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चुनाव बाद कोरोना बेकाबू, हर दिन मिल रहे औसतन 300 मरीज
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प्रतापगढ़। पंचायत चुनाव के बाद जिले में कोरोना का संक्रमण तेजी से बढ़ा है। माना जा रहा है कि चुनाव से पहले प्रचार-प्रसार के दौरान गांवों और कस्बों में कोरोना गाइड लाइन का पालन न करने से संक्रमण ने पांव पसार लिया। 19 अप्रैल को मतदान से पहले हर दिन औसतन 100 मरीज मिल रहे थे। चुनाव खत्म होने के बाद बीते एक सप्ताह से हर दिन औसतन 300 मरीज मिल रहे हैं। यह स्थिति तब है जब स्वास्थ्य विभाग ठीक से जांच नहीं कर पा रहा है।
वैसे तो जनपद में अप्रैल की शुरुआत से ही कोरोना रफ्तार पकड़ने लगा था। तब पंचायत चुनाव का शुरुआती दौर था। नामांकन पत्र खरीदने, चालान बनवाने, फार्म जमा करने और नाम वापसी के दौरान उमड़ने वाली भीड़ ने सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां उड़ाकर रख दीं। लोग मास्क भी नहीं लगा रहे थे। चुनाव प्रचार के दौरान भी कोविड गाइड का उल्लंघन किया गया। संक्रमण का ग्राफ बढ़ने के बाद भी लोग लापरवाही बरतते रहे। चुनाव से पहले महाराष्ट्र और गुजरात से भी बड़ी संख्या में प्रवासी आए। बिना जांच कराए ही वह गांवों में घूम-घूमकर चुनाव प्रचार करते रहे। चुनाव के दौरान बरती गई यह लापरवाही अब भारी पड़ने लगी है। कोरोना का संक्रमण ग्रामीण क्षेत्रों में तेजी से बढ़ा है। एक से 21 अप्रैल तक जिले में कोरोना के 653 मरीज मिले थे, जबकि 22 से 26 अप्रैल के बीच 1463 केस सामने आए हैं। हर दिन औसतन चार मौतें हो रही हैं। दूसरी ओर, दो मई को पंचायत चुनाव की मतगणना होनी है। इसमें ब्लाकों से जिला मुख्यालय तक भीड़ उमड़ेगी। ऐसे में फिर संक्रमण बढ़ने से इनकार नहीं किया जा सकता है। स्वास्थ्य विभाग भी मान रहा है कि मतगणना के दौरान भीड़ जुटने से हालात और भी बिगड़ेंगे। लोग एक दूसरे के संपर्क में आएंगे। जिससे कोरोना संक्रमण का फैलाव होगा। यह लोगों की जिंदगी के लिए घातक होगा।
22 अप्रैल के बाद ऐसे बढ़े मरीज
दिनांक नए मरीज
22 अप्रैल 278
23 अप्रैल 27
24 अप्रैल 456
25 अप्रैल 90
26 अप्रैल 554
27 अप्रैल 259
घर-घर बुखार, स्वास्थ्य विभाग भी लाचार
प्रतापगढ़। जिले में बुखार भयानक रूप लेता जा रहा है। जिसे देखो वही बुखार से पीड़ित है। बुखार की चपेट में आने वाले लोगों की मौत भी हो रही हैं। पिछले एक सप्ताह से यह बुखार जानलेवा बन चुका है। घर-घर लोग बुखार से पीड़ित हैं। गौर करने वाली बात यह है कि बुखार वाले मरीज जांच में निगेटिव आ रहे हैं।
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शहर से गांव तक बुखार के मरीज देखने को मिल रहे हैं। सरकारी, प्राइवेट और झोलाछापों की दुकान पर सुबह से देर रात तक बुखार से पीड़ित लोगों की भीड़ लगी हुई है। जिला अस्पताल के सीनियर फिजीशियन डा. मनोज खत्री का कहना है कि शरीर में वायरस के प्रवेश के दो चार दिनों में लक्षण प्रकट होता है। तेज बुखार 103 डिग्री तक हो सकता है, मगर यह दो दिन से ज्यादा नहीं टिकता। उन्होंने बताया कि इस बुखार में जोड़ों में दर्द होता है। पैरों के जोड़ों से शुरू होने वाला दर्द कंधे तक पहुंच जाता है। आमतौर में डेंगू में तेज बदन दर्द होता है। मरीज की प्लेटलेट्स गिरती है, वहीं चिकनगुनिया में ऐसा नहीं होता। कोरोना की जांच में ऐसे अधिकांश लोग निगेटिव भी आते हैं। जिला अस्पताल के फिजीशियन अनुज चौरसिया कहते हैं कि वर्तमान में शुगर, हृदयरोगी और अधिक उम्र के लोग हाईरिस्क जोन में हैं। दो दिनों तक तेज दर्द रहने के दौरान कई बार वृद्ध मरीजों की हालत बिगड़ जा रही है।
ऐसे करना होगा बचाव
- जलभराव, गंदगी एवं मच्छरों वाली बस्तियों से दूरी बनाएं
- उबला हुआ पानी मिट्टी के बर्तन में रखकर पीएं।
- स्वयं अपना उपचार न करें, चिकित्सक की सलाह लें
- बुखार आने पर अधिक गरम स्थान पर न लेटें
- तेज बुखार होने पर माथे पर ठंडे पानी से भीगी पट्टी रखें
- मच्छर से बचने के लिए पूरी बांह के कपड़े पहने
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वैसे तो जनपद में अप्रैल की शुरुआत से ही कोरोना रफ्तार पकड़ने लगा था। तब पंचायत चुनाव का शुरुआती दौर था। नामांकन पत्र खरीदने, चालान बनवाने, फार्म जमा करने और नाम वापसी के दौरान उमड़ने वाली भीड़ ने सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां उड़ाकर रख दीं। लोग मास्क भी नहीं लगा रहे थे। चुनाव प्रचार के दौरान भी कोविड गाइड का उल्लंघन किया गया। संक्रमण का ग्राफ बढ़ने के बाद भी लोग लापरवाही बरतते रहे। चुनाव से पहले महाराष्ट्र और गुजरात से भी बड़ी संख्या में प्रवासी आए। बिना जांच कराए ही वह गांवों में घूम-घूमकर चुनाव प्रचार करते रहे। चुनाव के दौरान बरती गई यह लापरवाही अब भारी पड़ने लगी है। कोरोना का संक्रमण ग्रामीण क्षेत्रों में तेजी से बढ़ा है। एक से 21 अप्रैल तक जिले में कोरोना के 653 मरीज मिले थे, जबकि 22 से 26 अप्रैल के बीच 1463 केस सामने आए हैं। हर दिन औसतन चार मौतें हो रही हैं। दूसरी ओर, दो मई को पंचायत चुनाव की मतगणना होनी है। इसमें ब्लाकों से जिला मुख्यालय तक भीड़ उमड़ेगी। ऐसे में फिर संक्रमण बढ़ने से इनकार नहीं किया जा सकता है। स्वास्थ्य विभाग भी मान रहा है कि मतगणना के दौरान भीड़ जुटने से हालात और भी बिगड़ेंगे। लोग एक दूसरे के संपर्क में आएंगे। जिससे कोरोना संक्रमण का फैलाव होगा। यह लोगों की जिंदगी के लिए घातक होगा।
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22 अप्रैल के बाद ऐसे बढ़े मरीज
दिनांक नए मरीज
22 अप्रैल 278
23 अप्रैल 27
24 अप्रैल 456
25 अप्रैल 90
26 अप्रैल 554
27 अप्रैल 259
घर-घर बुखार, स्वास्थ्य विभाग भी लाचार
प्रतापगढ़। जिले में बुखार भयानक रूप लेता जा रहा है। जिसे देखो वही बुखार से पीड़ित है। बुखार की चपेट में आने वाले लोगों की मौत भी हो रही हैं। पिछले एक सप्ताह से यह बुखार जानलेवा बन चुका है। घर-घर लोग बुखार से पीड़ित हैं। गौर करने वाली बात यह है कि बुखार वाले मरीज जांच में निगेटिव आ रहे हैं।
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शहर से गांव तक बुखार के मरीज देखने को मिल रहे हैं। सरकारी, प्राइवेट और झोलाछापों की दुकान पर सुबह से देर रात तक बुखार से पीड़ित लोगों की भीड़ लगी हुई है। जिला अस्पताल के सीनियर फिजीशियन डा. मनोज खत्री का कहना है कि शरीर में वायरस के प्रवेश के दो चार दिनों में लक्षण प्रकट होता है। तेज बुखार 103 डिग्री तक हो सकता है, मगर यह दो दिन से ज्यादा नहीं टिकता। उन्होंने बताया कि इस बुखार में जोड़ों में दर्द होता है। पैरों के जोड़ों से शुरू होने वाला दर्द कंधे तक पहुंच जाता है। आमतौर में डेंगू में तेज बदन दर्द होता है। मरीज की प्लेटलेट्स गिरती है, वहीं चिकनगुनिया में ऐसा नहीं होता। कोरोना की जांच में ऐसे अधिकांश लोग निगेटिव भी आते हैं। जिला अस्पताल के फिजीशियन अनुज चौरसिया कहते हैं कि वर्तमान में शुगर, हृदयरोगी और अधिक उम्र के लोग हाईरिस्क जोन में हैं। दो दिनों तक तेज दर्द रहने के दौरान कई बार वृद्ध मरीजों की हालत बिगड़ जा रही है।
ऐसे करना होगा बचाव
- जलभराव, गंदगी एवं मच्छरों वाली बस्तियों से दूरी बनाएं
- उबला हुआ पानी मिट्टी के बर्तन में रखकर पीएं।
- स्वयं अपना उपचार न करें, चिकित्सक की सलाह लें
- बुखार आने पर अधिक गरम स्थान पर न लेटें
- तेज बुखार होने पर माथे पर ठंडे पानी से भीगी पट्टी रखें
- मच्छर से बचने के लिए पूरी बांह के कपड़े पहने