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Pratapgarh News: राजा बेल के नाम से प्रसिद्ध हुआ बाबा बेलखरनाथ धाम
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पौराणिक शिवालयों में बाबा बेलखरनाथ धाम भी एक प्रमुख मंदिर है। राजा बेल के शासन में भगवान राम ने वनगमन के दौरान मंदिर की स्थापना की थी। राजा बेल के नाम से प्रसिद्ध बाबा बेलखरनाथ धाम शिव भक्तों की आस्था का केंद्र है।
सावन मास शुरू होते ही भक्तों की भीड़ बाबा धाम पर उमड़ना शुरू हो गई है। सोमवार को करीब दस हजार कांवडिये जलाभिषेक करेंगे। जिला मुख्यालय से करीब 15 किमी दूर बेलखरनाथ धाम अपनी पौराणिक और ऐतिहासिक कहानियों के लिए विख्यात है। मंदिर परिसर में शिवलिंग के अलावा रामजानकी मंदिर, विश्वकर्मा मंदिर के साथ राम भक्त हनुमान की मंदिर भी स्थित है।
धाम के पुजारी बद्रीनाथ गिरि ने बताया कि मंदिर परिसर में सराय और धर्मशाला भी बना हुआ है। वर्ष 1916 में छपी पुस्तक वत्स गोत्र चौहाल की वंशावली में गोपाल कवि ने उल्लेख किया है कि बेल राजा के शासन काल में भगवान श्रीराम ने वनवास जाते समय शिवलिंग की स्थापना की थी। उन्होंने बताया कालांतर में राजा दिलीपपुर ने खोज कराकर यहां एक छप्पर रखवाया।
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शिव हर्ष ओझा महज 28 वर्ष की आयु में आश्रम बनाकर रहने लगे। ब्रह्मचारी ने अचला सप्तमी के दिन अपनी मां सिरता के हाथों ईंट रखवा कर मंदिर का नींव पूजन करवाया। उसके बाद से पट्टी तहसील क्षेत्र के यहियापुर में स्थित बाबा बेलखरनाथ धाम भक्तों की आस्था केंद्र बन गया। महाशिवरात्रि के साथ सावन मास के अतिरिक्त सोमवार और शनिवार को मेले का आयोजन किया जाता है।
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सावन मास शुरू होते ही भक्तों की भीड़ बाबा धाम पर उमड़ना शुरू हो गई है। सोमवार को करीब दस हजार कांवडिये जलाभिषेक करेंगे। जिला मुख्यालय से करीब 15 किमी दूर बेलखरनाथ धाम अपनी पौराणिक और ऐतिहासिक कहानियों के लिए विख्यात है। मंदिर परिसर में शिवलिंग के अलावा रामजानकी मंदिर, विश्वकर्मा मंदिर के साथ राम भक्त हनुमान की मंदिर भी स्थित है।
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धाम के पुजारी बद्रीनाथ गिरि ने बताया कि मंदिर परिसर में सराय और धर्मशाला भी बना हुआ है। वर्ष 1916 में छपी पुस्तक वत्स गोत्र चौहाल की वंशावली में गोपाल कवि ने उल्लेख किया है कि बेल राजा के शासन काल में भगवान श्रीराम ने वनवास जाते समय शिवलिंग की स्थापना की थी। उन्होंने बताया कालांतर में राजा दिलीपपुर ने खोज कराकर यहां एक छप्पर रखवाया।
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शिव हर्ष ओझा महज 28 वर्ष की आयु में आश्रम बनाकर रहने लगे। ब्रह्मचारी ने अचला सप्तमी के दिन अपनी मां सिरता के हाथों ईंट रखवा कर मंदिर का नींव पूजन करवाया। उसके बाद से पट्टी तहसील क्षेत्र के यहियापुर में स्थित बाबा बेलखरनाथ धाम भक्तों की आस्था केंद्र बन गया। महाशिवरात्रि के साथ सावन मास के अतिरिक्त सोमवार और शनिवार को मेले का आयोजन किया जाता है।