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अद से आर-पार की तैयारी में भाजपाई
अमर उजाला ब्यूूराे प्रतापगढ़
Updated Fri, 02 Dec 2016 12:12 AM IST
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भाजपाइयों ने जगह-जगह किया स्वागत
- फोटो : अमर उजाला
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यूपी चुनाव के लिए पटेल वोट बैंक पर नजर गड़ाए बैठी भाजपा ने अनुप्रिया पटेल को केंद्रीय मंत्रीमंडल में जगह देकर भले ही यह साबित करने की कोशिश की हो कि अपना दल से उसके रिश्ते मजबूत हैं, लेकिन पार्टी के कार्यकर्ता ही अपना दल के नेताओं को पचा नहीं पा रहे हैं। परिवर्तन रैली के जरिए प्रतापगढ़ में भारतीय जनता पार्टी के नेताओं की पकड़ और जनाधार तलाशने के लिए दो दिन के दौरे पर आए केंद्रीय लघु एवं सूक्ष्म उद्योग मंत्री कलराज मिश्रा के सामने ही अद और भाजपा की कलह खुलकर सामने आ गई। दोनों पार्टियों के बीच की दूरी और गुटबाजी साफ दिखी। अपना दल के अनुप्रिया गुट के एकमात्र विधायक और कृष्णा गुट के प्रतापगढ़ के सांसद को केंद्रीय मंत्री के सामने ही भाजपाइयों के भारी विरोध का सामना करना पड़ा। बीजेपी के कार्यकर्ताओं ने सांसद के विरोध में न सिर्फ नारेबाजी की बल्कि विधायक के साथ धक्कामुक्की करते हुए डन्हें मंच से उतार दिया। संदेश साफ था कि आने वाले विधानसभा चुनाव में जिले के भाजपा नेता और कार्यकर्ता पार्टी के किसी भी कार्यक्रम में अद सांसद और विधायक की दखलंदाजी नहीं चाहते। इतना सबकुछ होने के बाद भी केंद्रीय मंत्री की चुप्पी ने भाजपाइयों को और शह दे दिया। आने वाले चुनाव के लिए वह अद से आर-पार की लड़ाई में हैं।
यूं तो जिले में भाजपा और अद नेताओं के बीच दूरी शुरू से है, लेकिन यह कलह खुलकर तब सामने आ गई जब छह महीने पहले जिले के सांसद हरिवंश सिंह के आमंत्रण पर वाराणसी-लखनऊ राजमार्ग और भुपियामऊ फ्लाईओवर का उद्घाटन करने पहुंचे केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के कार्यक्रम से भी भाजपाइयों ने दूरी बनाए रखी। बीजेपी से टिकट की चाहत रखने कुछ भाजपा नेता जरूर पहुंचे, लेकिन जिलाध्यक्ष समेत संगठन से जुड़े लोगों ने इस कार्यक्रम से कन्नी काट ली। इसके बाद से भाजपा और अपना दल के नेताओं में छत्तीस का आंकड़ा है। अनुप्रिया को केंद्र में मंत्री बनाने के बाद उनकी मां कृष्णा पटेल ने खुद को एनडीए से अलग करते हुए भाजपा से गठबंधन तोड़ने का एलान कर दिया। बावजूद इसके कृष्णा गुट के ही माने जाने वाले सांसद हरिवंश सिंह जब तक भाजपा के कार्यक्रमों में शामिल होते रहते हैं। बुधवार को भी वह परिवर्तन रैली में केंद्रीय मंत्री कलराज मिश्रा के साथ नजर आए, लेकिन भाजपाइयों को नागवार गुजरा और उन्होंने मंच पर ही सांसद का विरोध और नारेबाजी शुरू कर दी। अनुप्रिया गुट के विधायक को तो मंच से उतार दिया। भाजपाइयों का आक्रोश देख उन्हें यात्रा छोड़कर बीच से ही लौटना पड़ गया। उधर भाजपाइयों के विरोध के बारे में पूछने पर सांसद हरिवंश सिंह का कहना था कि वह एनडीए और मोदीजी के साथ हैं।
परिवर्तन यात्रा में उनके शामिल होने का एकमात्र मकसद यह है कि भाजपा का बहुमत कायम हो, लेकिन कुछ लोगों को यह पसंद नहीं है। हम पूरी तरह एनडीए के साथ हैं और मोदीजी के नेतृत्व में काम कर रहे हैं। राष्ट्रीय अध्यक्ष कृष्णा पटेल के भाजपा से गठबंधन तोड़ने और उनके एनडीए के साथ रहने के सवाल पर उन्होंने कहा कि कृष्णा पटेल ने अभी लिखित तौर पर गठबंधन नहीं तोड़ा है और न ही हमारी इस बारे में उनसे कोई बात हुई है। अनुप्रिया को मंत्री बनाने को लेकर वह गुस्से में है। कुछ नाराजगी जरूर है। उन्हें मनाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने भाजपा में शामिल होने की बात को भी सिरे से नकार दिया।
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विश्वनाथगंज के फेर में फंसी भाजपा
भारतीय जनता पार्टी की परिवर्तन यात्रा में विश्वनाथगंज विधायक के खिलाफ नारेबाजी और उन्हें मंच से उतार देने की घटना अनायास नहीं थी, बल्कि इसकी पटकथा बहुत पहले तैयार हो गई थी। दरअसल, विधानसभा चुनाव के लिए जिले की सदर, रानीगंज और विश्वनाथगंज विधानसभा सीट पर भारतीय जनता पार्टी से टिकट के दावेदारों की लंबी फेहरिस्त है। विश्वनाथगंज सीट से भी टिकट के लिए जिले के आधा दर्जन से अधिक नेता अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं। कई तो छह महीने पहले से चुनाव की तैयारी में जुटे हैं। अपना दल के अनुप्रिया गुट से वर्तमान विधायक के साथ कृष्णा गुट से भी कुछ लोगों ने दावेदारी जताते हुए तैयारियां शुरू कर दी हैं। पोस्टर और होर्डिंग वार भी जारी है। बीते कुछ दिनों से जिले में इस चर्चा ने तेजी से जोर पकड़ा है कि अगर भाजपा और अपना दल ने एक साथ चुनाव लड़ा तो विश्वनाथगंज सीट अपना दल के खाते में चली जाएगी। इस चर्चा ने टिकट की दावेदारी कर रहे भाजपा नेताओं के साथ ही समर्थकों के कान खड़े कर दिए। भाजपाई किसी भी कीमत पर विश्वनाथगंज सीट को अपना दल के खाते में नहीं जाने देना चाहते। शायद यही वजह थी कि बुधवार को जब विश्वनाथगंज विधानसभा क्षेत्र के सरायआनादेव में केंद्रीय मंत्री कलराज मिश्र के नेतृत्व में परिवर्तन यात्रा पहुंची तो मंच पर अपना दल के कृष्णा पटेल गुट के विधायक को देखते ही भाजपाइयों ने आपा खो दिया और धक्कामुक्की करने के साथ ही उन्हें मंच से नीचे उतार दिया। भाजपाई केंद्रीय मंत्री कलराज मिश्र के सामने अपना दमखम दिखाने में जुटे थे। ऐसे में समर्थकों संग अद विधायक की मौजूदगी उन्हें रास नहीं आई। भाजपाइयों के इसी गुस्से का शिकार अद के दूसरे गुट के सांसद हरिवंश सिंह को भी होना पड़ा।
यूं तो जिले में भाजपा और अद नेताओं के बीच दूरी शुरू से है, लेकिन यह कलह खुलकर तब सामने आ गई जब छह महीने पहले जिले के सांसद हरिवंश सिंह के आमंत्रण पर वाराणसी-लखनऊ राजमार्ग और भुपियामऊ फ्लाईओवर का उद्घाटन करने पहुंचे केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के कार्यक्रम से भी भाजपाइयों ने दूरी बनाए रखी। बीजेपी से टिकट की चाहत रखने कुछ भाजपा नेता जरूर पहुंचे, लेकिन जिलाध्यक्ष समेत संगठन से जुड़े लोगों ने इस कार्यक्रम से कन्नी काट ली। इसके बाद से भाजपा और अपना दल के नेताओं में छत्तीस का आंकड़ा है। अनुप्रिया को केंद्र में मंत्री बनाने के बाद उनकी मां कृष्णा पटेल ने खुद को एनडीए से अलग करते हुए भाजपा से गठबंधन तोड़ने का एलान कर दिया। बावजूद इसके कृष्णा गुट के ही माने जाने वाले सांसद हरिवंश सिंह जब तक भाजपा के कार्यक्रमों में शामिल होते रहते हैं। बुधवार को भी वह परिवर्तन रैली में केंद्रीय मंत्री कलराज मिश्रा के साथ नजर आए, लेकिन भाजपाइयों को नागवार गुजरा और उन्होंने मंच पर ही सांसद का विरोध और नारेबाजी शुरू कर दी। अनुप्रिया गुट के विधायक को तो मंच से उतार दिया। भाजपाइयों का आक्रोश देख उन्हें यात्रा छोड़कर बीच से ही लौटना पड़ गया। उधर भाजपाइयों के विरोध के बारे में पूछने पर सांसद हरिवंश सिंह का कहना था कि वह एनडीए और मोदीजी के साथ हैं।
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परिवर्तन यात्रा में उनके शामिल होने का एकमात्र मकसद यह है कि भाजपा का बहुमत कायम हो, लेकिन कुछ लोगों को यह पसंद नहीं है। हम पूरी तरह एनडीए के साथ हैं और मोदीजी के नेतृत्व में काम कर रहे हैं। राष्ट्रीय अध्यक्ष कृष्णा पटेल के भाजपा से गठबंधन तोड़ने और उनके एनडीए के साथ रहने के सवाल पर उन्होंने कहा कि कृष्णा पटेल ने अभी लिखित तौर पर गठबंधन नहीं तोड़ा है और न ही हमारी इस बारे में उनसे कोई बात हुई है। अनुप्रिया को मंत्री बनाने को लेकर वह गुस्से में है। कुछ नाराजगी जरूर है। उन्हें मनाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने भाजपा में शामिल होने की बात को भी सिरे से नकार दिया।
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विश्वनाथगंज के फेर में फंसी भाजपा
भारतीय जनता पार्टी की परिवर्तन यात्रा में विश्वनाथगंज विधायक के खिलाफ नारेबाजी और उन्हें मंच से उतार देने की घटना अनायास नहीं थी, बल्कि इसकी पटकथा बहुत पहले तैयार हो गई थी। दरअसल, विधानसभा चुनाव के लिए जिले की सदर, रानीगंज और विश्वनाथगंज विधानसभा सीट पर भारतीय जनता पार्टी से टिकट के दावेदारों की लंबी फेहरिस्त है। विश्वनाथगंज सीट से भी टिकट के लिए जिले के आधा दर्जन से अधिक नेता अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं। कई तो छह महीने पहले से चुनाव की तैयारी में जुटे हैं। अपना दल के अनुप्रिया गुट से वर्तमान विधायक के साथ कृष्णा गुट से भी कुछ लोगों ने दावेदारी जताते हुए तैयारियां शुरू कर दी हैं। पोस्टर और होर्डिंग वार भी जारी है। बीते कुछ दिनों से जिले में इस चर्चा ने तेजी से जोर पकड़ा है कि अगर भाजपा और अपना दल ने एक साथ चुनाव लड़ा तो विश्वनाथगंज सीट अपना दल के खाते में चली जाएगी। इस चर्चा ने टिकट की दावेदारी कर रहे भाजपा नेताओं के साथ ही समर्थकों के कान खड़े कर दिए। भाजपाई किसी भी कीमत पर विश्वनाथगंज सीट को अपना दल के खाते में नहीं जाने देना चाहते। शायद यही वजह थी कि बुधवार को जब विश्वनाथगंज विधानसभा क्षेत्र के सरायआनादेव में केंद्रीय मंत्री कलराज मिश्र के नेतृत्व में परिवर्तन यात्रा पहुंची तो मंच पर अपना दल के कृष्णा पटेल गुट के विधायक को देखते ही भाजपाइयों ने आपा खो दिया और धक्कामुक्की करने के साथ ही उन्हें मंच से नीचे उतार दिया। भाजपाई केंद्रीय मंत्री कलराज मिश्र के सामने अपना दमखम दिखाने में जुटे थे। ऐसे में समर्थकों संग अद विधायक की मौजूदगी उन्हें रास नहीं आई। भाजपाइयों के इसी गुस्से का शिकार अद के दूसरे गुट के सांसद हरिवंश सिंह को भी होना पड़ा।