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बीएसएनएल: 75 कर्मचारियों को वीआरएस, मोबाइल सेवा का बुरा हाल
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bsnl
दूरसंचार विभाग में 75 कर्मचारियों के वीआरएस के बाद बीएसएनएल की संचार सेवा पूरी तरह से चरमरा गई है। विभाग के पास अब महज 40 कर्मचारी ही बचे हैं। इनमें से कुछ आफिस का काम देख रहे हैं तो कुछ लोगों को एक्सचेंज की जिम्मेदारी दी गई है। ऐसे में उपभोक्ताओं की मुसीबत बढ़ गई है। बीएसएनएल की मोबाइल सेवा का बुरा हाल है तो ब्राडबैंड भी ठीक से काम नहीं कर रहा है।
उपभोक्ताओं को बेहतर संचार सेवा देने का दावा करने वाला दूरसंचार विभाग पहले से ही कर्मचारियों का रोना रो रहा था। दो से तीन हजार रुपये में गार्ड को रखकर उनसे काम चलाया जा रहा था। एक माह पहले जिले में तैनात बीएसएनएल के जेई मुन्नालाल, जेटीओ एलके मौर्य, कैशियर एसएन द्विवेद्वी और एकाउंटेंट आफिसर एके शुक्ला समेत 75 कर्मचारियों को विभाग से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। सभी को वीआरएस दे दिया गया।
एक साथ इतने कर्मचारियों के विभाग से हटाए जाने के कारण अब जिले में संचार की व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है। कभी ब्राडबैंड काम नहीं करता है तो कभी मोबाइल से नेटवर्क गुल हो जाता है। बात करते-करते उपभोक्ताओं का फोन कट जाता है। फोरजी इंटरनेट सेवा देने का दावा करने वाला बीएसएनएल अपने उपभोक्ताओं को टूजी का नेटवर्क भी नहीं उपलब्ध करा पा रहा है। इसके चलते उपभोक्ता अब बीएसएनएल से किनारा काटकर प्राइवेट कंपनियों का सहारा ले रहे हैं।
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35 कर्मचारियों के भरोसे जिले की संचार व्यवस्था
बीएसएनएल में अब केवल 35 कर्मचारी बचे हैं। इनसे लाइन में आने वाली फाल्ट के साथ ग्रामीणांचल में लगे टॉवर और आफिस का काम लिया जा रहा है। काम अधिक होने से विभाग में तैनात कर्मचारी परेशान हो रहे हैं।
तीन एसडीओ, और तीन जेई के भरोसे विभाग
बीएसएनएल तीन जेई और तीन एसडीओ के भरोसे जिले के लोगों को बेहतर संचार व्यवस्था मुहैया कराने का प्रयास कर रहा है। मगर कर्मचारियों की कमी के चलते उसकी सारी कवायद पर पानी फिर जा रहा है। इस मामले में टीडीएम राघवेंद्र कुमार से बात करने का प्रयास किया गया तो उन्होंने कहा कि मैं इस समय बाहर हूं, इसलिए किसी प्रकार की जानकारी नहीं दे सकता हूं।
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उपभोक्ताओं को बेहतर संचार सेवा देने का दावा करने वाला दूरसंचार विभाग पहले से ही कर्मचारियों का रोना रो रहा था। दो से तीन हजार रुपये में गार्ड को रखकर उनसे काम चलाया जा रहा था। एक माह पहले जिले में तैनात बीएसएनएल के जेई मुन्नालाल, जेटीओ एलके मौर्य, कैशियर एसएन द्विवेद्वी और एकाउंटेंट आफिसर एके शुक्ला समेत 75 कर्मचारियों को विभाग से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। सभी को वीआरएस दे दिया गया।
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एक साथ इतने कर्मचारियों के विभाग से हटाए जाने के कारण अब जिले में संचार की व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है। कभी ब्राडबैंड काम नहीं करता है तो कभी मोबाइल से नेटवर्क गुल हो जाता है। बात करते-करते उपभोक्ताओं का फोन कट जाता है। फोरजी इंटरनेट सेवा देने का दावा करने वाला बीएसएनएल अपने उपभोक्ताओं को टूजी का नेटवर्क भी नहीं उपलब्ध करा पा रहा है। इसके चलते उपभोक्ता अब बीएसएनएल से किनारा काटकर प्राइवेट कंपनियों का सहारा ले रहे हैं।
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35 कर्मचारियों के भरोसे जिले की संचार व्यवस्था
बीएसएनएल में अब केवल 35 कर्मचारी बचे हैं। इनसे लाइन में आने वाली फाल्ट के साथ ग्रामीणांचल में लगे टॉवर और आफिस का काम लिया जा रहा है। काम अधिक होने से विभाग में तैनात कर्मचारी परेशान हो रहे हैं।
तीन एसडीओ, और तीन जेई के भरोसे विभाग
बीएसएनएल तीन जेई और तीन एसडीओ के भरोसे जिले के लोगों को बेहतर संचार व्यवस्था मुहैया कराने का प्रयास कर रहा है। मगर कर्मचारियों की कमी के चलते उसकी सारी कवायद पर पानी फिर जा रहा है। इस मामले में टीडीएम राघवेंद्र कुमार से बात करने का प्रयास किया गया तो उन्होंने कहा कि मैं इस समय बाहर हूं, इसलिए किसी प्रकार की जानकारी नहीं दे सकता हूं।