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पहले टिकट दिया, फिर नामांकन से रोका, फूटा आक्रोश तो फूंका सपा का झंडा
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प्रतापगढ़। जिले की विश्वनाथगंज विधानसभा सीट से सपा के प्रत्याशी को लेकर खूब सियासी ड्रामा हुआ। इस सीट से सपा ने सौरभ सिंह को प्रत्याशी घोषित किया था और उन्होंने नामांकन भी कर दिया। इसके बाद सोमवार रात तेजी से सियासी घटनाक्रम बदला। सपा ने पूर्व मंत्री स्व. राजाराम के बेटे संजय पांडेय को लखनऊ बुलाकर सिंबल देकर नामांकन के लिए अनुमति दे दी। मंगलवार को नामांकन के लिए निकलते समय अचानक पार्टी कार्यालय से फोन कर उन्हें रोक दिया गया। इसकी जानकारी होने पर संजय पांडेय रोने लगे। जिसके बाद समर्थक आक्रोशित हो उठे। उन्होंने सपा मुखिया अखिलेश की होर्डिंग्स तोड़ते हुए मुर्दाबाद के नारे लगाए। सपा के झंडे और टोपियां फूंककर विरोध जताया। समर्थकों की जिद पर संजय पांडेय ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में अपना नामांकन दाखिल किया।
विधानसभा चुनाव का बिगुल बजने के बाद से ही विश्वनाथगंज विधानसभा सीट पर सपा में टिकट के लिए प्रत्याशियों के बीच घमासान मचा था। काफी जद्दोजहद के बाद सपा ने यहां से सौरभ सिंह को प्रत्याशी बनाया। उन्होंने सोमवार को अपना नामांकन भी दाखिल कर दिया, मगर शाम को पार्टी नेतृत्व की ओर से पूर्व मंत्री स्व. राजाराम पांडेय के बेटे संजय पांडेय को लखनऊ बुलाया गया। वहां उन्हें पार्टी का सिंबल देते हुए सपा मुखिया अखिलेश यादव ने नामांकन करने के लिए कहा। सपा मुखिया की अनुमति मिलने के बाद संजय पांडेय ने अपने समर्थकों को शहर के मीराभवन स्थित कार्यालय पर बुला लिया था। मंगलवार सुबह से ही उनके कार्यालय पर समर्थकों की भीड़ जुटी थी। संजय पांडेय अपने करीबियों व समर्थकों के साथ नामांकन के लिए निकलने की तैयारी कर रहे थे। तभी सपा के प्रांतीय कार्यालय से आए एक फोन से हड़कंप मच गया। उन्हें नामांकन करने से रोक दिया गया।
इसके बाद कुछ देर तक संजय पांडेय की आवाज थम गई। हिम्मत कर वह अपनी कार तक पहुंचे। हालांकि तब तक समर्थकों को जानकारी हो चुकी थी। वे आक्रोशित हो उठे। इस बीच संजय पांडेय समर्थकों को समझाने का प्रयास करते रहे, मगर कोई सुनने वाला नहीं था। समर्थकों से संवाद के दौरान वह रो पड़े। गुस्साए समर्थकों ने सपा की टोपियां व झंडे निकालकर फेंक दिए। कार्यालय में लगी सपा मुखिया अखिलेश यादव की तस्वीर तोड़ डाली। इतने पर भी लोगों को गुस्सा नहीं थमा। वे अखिलेश यादव के खिलाफ मुर्दाबाद के नारे लगाते हुए संजय पांडेय को निर्दल प्रत्याशी के तौर पर नामांकन करने के लिए कहने लगे। सूचना मिलने के बाद पुलिस बल भी मौके पर पहुंचा। तब जाकर समर्थक शांत हुए। समर्थकों की जिद के आगे मजबूर संजय पांडेय पैदल ही उनके साथ नामांकन स्थल की ओर चल पड़े। निर्दल प्रत्याशी के रूप में उन्होंने विश्वनाथगंज विधानसभा से नामांकन पत्र दाखिल किया।
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सपा का सक्रिय सदस्य, जनता के दबाव में किया नामांकन
विश्वनाथगंज विधानसभा से निर्दल प्रत्याशी के रूप में नामांकन करने वाले संजय पांडेय ने पर्चा भरने के बाद कहा कि वह सपा के सक्रिय सदस्य हैं। आठ साल से पार्टी का झंडा बुलंद कर रहे हैं। अभी भी उन्हें सपा मुखिया पर भरोसा है। कुछ मजबूरियां जरूर रही होंगी। सोमवार को बुलाकर उन्होंने खुद बताया कि विश्वनाथगंज के सर्वे में वह सभी प्रत्याशियों पर भारी हैं। नामांकन करने से रोकने के पीछे कोई न कोई वजह जरूर होगी। वह जल्द ही उनसे मिलकर अपनी बात रखेंगे। यदि जनता कहेगी तो वह निर्दल प्रत्याशी के रूप में चुनावी मैदान में होंगे।
तो फिर बुलाकर नहीं देना था टिकट
सपा नेतृत्व के टिकट काटने पर संजय पांडेय के समर्थकों के अलावा सपा कार्यकर्ता व नेताओं ने भी बगावती तेवर अपना लिए हैं। उनका कहना है कि टिकट नहीं मिल रहा था तो संजय शांत होकर बैठ गए थे। उन्हें बुलाकर पहले टिकट दिया गया। बाद में टिकट काट दिया गया। यह गलत है। ऐसा पार्टी नेतृत्व को नहीं करना था।
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विधानसभा चुनाव का बिगुल बजने के बाद से ही विश्वनाथगंज विधानसभा सीट पर सपा में टिकट के लिए प्रत्याशियों के बीच घमासान मचा था। काफी जद्दोजहद के बाद सपा ने यहां से सौरभ सिंह को प्रत्याशी बनाया। उन्होंने सोमवार को अपना नामांकन भी दाखिल कर दिया, मगर शाम को पार्टी नेतृत्व की ओर से पूर्व मंत्री स्व. राजाराम पांडेय के बेटे संजय पांडेय को लखनऊ बुलाया गया। वहां उन्हें पार्टी का सिंबल देते हुए सपा मुखिया अखिलेश यादव ने नामांकन करने के लिए कहा। सपा मुखिया की अनुमति मिलने के बाद संजय पांडेय ने अपने समर्थकों को शहर के मीराभवन स्थित कार्यालय पर बुला लिया था। मंगलवार सुबह से ही उनके कार्यालय पर समर्थकों की भीड़ जुटी थी। संजय पांडेय अपने करीबियों व समर्थकों के साथ नामांकन के लिए निकलने की तैयारी कर रहे थे। तभी सपा के प्रांतीय कार्यालय से आए एक फोन से हड़कंप मच गया। उन्हें नामांकन करने से रोक दिया गया।
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इसके बाद कुछ देर तक संजय पांडेय की आवाज थम गई। हिम्मत कर वह अपनी कार तक पहुंचे। हालांकि तब तक समर्थकों को जानकारी हो चुकी थी। वे आक्रोशित हो उठे। इस बीच संजय पांडेय समर्थकों को समझाने का प्रयास करते रहे, मगर कोई सुनने वाला नहीं था। समर्थकों से संवाद के दौरान वह रो पड़े। गुस्साए समर्थकों ने सपा की टोपियां व झंडे निकालकर फेंक दिए। कार्यालय में लगी सपा मुखिया अखिलेश यादव की तस्वीर तोड़ डाली। इतने पर भी लोगों को गुस्सा नहीं थमा। वे अखिलेश यादव के खिलाफ मुर्दाबाद के नारे लगाते हुए संजय पांडेय को निर्दल प्रत्याशी के तौर पर नामांकन करने के लिए कहने लगे। सूचना मिलने के बाद पुलिस बल भी मौके पर पहुंचा। तब जाकर समर्थक शांत हुए। समर्थकों की जिद के आगे मजबूर संजय पांडेय पैदल ही उनके साथ नामांकन स्थल की ओर चल पड़े। निर्दल प्रत्याशी के रूप में उन्होंने विश्वनाथगंज विधानसभा से नामांकन पत्र दाखिल किया।
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सपा का सक्रिय सदस्य, जनता के दबाव में किया नामांकन
विश्वनाथगंज विधानसभा से निर्दल प्रत्याशी के रूप में नामांकन करने वाले संजय पांडेय ने पर्चा भरने के बाद कहा कि वह सपा के सक्रिय सदस्य हैं। आठ साल से पार्टी का झंडा बुलंद कर रहे हैं। अभी भी उन्हें सपा मुखिया पर भरोसा है। कुछ मजबूरियां जरूर रही होंगी। सोमवार को बुलाकर उन्होंने खुद बताया कि विश्वनाथगंज के सर्वे में वह सभी प्रत्याशियों पर भारी हैं। नामांकन करने से रोकने के पीछे कोई न कोई वजह जरूर होगी। वह जल्द ही उनसे मिलकर अपनी बात रखेंगे। यदि जनता कहेगी तो वह निर्दल प्रत्याशी के रूप में चुनावी मैदान में होंगे।
तो फिर बुलाकर नहीं देना था टिकट
सपा नेतृत्व के टिकट काटने पर संजय पांडेय के समर्थकों के अलावा सपा कार्यकर्ता व नेताओं ने भी बगावती तेवर अपना लिए हैं। उनका कहना है कि टिकट नहीं मिल रहा था तो संजय शांत होकर बैठ गए थे। उन्हें बुलाकर पहले टिकट दिया गया। बाद में टिकट काट दिया गया। यह गलत है। ऐसा पार्टी नेतृत्व को नहीं करना था।