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निर्जला व्रत रख शाम को महिलाएं करेंगी पूजन
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़।
Updated Fri, 04 Nov 2016 11:19 PM IST
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सर्व मनोकामना सिद्धि के लिए रखा जाने वाला डाला छठ का व्रत शनिवार से शुरू हो जाएगा। इस दिन व्रती महिलाएं दिनभर निर्जला व्रत रखकर शाम को सात बजे के बाद खीर-रोट का अर्घ्य देकर बाद में इसको प्रसाद के रूप में ग्रहण करेंगी।
वैसे तो नहाय-खाय के बाद से ही छठ पूजा की शुरुआत प्रतीकात्मक हो जाती है। मगर उसके दूसरे दिन का महत्व विशेष है। वास्तव में इस दिन से पूजा की शुरुआत होती है। सूर्य देवता का आशीर्वाद और परिवार की खुशहाली की कामना से महिलाएं इस व्रत को रखती हैं। शनिवार को व्रती महिलाएं दिनभर बिना कुछ खाय,पिए निर्जला व्रत रहेंगी। शाम को चंद्रमा के दर्शन और पूजन के बाद व्रत तोड़ेंगी। इस दौरान प्रसाद स्वरूप खीर और रोट का अर्घ्य चंद्रमा को दिया जाएगा। खीर और रोट को प्रसाद स्वरूप खाया जाएगा।
मैले पानी से कैसे देंगे अर्घ्य
प्रतापगढ़(ब्यूरो)। मानों तो मैं गंगा मां हूं, न मानों तो बहता पानी...।
शहर में बहने वाली पौराणिक सई नदी का जल मानों कुछ इसी अंदाज में कुछ कहने की कोशिश यहां के लोगों से रहा है। श्रद्धा भाव से मैली हो चुकी सई नदी के जल को शुद्ध मानकर छठ पूजा पर महिलाएं इसी से सूर्य देवता को अर्घ्य देंगी। आचमन के बाद शरीर को भी इसी जल से पवित्र करेंगी।
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छठ पूजा के मौके पर सैकड़ों की संख्या में लोग घाट पर जुटेंगे। मगर वहां की साफ-सफाई की तरफ किसी का ध्यान नहंी जा रहा है। नदी की सफाई तो दूर की बात घाटों की सफाई का कोई इंतजाम नहीं किया गया है। हालांकि मंदिर के मुख्य पुजारी राजा पंडा ने बताया कि नगर पालिका से सफाई के लिये कहा गया है। उन्होंने सफाई करने को कहा गया है। उधर, दो दिन 6 और 7 को छठ पूजा के मौके पर बेल्हादेवी घाट पर सैकड़ों की संख्या में महिलाएं और श्रद्धालु एकत्र होंगी। लोग नदी में उतर कर सूर्य को अर्घ्य देंगे।
इसके बाद भी सुरक्षा के इंतजाम नहीं किये गये हैं। नदी में इस बार पानी अधिक है। पूजा के दौरान अगर कोई हादसा होता है तो डूबने वाले को बचाया नहंी जा सकता है। इसके लिये गोताखोर चाहिए होंगे। अगर जरा सी असावधानी हुई तो इतनी भीड़ को नियंत्रित करना मुश्किल हो जाएगा। इसके लिए बेल्हादेवी घाट पर छठ पूजा का आयोजन कराने वाली समिति के लोगों ने भी जिला प्रशासन को मेले के बारे में अभी तक सूचित नहंी किया है।
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वैसे तो नहाय-खाय के बाद से ही छठ पूजा की शुरुआत प्रतीकात्मक हो जाती है। मगर उसके दूसरे दिन का महत्व विशेष है। वास्तव में इस दिन से पूजा की शुरुआत होती है। सूर्य देवता का आशीर्वाद और परिवार की खुशहाली की कामना से महिलाएं इस व्रत को रखती हैं। शनिवार को व्रती महिलाएं दिनभर बिना कुछ खाय,पिए निर्जला व्रत रहेंगी। शाम को चंद्रमा के दर्शन और पूजन के बाद व्रत तोड़ेंगी। इस दौरान प्रसाद स्वरूप खीर और रोट का अर्घ्य चंद्रमा को दिया जाएगा। खीर और रोट को प्रसाद स्वरूप खाया जाएगा।
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मैले पानी से कैसे देंगे अर्घ्य
प्रतापगढ़(ब्यूरो)। मानों तो मैं गंगा मां हूं, न मानों तो बहता पानी...।
शहर में बहने वाली पौराणिक सई नदी का जल मानों कुछ इसी अंदाज में कुछ कहने की कोशिश यहां के लोगों से रहा है। श्रद्धा भाव से मैली हो चुकी सई नदी के जल को शुद्ध मानकर छठ पूजा पर महिलाएं इसी से सूर्य देवता को अर्घ्य देंगी। आचमन के बाद शरीर को भी इसी जल से पवित्र करेंगी।
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छठ पूजा के मौके पर सैकड़ों की संख्या में लोग घाट पर जुटेंगे। मगर वहां की साफ-सफाई की तरफ किसी का ध्यान नहंी जा रहा है। नदी की सफाई तो दूर की बात घाटों की सफाई का कोई इंतजाम नहीं किया गया है। हालांकि मंदिर के मुख्य पुजारी राजा पंडा ने बताया कि नगर पालिका से सफाई के लिये कहा गया है। उन्होंने सफाई करने को कहा गया है। उधर, दो दिन 6 और 7 को छठ पूजा के मौके पर बेल्हादेवी घाट पर सैकड़ों की संख्या में महिलाएं और श्रद्धालु एकत्र होंगी। लोग नदी में उतर कर सूर्य को अर्घ्य देंगे।
इसके बाद भी सुरक्षा के इंतजाम नहीं किये गये हैं। नदी में इस बार पानी अधिक है। पूजा के दौरान अगर कोई हादसा होता है तो डूबने वाले को बचाया नहंी जा सकता है। इसके लिये गोताखोर चाहिए होंगे। अगर जरा सी असावधानी हुई तो इतनी भीड़ को नियंत्रित करना मुश्किल हो जाएगा। इसके लिए बेल्हादेवी घाट पर छठ पूजा का आयोजन कराने वाली समिति के लोगों ने भी जिला प्रशासन को मेले के बारे में अभी तक सूचित नहंी किया है।