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आंगनबाड़ी केंद्रों को मिलेगा प्री-प्राइमरी का दर्जा
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प्राइमरी शिक्षा को मजबूत करने के लिए अब आंगनबाड़ी केंद्रों पर नामांकित बच्चों को पोषाहार और पकवान ही नहीं खिलाया जाएगा, बल्कि अब पढ़ाई की गुणवत्ता भी खंगाली जाएगी। इससे बेसिक शिक्षा विभाग के प्राइमरी स्कूल में दाखिला लेने वाले बच्चों की शिक्षा मजबूत होगी। स्कूलों का निरीक्षण करने के लिए पहुंचने वाले अफसर अब स्वयं भी शिक्षा की गुणवत्ता परखेंगे।
जिले के 3247 आंगनबाड़ी केंद्रों पर नामांकित बच्चों को सिर्फ खानपान पर ही नजर नहीं रखा जाएगा, बल्कि अब गुणात्मक शिक्षा दी जाएगी। जिले के आंगनबाड़ी केंद्रों को प्री-प्राइमरी का दर्जा मिलने के साथ ही सुख-सुविधाओं से लैश किया जाएगा। आंगनबाड़ी केंद्रों में शून्य से छह वर्ष तक बच्चों का नामांकन किया जाता है। आंगनबाड़ी से निकलने वाले बच्चे ही प्राइमरी स्कूल में जाते हैं। ऐेसी दशा में प्राइमरी शिक्षा को मजबूत करने के लिए हुई इस पहल से नौनिहालों को हिंदी और अंग्रेजी का अक्षर ज्ञान और कई अक्षरों को मिलाकर शब्द तैयार करने की जानकारी दी जाएगी।
विभागीय अधिकारियों का मानना है कि शासन की इस पहल से प्राइमरी शिक्षा मजबूत होगी। इधर आंगनबाड़ी केंदों में बच्चों के लिए सभी सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी, जिससे बच्चे पूरे समय तक केंद्रों पर रुके रहे। एक अप्रैल से प्रारंभ होने वाली इस योजना के लिए उन आंगनबाड़ी केंद्रों को चिह्नित किया जा रहा है, जहां अभी मूलभूत सुविधाओं का अभाव है।
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जिले के अधिकांश आंगनबाड़ी केंद्र प्राइमरी स्कूलों में ही चलते हैं। जिले में 109 केंद्र ऐेसे हैं, जो पंचायत भवन और निजी भवन में चलते हैं। स्कूल से बाहर चलने वाले केंद्रों में सुविधाओं में भारी कमी है, जिसे दुरुस्त करने के लिए चिह्नित किया जा रहा है।
आंगनबाड़ी केंद्रों पर अब शिक्षा की गुणवत्ता पर भी ध्यान दिया जाएगा। हालांकि पहले भी बच्चों को शिक्षा दी जाती थी। मगर कोई लक्ष्य नहीं होता था। अब निरीक्षण के दौरान शिक्षा की गुणवत्ता भी देखी जाएगी।
पवन कुमार यादव, जिला कार्यक्रम अधिकारी
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जिले के 3247 आंगनबाड़ी केंद्रों पर नामांकित बच्चों को सिर्फ खानपान पर ही नजर नहीं रखा जाएगा, बल्कि अब गुणात्मक शिक्षा दी जाएगी। जिले के आंगनबाड़ी केंद्रों को प्री-प्राइमरी का दर्जा मिलने के साथ ही सुख-सुविधाओं से लैश किया जाएगा। आंगनबाड़ी केंद्रों में शून्य से छह वर्ष तक बच्चों का नामांकन किया जाता है। आंगनबाड़ी से निकलने वाले बच्चे ही प्राइमरी स्कूल में जाते हैं। ऐेसी दशा में प्राइमरी शिक्षा को मजबूत करने के लिए हुई इस पहल से नौनिहालों को हिंदी और अंग्रेजी का अक्षर ज्ञान और कई अक्षरों को मिलाकर शब्द तैयार करने की जानकारी दी जाएगी।
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विभागीय अधिकारियों का मानना है कि शासन की इस पहल से प्राइमरी शिक्षा मजबूत होगी। इधर आंगनबाड़ी केंदों में बच्चों के लिए सभी सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी, जिससे बच्चे पूरे समय तक केंद्रों पर रुके रहे। एक अप्रैल से प्रारंभ होने वाली इस योजना के लिए उन आंगनबाड़ी केंद्रों को चिह्नित किया जा रहा है, जहां अभी मूलभूत सुविधाओं का अभाव है।
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जिले के अधिकांश आंगनबाड़ी केंद्र प्राइमरी स्कूलों में ही चलते हैं। जिले में 109 केंद्र ऐेसे हैं, जो पंचायत भवन और निजी भवन में चलते हैं। स्कूल से बाहर चलने वाले केंद्रों में सुविधाओं में भारी कमी है, जिसे दुरुस्त करने के लिए चिह्नित किया जा रहा है।
आंगनबाड़ी केंद्रों पर अब शिक्षा की गुणवत्ता पर भी ध्यान दिया जाएगा। हालांकि पहले भी बच्चों को शिक्षा दी जाती थी। मगर कोई लक्ष्य नहीं होता था। अब निरीक्षण के दौरान शिक्षा की गुणवत्ता भी देखी जाएगी।
पवन कुमार यादव, जिला कार्यक्रम अधिकारी