फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Pratapgarh News ›   Also contributed to the writing of the Constitution Belha

संविधान लेखन में बेल्हा का भी है योगदान

Sun, 25 Jan 2015 10:36 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़ Updated Sun, 25 Jan 2015 10:36 PM IST
विज्ञापन
Also contributed to the writing of the Constitution Belha
जिस भारतीय संविधान पर भारतीय गणतंत्र चल रहा है उसके लेखन में बेल्हा का अहम योगदान है। कालजयी पुरुष पंडित मुनीश्वरदत्त उपाध्याय ने इसमें बड़ी भूमिका निभाई थी। उनके महत्वपूर्ण सुझाव संविधान में शामिल किया गया है।
विज्ञापन

अंग्रेजों की गुलामी से आजाद कराने में बेल्हा के लोग जहां अपने प्राणों की आहुति देने में पीछे नहीं रहे, वहीं आजादी के बाद लोकतंत्र को अक्षुण्य रखने में भी बेल्हा का योगदान किसी से कम नहीं है। 26 जनवरी 1950 को जिस भारतीय संविधान के बूते देश में गणतंत्र लागू करने की घोषणा की गई उसमें उपाध्याय का अहम योगदान रहा। संविधान निर्मात्री समिति भी पंडितजी की प्रतिभा की कायल थी। इसलिए उन्हें समिति में शामिल किया गया था। जानकार बताते हैं कि पंडितजी ने कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए थे। 
विज्ञापन


देश में अपना संविधान लागू कर लोकतंत्र के जरिए जनता के हितों की सुरक्षा और उनके विकास के लिए 26 जनवरी 1930 को लाहौर में हुए भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में पूर्ण स्वराज्य के तैयार मसौदे पर अमल करते हुए इसकी रूपरेखा तय की गई थी। संविधान बनने के बाद इसे संशोधन समिति के पास भेजा गया था। इसी में जनपद के प्रथम लोकसभा सदस्य व स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पंडित मुनीश्वरदत्त उपाध्याय भी शामिल थे। जानकारों की मानें तो समिति के लोगों ने उनके कई सुझावों को संविधान में शामिल भी किया। कालजयी पुरुष पंडित मुनीश्वरदत्त उपाध्याय संविधान संशोधन में अमूल्य सुझाव देने के साथ पेश होने के पहले अपना हस्ताक्षर हिंदी में ही किया था। इसके पीछे उनका उद्देश्य हिंदी भाषा को उसका सम्मान दिलाना था।
विज्ञापन
विज्ञापन


। जनपद के पहले कांग्रेसी सांसद व स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के साथ ही कांग्रेस के प्रांतीय अध्यक्ष रहे पंडित मुनीश्वरदत्त उपाध्याय ने जनपद में शिक्षा की ऐसी रोशनी बिखेरी कि आज भी लोगों के जीवन में ज्ञान का उजाला फैल रहा है। जनपद में दो महाविद्यालयों के साथ ही बीस कॉलेजों की स्थापना कर गरीबों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास किया। उनके करीबियों में रामराज शुक्ल, राजाराम किसान, राम अधार तिवारी, श्यामसुंदर शुक्ला का भी अपना अलग स्थान रहा है। इसलिए उन्हें शिक्षा जगत का मालवीय कहा जाता था। पंडितजी के रिश्तेदार शिव प्रसाद तिवारी ने बताया कि वह हमेशा दूसरों के हित और जनपद के विकास की बात सोचते थे। कांग्रेसी नेता ओम प्रकाश पांडेय ने बताया कि उनके द्वारा स्थापित कॉलेजों में शिक्षा ग्रहण कर तमाम लोग बड़े अधिकारी और नेता बनकर नाम रोशन कर रहे हैं। प्रतिभाओं को पंडित जी हमेशा सम्मान किया करते थे।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed