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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Pratapgarh News ›   Billboards and wiping and spending 2.45 crores

होर्डिंग न वॉलपेंटिंग और खर्च हो गए 2.45 करोड़

Wed, 06 Jun 2018 12:13 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़ Updated Wed, 06 Jun 2018 12:13 AM IST
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स्वच्छ भारत मिशन योजना के प्रचार और प्रसार के लिए शहर और ग्रामीण इलाकों में न तो होर्डिंग और न ही वॉलपेंटिंग देखने को मिलेगी, लेकिन इसके बावजूद 2.45 करोड़ रुपये सिर्फ प्रचार-प्रसार में खर्च हो गए। स्वच्छता अभियान का प्रचार ठीक ढंग से नहीं होने का परिणाम यह रहा कि अभी तक मात्र 378 गांव ही ओडीएफ हुए हैं। जबकि जिले को ओडीएफ करने के  लिए दो अक्तूबर 2018 का लक्ष्य दिया गया है।
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मोदी सरकार की महत्वपूर्ण योजना स्वच्छ भारत मिशन अफसरों की लापरवाही के चलते दम तोड़ती नजर आ रही है। शौचालय बनाने के लिए लाभार्थियों को 12 हजार रुपये अनुदान देने के बाद भी निर्माण नहीं हो पा रहा है। इसकी प्रमुख वजह यह है कि ग्राम पंचायतों को जो धनराशि दी जा रही है, उसका सही ढंग से सदुपयोग नहीं हो पा रहा है। दरअसल, ग्रामीण इलाकों में शौचालय बनवाने और स्वच्छता को लेकर जागरूकता अभियान उस तरह नहीं चलाया गया, जिस प्रकार उसे पेश करने की आवश्यकता है।
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प्रचार-प्रसार के नाम पर बीते वित्तीय वर्ष में 2.45 करोड़ का भुगतान तो कर लिया गया है, मगर शहर से गांव तक एक भी न तो होर्डिंग देखने को मिलेगी, और न ही कहीं वाल राइटिंग हुई है। बैनर और पोस्टर की बात तो दूर रही। आलम यह है कि एक ब्लॉक में एक बैनर तैयार किया गया है, जब गांव में गौरव यात्रा निकालनी होती है, तो बैनर में ग्राम पंचायत वाले स्थान पर सादा कागज लगाकर स्केच से गांव का नाम लिख दिया जाता है। वास्तव में प्रचार-प्रसार नहीं होने के कारण गांव के लोग स्वच्छता अभियान की ओर उन्मुख नहीं हुए हैं, इससे यह अभियान दम तोड़ता नजर आ रहा है। अभी तक 378 गांव ओडीएफ हुए हैं, जबकि दो अक्तूबर तक जिले को ओडीएफ करना है।
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80 ग्राम पंचायतों ने दबा रखे हैं करोड़ों रुपये
जिले की 80 ग्राम पंचायतें ऐसी हैं, जिन्हें शौचालय बनाने के लिए धनराशि तो दी गई, मगर अभी तक रुपये का सदुपयोग नहीं कर पाई हैं। सीडीओ ने ऐसे ग्राम प्रधानों और सचिवों को नोटिस देने के साथ ही बीडीओ से उपभोग कराने का निर्देश दिया है।

प्रतिमाह लाखों रुपये का उड़ रहा डीजल
गांव को ओडीएफ करने में प्रतिमाह लाखों रुपये का डीजल उड़ जा रहा है। जिला समन्वयकों और ब्लॉक समन्वयकों को वाहन मिला हुआ है। यह लोग गांव में गौरव यात्रा निकालने और प्रचार-प्रसार करने के बजाय घूम-घूमकर निमंत्रण खा रहे हैं और रिश्तेदारी घूम रहे हैं। अधिकारियों को फुर्सत ही नहीं है, कि वास्तविकता देख सकें।


प्रचार और प्रसार के लिए जो धनराशि आई थी, उसका सदुपयोग किया गया है। होर्डिंग के साथ ही वॉलराइटिंग कराई जा रही है। दो अक्तूबर 2018 तक जिले को ओडीएफ करने का प्रयास जारी है।
शशिकांत पांडेय, डीपीआरओ।
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