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बनते-बनते रह गया राजकीय इंजीनियरिंग काॅलेज
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
Updated Thu, 14 Dec 2017 11:08 PM IST
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शहर से तीन किमी दूर स्थित शिवसत में 96 करोड़ की लागत से बनने वाले इंजीनियरिंग कॉलेज के निर्माण पर ग्रहण लग गया है। कॉलेज के निर्माण के लिए जिला प्रशासन ने 15 एकड़ भूमि चिह्नित की है, लेकिन अभी तक नींव नहीं रखी जा सकी है। जुलाई 2017 से प्रतापगढ़ इंजीनियरिंग कॉलेज की क्लास अंबेडकरनगर में चलाने की तैयारी थी, लेकिन कुछ नहीं हो सका। कालेज की जमीन पर वन विभाग के अड़ंगे को अभी तक दूर नहीं किया जा सका है। इससे भवन निर्माण का कार्य अधर में है। जबकि शासन ने टोकनमनी के रूप में एक करोड़ रुपये जारी कर दिए हैं।
प्रतापगढ़ राजकीय इंजीनियरिंग कालेज के निर्माण में वन विभाग ने अड़ंगा लगा दिया है। 15 एकड़ भूमि पर बनने वाले इंजीनियरिंग कालेज के निर्माण के लिए 96 करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट तैयार किया गया था। तत्कालीन सरकार ने 46 करोड़ रुपये जारी करने पर मंजूरी प्रदान करते हुए एक करोड़ रुपये टोकनमनी के रूप में भुगतान कर दिया था।
तैयारी थी 2017 से अंबेडकरनगर के कालेज में प्रतापगढ़ राजकीय इंजीनियरिंग कालेज के नाम से क्लास चलाए जाएगी। दो वर्ष बाद भवन बनने पर इसे यहां शिफ्ट कर दिया जाएगा। विभागीय जानकारों की मानें तो शासन ने जो धनराशि मंजूर की थी, वह सिर्फ तीन ट्रेड के संचालन के लिए थी। अगर और ट्रेड को मंजूरी मिलती तो धनराशि भी बढ़ जाती।
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राजकीय इंजीनियरिंग कालेज प्रतापगढ़ के नाम से खुलने वाले इस संस्थान के निर्माण की जिम्मेदारी केएनआईटी अंबेडकर नगर को सौंपी गई थी। जिसे दो साल में भवन का निर्माण करना था। इंजीनियरिंग कॉलेज के भवन का निर्माण प्रारंभ होने के पहले ही वन विभाग बाधक बन गया। एनओसी के लिए विभाग में फाइल ऐसे अटकी कि अभी तक बाहर नहीं निकली है। इससे निर्माण कार्य प्रारंभ नहीं हो सका है।
प्रतापगढ़ राजकीय इंजीनियरिंग कालेज के निर्माण में वन विभाग ने अड़ंगा लगा दिया है। 15 एकड़ भूमि पर बनने वाले इंजीनियरिंग कालेज के निर्माण के लिए 96 करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट तैयार किया गया था। तत्कालीन सरकार ने 46 करोड़ रुपये जारी करने पर मंजूरी प्रदान करते हुए एक करोड़ रुपये टोकनमनी के रूप में भुगतान कर दिया था।
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तैयारी थी 2017 से अंबेडकरनगर के कालेज में प्रतापगढ़ राजकीय इंजीनियरिंग कालेज के नाम से क्लास चलाए जाएगी। दो वर्ष बाद भवन बनने पर इसे यहां शिफ्ट कर दिया जाएगा। विभागीय जानकारों की मानें तो शासन ने जो धनराशि मंजूर की थी, वह सिर्फ तीन ट्रेड के संचालन के लिए थी। अगर और ट्रेड को मंजूरी मिलती तो धनराशि भी बढ़ जाती।
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राजकीय इंजीनियरिंग कालेज प्रतापगढ़ के नाम से खुलने वाले इस संस्थान के निर्माण की जिम्मेदारी केएनआईटी अंबेडकर नगर को सौंपी गई थी। जिसे दो साल में भवन का निर्माण करना था। इंजीनियरिंग कॉलेज के भवन का निर्माण प्रारंभ होने के पहले ही वन विभाग बाधक बन गया। एनओसी के लिए विभाग में फाइल ऐसे अटकी कि अभी तक बाहर नहीं निकली है। इससे निर्माण कार्य प्रारंभ नहीं हो सका है।