मेडिकल स्टोर का लाइसेंस
स्वास्थ्य विभाग में महज दो मेडिकल स्टोर संचालकों ने बाहरी चिकित्सकों को बैठाने के लिए अनुमति ली है। इनमें एक मीरा मेडिकल स्टोर तो दूसरा शंभू मेडिकल स्टोर है। इसके अतिरिक्त एक भी मेडिकल स्टोर संचालक ने स्वास्थ्य विभाग में अपना पंजीकरण नहीं कराया है। जबकि प्रत्येक मेडिकल स्टोर पर तीन से चार चिकित्सकों का बोर्ड लगा हुआ है।
सरकारी चिकित्सक हफ्ते में दो दिन देते हैं प्रतापगढ़ में समय
प्रतापगढ़, प्रयागराज, लखनऊ, बनारस और सुलतानपुर जनपद में तैनात ज्यादातर चिकित्सक किसी न किसी मेडिकल स्टोर संचालक से सेटिंग कर हफ्ते में दो या फिर तीन दिन मेडिकल स्टोर पर बैठते हैं। बड़े-बड़े बोर्ड को देखकर दो दिनों पहले ही मरीज अपना नंबर लगवाने लगते हैं।
तीन से चार घंटा समय देने के बाद चिकित्सक लौट जाते हैं। वह मेडिकल स्टोर संचालक की ओर से बने पैड पर मरीजों का इलाज करते हैं। पैड पर मेडिकल स्टोर का नाम लिखा होता है। कौन डॉक्टर इलाज कर रहे हैं, इसके बारे में मरीजों को नहीं पता चल पाता है।
बीते वर्ष नोटिस देकर सभी से जवाब मांगा गया था। बोर्ड तक उतरवा दिया गया था। चिकित्सकों को बैठाने पर लाइसेंस बनवाने के लिए कहा गया था। अभी तक किसी ने लाइसेंस नहीं बनवाया है। नोटिस देने के साथ मेडिकल स्टोर को सीज करने के लिए अपर शोध अधिकारी को आदेश दिया गया है।
अरविंद कुमार श्रीवास्तव, सीएमओ।
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शहर से लेकर ग्रामीणांचल के बाजारों में स्थित मेडिकल स्टोर क्लीनिक बन गए हैं। संचालक मेडिकल स्टोर का लाइसेंस बनवाकर तीन से चार एमडी चिकित्सकों को बैठाते हैं। मरीजों से चार से पांच सौ रुपये फीस लेकर उनका इलाज कराते हैं। मगर इससे सीएमओ व उनके स्वास्थ्य कर्मचारी पूरी तरह से अंजान बने हैं।
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सीएमओ की नाक के नीचे भी यह खेल चल रहा है। इन दिनों श्रीराम तिराहे से लेकर जीआईसी के बगल तक स्थित मेडिकल स्टोरों पर जनपद के सरकारी या फिर प्राइवेट चिकित्सकों के साथ ही गैरजनपद के चिकित्सक आते हैं। वह चार से पाच सौ रुपये फीस लेकर मरीजों का इलाज करते हैं। डॉक्टर जिस मेडिकल स्टोर पर बैठते हैं, वहीं की सेटिंग वाली दवा लिखते हैं। मरीजों को किसी दूसरे मेडिकल स्टोर पर डॉक्टर की दवा नहीं मिल पाती है।
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महज दो मेडिकल स्टोर का लाइसेंस
स्वास्थ्य विभाग में महज दो मेडिकल स्टोर संचालकों ने बाहरी चिकित्सकों को बैठाने के लिए अनुमति ली है। इनमें एक मीरा मेडिकल स्टोर तो दूसरा शंभू मेडिकल स्टोर है। इसके अतिरिक्त एक भी मेडिकल स्टोर संचालक ने स्वास्थ्य विभाग में अपना पंजीकरण नहीं कराया है। जबकि प्रत्येक मेडिकल स्टोर पर तीन से चार चिकित्सकों का बोर्ड लगा हुआ है।
सरकारी चिकित्सक हफ्ते में दो दिन देते हैं प्रतापगढ़ में समय
प्रतापगढ़, प्रयागराज, लखनऊ, बनारस और सुलतानपुर जनपद में तैनात ज्यादातर चिकित्सक किसी न किसी मेडिकल स्टोर संचालक से सेटिंग कर हफ्ते में दो या फिर तीन दिन मेडिकल स्टोर पर बैठते हैं। बड़े-बड़े बोर्ड को देखकर दो दिनों पहले ही मरीज अपना नंबर लगवाने लगते हैं।
तीन से चार घंटा समय देने के बाद चिकित्सक लौट जाते हैं। वह मेडिकल स्टोर संचालक की ओर से बने पैड पर मरीजों का इलाज करते हैं। पैड पर मेडिकल स्टोर का नाम लिखा होता है। कौन डॉक्टर इलाज कर रहे हैं, इसके बारे में मरीजों को नहीं पता चल पाता है।
बीते वर्ष नोटिस देकर सभी से जवाब मांगा गया था। बोर्ड तक उतरवा दिया गया था। चिकित्सकों को बैठाने पर लाइसेंस बनवाने के लिए कहा गया था। अभी तक किसी ने लाइसेंस नहीं बनवाया है। नोटिस देने के साथ मेडिकल स्टोर को सीज करने के लिए अपर शोध अधिकारी को आदेश दिया गया है।
अरविंद कुमार श्रीवास्तव, सीएमओ।