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बरसाना की लट्ठमार होली में रंग जमा रहा अंतू का गुलाल
Tue, 03 Mar 2020 01:03 AM IST
विनोद सिंह
अमर उजाना ब्यूरा, न्यूज डेस्क, प्रतापगढ़
अमर उजाना ब्यूरा, न्यूज डेस्क, प्रतापगढ़
Published by: विनोद सिंह
Updated Tue, 03 Mar 2020 01:03 AM IST
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अंतू में होली की तैयारी में अबीर गुलाल बनाते करोबारी।
- फोटो : pratapgarh
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मथुरा और बरसाना में होली की हुड़दंग शुरू है। फूल और गुलाल से होने वाली होली में जिले के अंतू इलाके में तैयार किया गया गुलाल भी खूब रंग जमा रहा है। अंतू में इस बार भी होली के लिए बड़े पैमाने पर गुलाल तैयार किया गया था। थोक विक्रेताओं के माध्यम से इसकी देशभर में आपूर्ति की गई। होली में चारों तरफ जमकर अंतू का गुलाल उड़ेगा।
जिले के टाउन एरिया अंतू में कामगार बड़े पैमाने पर अबीर-गुलाल तैयार करते हैं। स्थानीय लोग कानपुर से कच्चा माल लाकर गुलाल तैयार करते हैं और फिर विभिन्न रंगों में तैयार कर थोक विक्रेताओं तक पहुंचाते हैं। होली के दो माह पहले ही मथुरा और वृंदावन से आने वाले थोक विकेता खरीदते हैं और ट्रकों में भरकर ले जाते हैं।
दरअसल, अबीर और गुलाल बनाने के लिए किसी मशीन की जरूरत नहीं पड़ती है, बल्कि यह हाथ का कमाल होता है। कानपुर से आने वाला कच्चे माल के रूप में आरा रोट और केमिकल होता है। लाल, पीले, गुलाबी रंग में परिवर्तित करना और तेज धूप में सुखाकर गुलाल तैयार किया जाता है। यह काफी मेहनत का कार्य होता है। लंबे समय से अंतू के परिवार अबीर-गुलाल तैयार कर रहे हैं।
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लंबे समय से इस कार्य में लगे मक्खन लाल ने बताया कि होली के दो माह पहले बरसाना से लोग अबीर गुलाल खरीदने के लिए आते हैं। थोक विक्रेता कच्चा माल लाने के लिए रुपये देतेे हैं, मगर हम लोग नहीं लेते हैं। एडवांस में रुपये लेने से तैयार माल उन्हीं को देने के लिए विवश होना पड़ता है। खुद से तैयार किए गए गुलाल को बाजार भाव के हिसाब से बेचा जाता है।
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जिले के टाउन एरिया अंतू में कामगार बड़े पैमाने पर अबीर-गुलाल तैयार करते हैं। स्थानीय लोग कानपुर से कच्चा माल लाकर गुलाल तैयार करते हैं और फिर विभिन्न रंगों में तैयार कर थोक विक्रेताओं तक पहुंचाते हैं। होली के दो माह पहले ही मथुरा और वृंदावन से आने वाले थोक विकेता खरीदते हैं और ट्रकों में भरकर ले जाते हैं।
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दरअसल, अबीर और गुलाल बनाने के लिए किसी मशीन की जरूरत नहीं पड़ती है, बल्कि यह हाथ का कमाल होता है। कानपुर से आने वाला कच्चे माल के रूप में आरा रोट और केमिकल होता है। लाल, पीले, गुलाबी रंग में परिवर्तित करना और तेज धूप में सुखाकर गुलाल तैयार किया जाता है। यह काफी मेहनत का कार्य होता है। लंबे समय से अंतू के परिवार अबीर-गुलाल तैयार कर रहे हैं।
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लंबे समय से इस कार्य में लगे मक्खन लाल ने बताया कि होली के दो माह पहले बरसाना से लोग अबीर गुलाल खरीदने के लिए आते हैं। थोक विक्रेता कच्चा माल लाने के लिए रुपये देतेे हैं, मगर हम लोग नहीं लेते हैं। एडवांस में रुपये लेने से तैयार माल उन्हीं को देने के लिए विवश होना पड़ता है। खुद से तैयार किए गए गुलाल को बाजार भाव के हिसाब से बेचा जाता है।