Pratapgarh : चेक क्लोनिंग से फ्रॉड करने वाले गिरोह का भंडाफोड़, तीन साइबर अपराधी गिरफ्तार
एसपी के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों के द्वारा ऐसे आधार कार्ड जिनमें लगे हुए मोबाइल नंबर विभिन्न कारणों से बन्द थे, उनके यूआईडी नंबरों का उपयोग करके जाली आधार कार्ड बनाते थे, इसके लिए वह उसी फ़ोन नंबर के नए पोस्टपेड कनेक्शन को सक्रिय कर लेते थे।
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प्रतापगढ़ पुलिस ने बड़े आर्थिक अपराध का खुलासा किया है। पुलिस ने चेक क्लोनिंग से फ्रॉड करने वाले गैग का भंडाफोड़ किया है। इससे जुड़े तीन साइबर अपराधियों को दिल्ली से गिरफ्तार किया है। यह आरोपी फर्जी डॉक्यूमेंट के जरिए फेक अकाउंट खुलवा कर क्लोन चेक से ठग करते थे। अब तक यह करोड़ों रुपये का वारा न्यारा कर खाताधारकों को चूना लगा चुके हैं। गिरफ्तार आरोपियों को शुक्रवार को मीडिया के सामने पेश किया गया।
पुलिस अधीक्षक सतपाल अंतिल ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी 65 चेक की क्लोनिंग कर बैंक से करोड़ों रुपये अपने खातों में ट्रांसफर करा चुके हैं। एसपी ने बताया कि चेक क्लोनिंग करने वाले गिरोह का पर्दाफाश करने वाले पुलिसकर्मियों को एडीजी ज़ोन प्रयागराज ने पुरस्कृत किया है। डीजीपी ने भी पुलिस टीम की प्रशंसा की है।
एसपी ने बताया कि थाना जेठवारा में बैंक ऑफ बड़ौदा शाखा डेरवा के खाताधारक के खाते से फर्जी तरीके से बड़ी धनराशि कुल 11,74,100 रूपये ट्रांसफर होने के प्रकरण में प्राप्त तहरीर के आधार पर मुकदमा पंजीकृत किया गया था। दूसरी घटना थाना जेठवारा में बैंक ऑफ बड़ौदा शाखा डेरवा के 01 खाताधारक के खाता से चेकों की क्लोनिंग कर फर्जी तरीके से बड़ी धनराशि कुल 17,65,600 रुपये ट्रांसफर होने के प्रकरण में केस लिखा गया था। इसी तरह अंतू और कोतवाली नगर क्षेत्र में भी फ्रॉड का मुकदमा दर्ज किया गया था।
एसपी के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों के द्वारा ऐसे आधार कार्ड जिनमें लगे हुए मोबाइल नंबर विभिन्न कारणों से बन्द थे, उनके यूआईडी नंबरों का उपयोग करके जाली आधार कार्ड बनाते थे, इसके लिए वह उसी फ़ोन नंबर के नए पोस्टपेड कनेक्शन को सक्रिय कर लेते थे। फिर इन नए सक्रिय पोस्ट पेड नम्बरों पर जालसाजों द्वारा ओटीपी भेजकर ओटीपी का उपयोग करके एवं अन्य फर्जी दस्तावेजों के आधार पर पता, नाम और फोटो बदलते हुए आधार नंबर और बायोमेट्रिक्स को समान रखते हुए एक नया फर्जी आधार कार्ड बना लेते थे।
अब इन नए फर्जी आधार कार्डों का उपयोग पैन कार्ड और वास्तविक जीएसटी नंबर के साथ नई नकली फर्म बनाने के लिए किया करते थे, जिस पर वे रिटर्न दाखिल करते थे। फिर, ये जालसाज विभिन्न बैंकों में जाकर नए बैंक खाते खुलवाते थे, विशेष रूप से बैंक ऑफ बड़ौदा में एक खाता खुलवाते थे जिसे जालसाजी के लिए प्रयोग करते थे।
इन जालसाजों को बैंक ऑफ बड़ौदा में कुछ बैंक कर्मियों की मदद से ऐसे बैंक खातों की सूची मिल जाती थी, जिनके फोन नंबर बैंक खातों से जुड़े नहीं हैं और उस सूची में से ऐसे कुछ बैंक खाते छांटे जिनमें एक बड़ी धनराशि जमा थी, फिर जालसाजों द्वारा इन खातों के नाम पर फर्जी चेकबुक तैयार कर लिया जाता था। इसके साथ ही बैंक से, उन्होंने ऐसे खातों के धारकों द्वारा अब तक उपयोग किए गए चेक में मौजूद हस्ताक्षर के साथ-साथ अन्य विवरण भी प्राप्त किया ताकि वे अब वास्तविक खाताधारक की तरफ से फर्जी चेक प्रस्तुत कर सकें।