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ितना इंतजार, 30 साल से अटका सीमा विस्तार
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
Updated Sun, 18 Sep 2016 11:51 PM IST
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स्मार्ट सिटी में लटके तार
- फोटो : अमर उजाला
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शहर में हर साल सैकड़ों नई दुकानें खुल रही हैं। लगातार आबादी बढ़ रही है। कदम कदम पर नए-नए माॅल खुल गए। आलीशान हवेलियां तन रही हैं। इसके बाद भी शहर का दायरा पिछले 30 सालों से ज्यों का त्यों है। जिला प्रशासन ने एक बार शहरी सीमा के विस्तार का प्रस्ताव भेजा भी तो शासन ने उसे पुराना बताते हुए इसे नए सिरे से बनाने की बात कहकर वापस भेज दिया। तब से मामला लटका पड़ा है। इसके चलते लाखों लोगों को बुनियादी सुविधाएं भी मयस्सर नहीं हैं।
नगर पालिका परिषद का सीमा विस्तार लगभग तीस साल पहले हुआ था। जिसमे रेलवे लाइन के पूर्वी क्षेत्र को शामिल किया गया था। महुली, पठखौली, अचलपुर को नगर क्षेत्र में शामिल कर लिया गया, लेकिन भंगवाचुंगी से सटे करनपुर, पूरे पितई, सगरा, भुलियापुर, दहिलामऊ को शहरी क्षेत्र में शामिल नहीं किया गया। वर्ष 1995 में शासन के आदेश पर परिसीमन कराया गया। जिससे नगर पालिका के वार्डो की संख्या 18 से बढ़कर 25 पहुंच गई। जिसमे पूर्वी सहोदरपुर, भैरोपुर, दहिलामऊ, चिलबिला, अस्पताल वार्ड सात नए वार्डों का गठन हुआ। जबकि इन क्षेत्रों से लगी बस्तियां भी शहर की सुविधाओं का लाभ ले रही थीं।
इसके बावजूद इन गांवों को शहर में शामिल करने के लिए कोई प्रयास नहीं किया गया। इन तीस सालों में शहर की आबादी भी बढ़ी, दुकानें भी खूब खुलीं। व्यवसाय भी लोगों का फला फूला। हवेलियां भी तनती रहीं। नए शापिंग माल, होटलों के साथ ही लजीज व्यंजन वाले रेस्टोरेंट भी खुले। तीस साल पहले शहर की आबादी करीब 35 हजार के करीब थी। मौजूदा समय में शहर की आबादी दोगुनी 76750 पहुंच गई है। लेकिन अभी भी पूरब से लेकर पश्चिम तक और दक्षिण से लेकर उत्तर तक पूरा शहर दस किमी की परिधि में सिमटा हुआ है। शहर के दायरे को बढ़ाने के लिए प्रयास का दावा भले किया जाता रहा है, लेकिन हकीकत शहर की जनता जानती है। शहरियों के फायदे को दरकिनार करते हुए जिम्मेदारों ने अपनी मनमानी की।
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इन इन गांवों को किया गया है शामिलः
नगर पालिका क्षेत्र की सीमा से लगे गांवों को शहर में शामिल करने के लिए जो मसौदा नगर पालिका ने तैयार किया है उसमे 11 गांव शामिल हैं। इनमें किशुनदासपुर, कादीपुर, महुली डंडवा, भंगवा, करनपुर, देवकली, सगरा, दहिलामऊ, जोगापुर, गोपालापुर आंशिक, और रूपापुर, टेऊंगा आंशिक गांव के नाम शामिल हैं। इन गांवों को शामिल करने के बाद शहर का दायरा 17 से बीस किमी के परिधि में बढ़ जाएगा। यहां के लोगों को शहर की सुविधाएं मिलने लगेंगी।
बोर्ड बैठक के प्रस्ताव को लेकर अटका मामला
नगर पालिका के सीमा विस्तार में कभी आबादी तो कभी जनगणना बाधक बनी। मौजूदा समय में बोर्ड की बैठक से प्रस्ताव न भेजने के कारण सीमा विस्तार अटका हुआ है। पुराने भेजे गए प्रस्ताव को शासन ने वापस कर दिया है। ये वर्ष 2009 में बोर्ड की बैठक में पास किया था। नगर पालिका सूत्रों की मानें तो जनगणना का कार्य 2015 में जाकर फाइनल हुआ। नई जनगणना में शहर की आबादी 76750 है। शासन से फाइल लौटाने के बाद गत दिनों नगर पालिका बोर्ड की बैठक आहूत की गई थी। जिसके एजेंडे में सीमा विस्तार का भी मामला रखा गया था। जिस दिन बैठक थी। उसी दिन चेयरमैन के पिता का निधन हो गया। इसकी वजह से बोर्ड की बैठक स्थगित कर दी गई। संभावना है कि जल्द ही प्रकरण को लेकर बैठक बुलाई जा सकती है।
राजस्व का भी हो रहा नुकसान
शहरी सीमा का विस्तार न होने से न सिर्फ लोगों को मूलभूत सुविधाएं न मिलने का दंश झेलना पड़ रहा है बल्कि इससे शासन को राजस्व का भ्ाी नुकसान उठाना पड़ रहा है। शहरी सीमा के विस्तार की दशा में सुविधाओं के एवज में नागरिकों से तमाम तरह के कर भ्ाी वसूले जा सकेंगे जिससे शासन की आमदनी होगी।
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नगर पालिका परिषद का सीमा विस्तार लगभग तीस साल पहले हुआ था। जिसमे रेलवे लाइन के पूर्वी क्षेत्र को शामिल किया गया था। महुली, पठखौली, अचलपुर को नगर क्षेत्र में शामिल कर लिया गया, लेकिन भंगवाचुंगी से सटे करनपुर, पूरे पितई, सगरा, भुलियापुर, दहिलामऊ को शहरी क्षेत्र में शामिल नहीं किया गया। वर्ष 1995 में शासन के आदेश पर परिसीमन कराया गया। जिससे नगर पालिका के वार्डो की संख्या 18 से बढ़कर 25 पहुंच गई। जिसमे पूर्वी सहोदरपुर, भैरोपुर, दहिलामऊ, चिलबिला, अस्पताल वार्ड सात नए वार्डों का गठन हुआ। जबकि इन क्षेत्रों से लगी बस्तियां भी शहर की सुविधाओं का लाभ ले रही थीं।
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इसके बावजूद इन गांवों को शहर में शामिल करने के लिए कोई प्रयास नहीं किया गया। इन तीस सालों में शहर की आबादी भी बढ़ी, दुकानें भी खूब खुलीं। व्यवसाय भी लोगों का फला फूला। हवेलियां भी तनती रहीं। नए शापिंग माल, होटलों के साथ ही लजीज व्यंजन वाले रेस्टोरेंट भी खुले। तीस साल पहले शहर की आबादी करीब 35 हजार के करीब थी। मौजूदा समय में शहर की आबादी दोगुनी 76750 पहुंच गई है। लेकिन अभी भी पूरब से लेकर पश्चिम तक और दक्षिण से लेकर उत्तर तक पूरा शहर दस किमी की परिधि में सिमटा हुआ है। शहर के दायरे को बढ़ाने के लिए प्रयास का दावा भले किया जाता रहा है, लेकिन हकीकत शहर की जनता जानती है। शहरियों के फायदे को दरकिनार करते हुए जिम्मेदारों ने अपनी मनमानी की।
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इन इन गांवों को किया गया है शामिलः
नगर पालिका क्षेत्र की सीमा से लगे गांवों को शहर में शामिल करने के लिए जो मसौदा नगर पालिका ने तैयार किया है उसमे 11 गांव शामिल हैं। इनमें किशुनदासपुर, कादीपुर, महुली डंडवा, भंगवा, करनपुर, देवकली, सगरा, दहिलामऊ, जोगापुर, गोपालापुर आंशिक, और रूपापुर, टेऊंगा आंशिक गांव के नाम शामिल हैं। इन गांवों को शामिल करने के बाद शहर का दायरा 17 से बीस किमी के परिधि में बढ़ जाएगा। यहां के लोगों को शहर की सुविधाएं मिलने लगेंगी।
बोर्ड बैठक के प्रस्ताव को लेकर अटका मामला
नगर पालिका के सीमा विस्तार में कभी आबादी तो कभी जनगणना बाधक बनी। मौजूदा समय में बोर्ड की बैठक से प्रस्ताव न भेजने के कारण सीमा विस्तार अटका हुआ है। पुराने भेजे गए प्रस्ताव को शासन ने वापस कर दिया है। ये वर्ष 2009 में बोर्ड की बैठक में पास किया था। नगर पालिका सूत्रों की मानें तो जनगणना का कार्य 2015 में जाकर फाइनल हुआ। नई जनगणना में शहर की आबादी 76750 है। शासन से फाइल लौटाने के बाद गत दिनों नगर पालिका बोर्ड की बैठक आहूत की गई थी। जिसके एजेंडे में सीमा विस्तार का भी मामला रखा गया था। जिस दिन बैठक थी। उसी दिन चेयरमैन के पिता का निधन हो गया। इसकी वजह से बोर्ड की बैठक स्थगित कर दी गई। संभावना है कि जल्द ही प्रकरण को लेकर बैठक बुलाई जा सकती है।
राजस्व का भी हो रहा नुकसान
शहरी सीमा का विस्तार न होने से न सिर्फ लोगों को मूलभूत सुविधाएं न मिलने का दंश झेलना पड़ रहा है बल्कि इससे शासन को राजस्व का भ्ाी नुकसान उठाना पड़ रहा है। शहरी सीमा के विस्तार की दशा में सुविधाओं के एवज में नागरिकों से तमाम तरह के कर भ्ाी वसूले जा सकेंगे जिससे शासन की आमदनी होगी।