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धूमधाम से मनाया गया बैसाखी का पर्व, गुरुद्वारे में जुटी संगत
Sun, 14 Apr 2019 11:46 PM IST
विनोद सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रतापगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रतापगढ़
Published by: विनोद सिंह
Updated Sun, 14 Apr 2019 11:46 PM IST
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वैशाखी पर बलीपुर गुरूद्वारे में बच्चों को अमृतपान नामकरण कराते ज्ञानीजी।
- फोटो : प्रतापगढ़
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गुरुद्वारा नानकशाही बाबागंज व गुरुद्वारा सिंह सभा पंजाबी कालोनी में बैसाखी का पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। शनिवार को रात 8.30 बजे गुरुद्वारा नानकशाही बाबागंज में कीर्तन दरबार सजाया गया।
जिसमें मुरादाबाद से आए जितेंद्र सिंह ने अपने जत्थे के साथ शबद-कीर्तन गायन किया व पर्व के बारे में विस्तार से बताया। समापन से पूर्व जलियांवाला बाग हत्याकांड के 100 वर्ष पूरे के उपलक्ष्य में शहीदों की याद में अरदास के द्वारा श्रद्धांजलि दी गई।
रविवार को सुबह दोनों गुरुद्वारों में संगतों ने पहुंचकर शबद-कीर्तन. हरि जस श्रवण किया। इस दौरान प्रचारकों ने बताया कि आज ही के दिन 1699 को आनंदपुर साहिब में गुरु गोविंद सिंह ने पंज प्यारों को अमृत का पान कराया व उन्ही पंज प्यारों से खुद भी अमृतपान किया। खालसा पंथ की स्थापना की। पुरुषों के नाम के बाद सिंह व स्त्रियों के नाम के बाद कौर लगाकर सिक्ख कौम की स्थापना की।
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इस अवसर पर सिंह सभा के हजूरी रागी भाई मनोहर सिंह ने कीर्तन किया। इस अवसर पर प्रमुख रूप से सुरेंद्र सिंह, करमजीत सिंह, मंजीत सिंह गोबिंद, परमजीत सिंह, जगमीत सिंह, सतबीर सिंह, नरेंद्र सिंह दीपक आदि मौजूद रहे।
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जिसमें मुरादाबाद से आए जितेंद्र सिंह ने अपने जत्थे के साथ शबद-कीर्तन गायन किया व पर्व के बारे में विस्तार से बताया। समापन से पूर्व जलियांवाला बाग हत्याकांड के 100 वर्ष पूरे के उपलक्ष्य में शहीदों की याद में अरदास के द्वारा श्रद्धांजलि दी गई।
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रविवार को सुबह दोनों गुरुद्वारों में संगतों ने पहुंचकर शबद-कीर्तन. हरि जस श्रवण किया। इस दौरान प्रचारकों ने बताया कि आज ही के दिन 1699 को आनंदपुर साहिब में गुरु गोविंद सिंह ने पंज प्यारों को अमृत का पान कराया व उन्ही पंज प्यारों से खुद भी अमृतपान किया। खालसा पंथ की स्थापना की। पुरुषों के नाम के बाद सिंह व स्त्रियों के नाम के बाद कौर लगाकर सिक्ख कौम की स्थापना की।
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इस अवसर पर सिंह सभा के हजूरी रागी भाई मनोहर सिंह ने कीर्तन किया। इस अवसर पर प्रमुख रूप से सुरेंद्र सिंह, करमजीत सिंह, मंजीत सिंह गोबिंद, परमजीत सिंह, जगमीत सिंह, सतबीर सिंह, नरेंद्र सिंह दीपक आदि मौजूद रहे।