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13 करोड़ के गबन में फंसे लेखाकार
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
Updated Thu, 29 Jan 2015 11:02 PM IST
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बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय में तैनात लेखाकार साहब बड़े कमाल के निकले। तीन वर्ष के बीच 13 करोड़ रुपए का गोलमाल कर दिया। सोशल आडिट के दौरान पोल खुली तो कार्रवाई के लिए शासन को पत्र भेजा गया। टीम ने पाया कि निकाले गए करोड़ों रुपये कहां खर्च किए गए इसका कोई ब्यौरा कार्यालय में नहीं है। आला अधिकारियों से हरी झंडी मिलने के बाद गुरुवार को बीएसए ने साहब के खिलाफ सरकारी धनराशि गबन करने की रिपोर्ट दर्ज कराई।
बेसिक शिक्षा अधिकारी शेख तजम्मुल हुसैन की तहरीर पर कोतवाली पुलिस ने बीएसए कार्यालय में तैनात सहायक वित्त एवं लेखाधिकारी नवीन सक्सेना के खिलाफ लगभग 13 करोड़ सरकारी धनराशि के गबन की रिपोर्ट दर्ज की। तहरीर के मुताबिक सर्व शिक्षा अभियान में संविदा के तहत लेखाकार पद पर नवीन सक्सेना तैनात हैं। 25 अक्तूबर 2006 से लेकर 31 मई 2009 के कार्यकाल में शासन द्वारा भेजी गई रकम का चेक और बैंक के जरिए नकद भुगतान करा लिया गया। चेक संख्या 734201 से लेकर 734300 तक अलग-अलग तिथियों में 12,65,23,766 करोड़ की धनराशि का भुगतान करा लिया। इसके अलावा अलग-अलग तिथियों में 20,99,509 रुपये भी नकद निकाल लिए गए। लेखाकार नवीन सक्सेना ने बैंक से भुगतान के लिए 8,10,38,684 रुपए का चेक भी लगाया था।
हालांकि उक्त धनराशि का भुगतान नहीं हो सका। लेखाकार के गोलमाल की भनक उस समय हो सकी जब सोशल आडिट टीम बीएसए कार्यालय पहुंची। जांच के दौरान ही रुपयों के गबन का मामला सामने आया था। टीम ने पाया कि निकाली गई धनराशि कहां खर्च की गई उसका कोई अभिलेख कार्यालय में मौजूद नहीं था। इससे विभाग में हड़कंप मच गया। टीम ने शासन को इसकी जानकारी दी। रिपोर्ट को संज्ञान में लेते हुए शासन ने कार्रवाई के लिए 7 दिसंबर 2014 को लेखाकार के खिलाफ कार्रवाई के लिए पत्र भेजा।
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बेसिक शिक्षा अधिकारी शेख तजम्मुल हुसैन की तहरीर पर कोतवाली पुलिस ने बीएसए कार्यालय में तैनात सहायक वित्त एवं लेखाधिकारी नवीन सक्सेना के खिलाफ लगभग 13 करोड़ सरकारी धनराशि के गबन की रिपोर्ट दर्ज की। तहरीर के मुताबिक सर्व शिक्षा अभियान में संविदा के तहत लेखाकार पद पर नवीन सक्सेना तैनात हैं। 25 अक्तूबर 2006 से लेकर 31 मई 2009 के कार्यकाल में शासन द्वारा भेजी गई रकम का चेक और बैंक के जरिए नकद भुगतान करा लिया गया। चेक संख्या 734201 से लेकर 734300 तक अलग-अलग तिथियों में 12,65,23,766 करोड़ की धनराशि का भुगतान करा लिया। इसके अलावा अलग-अलग तिथियों में 20,99,509 रुपये भी नकद निकाल लिए गए। लेखाकार नवीन सक्सेना ने बैंक से भुगतान के लिए 8,10,38,684 रुपए का चेक भी लगाया था।
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हालांकि उक्त धनराशि का भुगतान नहीं हो सका। लेखाकार के गोलमाल की भनक उस समय हो सकी जब सोशल आडिट टीम बीएसए कार्यालय पहुंची। जांच के दौरान ही रुपयों के गबन का मामला सामने आया था। टीम ने पाया कि निकाली गई धनराशि कहां खर्च की गई उसका कोई अभिलेख कार्यालय में मौजूद नहीं था। इससे विभाग में हड़कंप मच गया। टीम ने शासन को इसकी जानकारी दी। रिपोर्ट को संज्ञान में लेते हुए शासन ने कार्रवाई के लिए 7 दिसंबर 2014 को लेखाकार के खिलाफ कार्रवाई के लिए पत्र भेजा।
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