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नहरों-नलकूपों ने किसानों को दिया धोखा
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
Updated Sat, 08 Aug 2015 12:54 AM IST
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प्रतापगढ़। खरीफ की फसल की तैयारी में जुटे किसानों को इंद्रदेव के साथ नहरों-नलकूपों ने भी धोखा दे दिया है। जब पानी की जरूरत पड़ी तो जिले की अधिकांश नहरें सूखी हैं और नलकूप ठप हैं। नलकूपों की हालत यह है कि खराब होने के बाद उनके ठीक होने का अवसर ही नहीं आता है। इससे किसानों का भरोसा उनसे उठ गया है।
जिले के 1,23,994 हेक्टेअर खेतों की सिंचाई करने के लिए 290 माइनर, 32 रजबहा और जल शाखाएं हैं। 1843 किमी लंबी नहरों का जाल जिले के संडवा चंद्रिका विकास खंड को छोड़कर सभी ब्लाकों में फैला है। सिंचाई विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो खरीफ के सीजन में 90 हजार हेक्टेअर खेत की सिंचाई का लक्ष्य था। विभागीय अधिकारी पांच अगस्त तक 70 प्रतिशत खेतों तक पानी पहुंचने का दावा कर रहे हैं। तीस प्रतिशत खेतों में इसी माह में पानी पहुंचने का दावा कर रहे हैं, लेकिन वास्तविकता तो यह है कि अगर शासन ने नहरों में प्रतिवर्ष मिलने वाले पानी में कटौती न की होती तो किसानों के समक्ष इतनी बड़ी मुसीबत न खड़ी होती।
सिंचाई विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो प्रतिवर्ष लगभग 900 क्यूसेक पानी मिलता था। मगर इस वर्ष पानी का संकट गहराने की स्थिति का आभास पहले से होने के कारण अफसरों ने 1100 क्यूसेक पानी की मांग की थी। मगर शीर्ष अफसरों ने बीते वर्ष के लक्ष्य में ही कटौती कर डाली। पचास प्रतिशत पानी की कटौती करके नहरों को रोस्टर के मुताबिक पानी तो छोड़ा जा रहा है, मगर यह पानी टेल तक नहीं पहुंच पा रहा है। हालांकि विभाग ने नहरों को रोस्टर के मुताबिक चलने का दावा किया है।
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जिले में नलकूपों की हालत किसी से छिपी नहीं है। किसानों के खेतों की सिंचाई के लिए जिले में 114 नलकूप लगे हुए हैं। विभागीय अधिकारियों का दावा है कि 70 नलकूप पानी उगल रहे हैं। 44 नलकूप ऐेसे हैं, जो ट्रांसफार्मर की खराबी से नहीं चल रहे हैं। विभाग जिन नलकूपों के चलने वाला दावा कर रहा है, उसमें भी स्थिति संदिग्ध है।
नलकूप विभाग के सहायक अभियंता रामलखन को इलाहाबाद, कौशांबी और प्रतापगढ़ का प्रभार मिला है। ऐसी दशा में वह सिर्फ तहसील दिवस में ही शामिल होने आते हैं। इससे कर्मचारी और सहायक अभियंता मनमानी रिपोर्ट देते रहते हैं।
संडवाचंद्रिका विकास खंड क्षेत्र नहर से अछूता है। इस इलाके के किसान निजी पंपिंगसेट और राजकीय नलकूपों की सिंचाई पर आधारित हैं। जलस्तर नीचे होने के कारण ब्लाक को डैंजर जोन घोषित किया गया है। इससे कोई भी किसान पंपसेट के लिए बोरिंग नहीं करवा सकता है। ऐसे में जो किसान पंपिंग सेट लगवाना भी चाहते हैं, वह नहीं लगवा पा रहे हैं।
नहर और नलकूप से खेतों की सिंचाई करने वाले किसानों की सिंचाई का कर प्रदेश सरकार ने माफ कर रखा है। प्रतिवर्ष लगभग साढ़े पांच करोड़ रुपये किसान सिंचाई के रूप में राजस्व जमा करते थे। सिंचाई देने वाले किसान पानी नहीं मिलने पर कर्मचारियों से दो-दो हाथ करने को तैयार भी हो जाते थे, मगर नि:शुल्क पानी पाने वाले किसान अब उस दावे से अधिकारियों और कर्मचारियों पर दबाव नहीं बना पा रहे हैं। किसानों की मानें तो सिंचाई शुल्क माफ होने के बाद नहरों में पानी आने का कोई रोस्टर नहीं रह गया है।
जिले को अधिक से अधिक पानी मिले, इसके लिए अधिकारियों से बराबर संपर्क किया जा रहा है। पानी की जो कटौती हुई थी, उसके लिए भी चीफ अभियंता से बात हुई है। जिले की नहरें रोस्टर के मुताबिक चल रही हैं। जिनमें पानी नहीं है, उनमें अगले सप्ताह रोस्टर के तहत पानी आ जाएगा।
दिनेश मिश्र, अधिशासी अभियंता, सिंचाई विभाग
खराब नलकूपों को ठीक कराने का प्रयास किया जा रहा है। तीन डिवीजन का प्रभार होने के कारण जिले में समय कम दे पाता हूं। नलकूपों का केंद्रीय कार्यालय इलाहाबाद में है। खराब नलकूपों को ठीक होने में समय लगता है। मेरा प्रयास है कि जो खराब नलकूप हैं उन्हें जल्द ठीक कराया जाए।
रामलखन, एसडीओ, राजकीय नलकूप विभाग
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जिले के 1,23,994 हेक्टेअर खेतों की सिंचाई करने के लिए 290 माइनर, 32 रजबहा और जल शाखाएं हैं। 1843 किमी लंबी नहरों का जाल जिले के संडवा चंद्रिका विकास खंड को छोड़कर सभी ब्लाकों में फैला है। सिंचाई विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो खरीफ के सीजन में 90 हजार हेक्टेअर खेत की सिंचाई का लक्ष्य था। विभागीय अधिकारी पांच अगस्त तक 70 प्रतिशत खेतों तक पानी पहुंचने का दावा कर रहे हैं। तीस प्रतिशत खेतों में इसी माह में पानी पहुंचने का दावा कर रहे हैं, लेकिन वास्तविकता तो यह है कि अगर शासन ने नहरों में प्रतिवर्ष मिलने वाले पानी में कटौती न की होती तो किसानों के समक्ष इतनी बड़ी मुसीबत न खड़ी होती।
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सिंचाई विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो प्रतिवर्ष लगभग 900 क्यूसेक पानी मिलता था। मगर इस वर्ष पानी का संकट गहराने की स्थिति का आभास पहले से होने के कारण अफसरों ने 1100 क्यूसेक पानी की मांग की थी। मगर शीर्ष अफसरों ने बीते वर्ष के लक्ष्य में ही कटौती कर डाली। पचास प्रतिशत पानी की कटौती करके नहरों को रोस्टर के मुताबिक पानी तो छोड़ा जा रहा है, मगर यह पानी टेल तक नहीं पहुंच पा रहा है। हालांकि विभाग ने नहरों को रोस्टर के मुताबिक चलने का दावा किया है।
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जिले में नलकूपों की हालत किसी से छिपी नहीं है। किसानों के खेतों की सिंचाई के लिए जिले में 114 नलकूप लगे हुए हैं। विभागीय अधिकारियों का दावा है कि 70 नलकूप पानी उगल रहे हैं। 44 नलकूप ऐेसे हैं, जो ट्रांसफार्मर की खराबी से नहीं चल रहे हैं। विभाग जिन नलकूपों के चलने वाला दावा कर रहा है, उसमें भी स्थिति संदिग्ध है।
नलकूप विभाग के सहायक अभियंता रामलखन को इलाहाबाद, कौशांबी और प्रतापगढ़ का प्रभार मिला है। ऐसी दशा में वह सिर्फ तहसील दिवस में ही शामिल होने आते हैं। इससे कर्मचारी और सहायक अभियंता मनमानी रिपोर्ट देते रहते हैं।
संडवाचंद्रिका विकास खंड क्षेत्र नहर से अछूता है। इस इलाके के किसान निजी पंपिंगसेट और राजकीय नलकूपों की सिंचाई पर आधारित हैं। जलस्तर नीचे होने के कारण ब्लाक को डैंजर जोन घोषित किया गया है। इससे कोई भी किसान पंपसेट के लिए बोरिंग नहीं करवा सकता है। ऐसे में जो किसान पंपिंग सेट लगवाना भी चाहते हैं, वह नहीं लगवा पा रहे हैं।
नहर और नलकूप से खेतों की सिंचाई करने वाले किसानों की सिंचाई का कर प्रदेश सरकार ने माफ कर रखा है। प्रतिवर्ष लगभग साढ़े पांच करोड़ रुपये किसान सिंचाई के रूप में राजस्व जमा करते थे। सिंचाई देने वाले किसान पानी नहीं मिलने पर कर्मचारियों से दो-दो हाथ करने को तैयार भी हो जाते थे, मगर नि:शुल्क पानी पाने वाले किसान अब उस दावे से अधिकारियों और कर्मचारियों पर दबाव नहीं बना पा रहे हैं। किसानों की मानें तो सिंचाई शुल्क माफ होने के बाद नहरों में पानी आने का कोई रोस्टर नहीं रह गया है।
जिले को अधिक से अधिक पानी मिले, इसके लिए अधिकारियों से बराबर संपर्क किया जा रहा है। पानी की जो कटौती हुई थी, उसके लिए भी चीफ अभियंता से बात हुई है। जिले की नहरें रोस्टर के मुताबिक चल रही हैं। जिनमें पानी नहीं है, उनमें अगले सप्ताह रोस्टर के तहत पानी आ जाएगा।
दिनेश मिश्र, अधिशासी अभियंता, सिंचाई विभाग
खराब नलकूपों को ठीक कराने का प्रयास किया जा रहा है। तीन डिवीजन का प्रभार होने के कारण जिले में समय कम दे पाता हूं। नलकूपों का केंद्रीय कार्यालय इलाहाबाद में है। खराब नलकूपों को ठीक होने में समय लगता है। मेरा प्रयास है कि जो खराब नलकूप हैं उन्हें जल्द ठीक कराया जाए।
रामलखन, एसडीओ, राजकीय नलकूप विभाग