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अफसरों-बाबुओं ने भी तानीं बड़ी-बड़ी हवेलियां
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़।
Updated Thu, 17 Nov 2016 11:56 PM IST
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काली कमाई के बल पर अफसरों-बाबुओं ने भी बड़ी हवेलियां तान ली हैं। लोनिवि, जिला पंचायत, नगर पालिका, विकास विभाग, डीआईओएस कार्यालय और बीएसए कार्यालय के कुछ बाबुओं ने बकायदा आलीशन महल खड़ा कर लिया है। जिले में कई अफसरों ने भी दूसरों के नाम पर संपत्ति बना रखी है। कई बाबुओं के जलवे तो अफसरों से भी बढ़कर हैं। उनका ठाठ-बाट देखकर लोग दंग रह जाते हैं और अफसर भी उनके सामने खुद को छोटा महसूस करते हैं।
वैसे तो हर विभाग के अफसरों की चांदी रहती है। विकास के कार्यों के अलावा हर काम में हर काम में अफसरों के गठजोड़ में बाबुओं का भी पर्सेंटज होता है। यदि बाबुओं की जेब खाली हुई तो फिर फाइलें आलमारी में कैद हो जाती हैं। विकास विभाग विभाग में अंगद की तरह पैर जमाए एक लिपिक के खिलाफ कई मुकदमे तक दर्ज हो चुके हैं। निलंबन तो उनकी कार्यशैली में शामिल है। इसके बावजूद अपने प्रभाव से बहाली और उसके बाद सरकारी धन के बंदरबाट से मौजूदा समय में बाबू के परिजनों के नाम बेनामी संपत्ति करोड़ों से ऊपर पहुंच गई है। शहर में आलीशान मकान है और रहन सहन भी किसी अफसर से कम नहीं। इसके अलावा ऐसे कई ग्राम पंचायत अधिकारी व ग्राम विकास अधिकारी हैं जो दर्जन भर से अधिक गांवों में कई दशक से जमे हैं। अफसर तो बदलते रहे लेकिन उनके कार्यक्षेत्र में कोई बदलाव नहीं हो सका। यदि हुआ भी तो वे अपने प्रभाव से उसे रोकवा लिए। जनपद में बीस ऐसे ग्राम मंत्री हैं जो प्रापर्टी डीलिंग के साथ ही ट्रांसपोर्ट के व्यवसाय में भी हाथ अजमा रहे हैं। परिवार व रिश्तेदारों के नाम अपनी काली कमाई एक नंबर करने के लिए सुबह शाम दिमाग खपाते रहते हैं। शहर के अष्टभुजानगर, शिवजीपुरम, दहिलामऊ, शुकुलपुर, विवेक नगर समेत अन्य इलाकों में लोनिवि, जिला पंचायत, बेसिक शिक्षा अधिकारी व डीआईओएस कार्यालय के बाबुओं ने आलीशान मकान बनवा रखा हैं। पचास से भी अधिक ऐसे बाबू हैं जिनके पास लग्जरी वाहनों के साथ ही बडे़ पैमाने पर बेनामी संपत्ति है।
जनपद में तैनात रहे अफसर भी कम कमाल नहीं किए हैं। कई अफसर तो ऐसे हैं जो यहां से भारी मात्रा में काली कमाई अपने रिश्तेदारों के नाम से कर रखी है। इलाहाबाद, लखनऊ, वाराणसी में ऐसे अफसरों ने अपने करीबियों के जरिए प्रापर्टी मेें काली कमाई लगा रखी है। पूर्व में तैनात रहे राजस्व के एक अफसर तो अपने घर मोरंग, सीमेंट व ईंट तक पहुंचाए थे। उनकी कार्यशैली से मातहत काफी परेशान हो चुके थे। पुलिस विभाग के अफसर भी पीछे नही हैं। पूर्व में तैनात एक अफसर ने पुलिस लाइन से हरियाली खत्म करा दी। पेड़ों को कटवाकर अपने घर भेज दिया। हादसों के बाद कानून व्यवस्था व जनता के हित में उठाए जा रहे कदम के नाम पर व्यवसाइयों का धनादोहन किसी से छिपा नही है। फाइलों पर रिपोर्ट लगाने के नाम पर जमकर वसूली होती रही है।
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वैसे तो हर विभाग के अफसरों की चांदी रहती है। विकास के कार्यों के अलावा हर काम में हर काम में अफसरों के गठजोड़ में बाबुओं का भी पर्सेंटज होता है। यदि बाबुओं की जेब खाली हुई तो फिर फाइलें आलमारी में कैद हो जाती हैं। विकास विभाग विभाग में अंगद की तरह पैर जमाए एक लिपिक के खिलाफ कई मुकदमे तक दर्ज हो चुके हैं। निलंबन तो उनकी कार्यशैली में शामिल है। इसके बावजूद अपने प्रभाव से बहाली और उसके बाद सरकारी धन के बंदरबाट से मौजूदा समय में बाबू के परिजनों के नाम बेनामी संपत्ति करोड़ों से ऊपर पहुंच गई है। शहर में आलीशान मकान है और रहन सहन भी किसी अफसर से कम नहीं। इसके अलावा ऐसे कई ग्राम पंचायत अधिकारी व ग्राम विकास अधिकारी हैं जो दर्जन भर से अधिक गांवों में कई दशक से जमे हैं। अफसर तो बदलते रहे लेकिन उनके कार्यक्षेत्र में कोई बदलाव नहीं हो सका। यदि हुआ भी तो वे अपने प्रभाव से उसे रोकवा लिए। जनपद में बीस ऐसे ग्राम मंत्री हैं जो प्रापर्टी डीलिंग के साथ ही ट्रांसपोर्ट के व्यवसाय में भी हाथ अजमा रहे हैं। परिवार व रिश्तेदारों के नाम अपनी काली कमाई एक नंबर करने के लिए सुबह शाम दिमाग खपाते रहते हैं। शहर के अष्टभुजानगर, शिवजीपुरम, दहिलामऊ, शुकुलपुर, विवेक नगर समेत अन्य इलाकों में लोनिवि, जिला पंचायत, बेसिक शिक्षा अधिकारी व डीआईओएस कार्यालय के बाबुओं ने आलीशान मकान बनवा रखा हैं। पचास से भी अधिक ऐसे बाबू हैं जिनके पास लग्जरी वाहनों के साथ ही बडे़ पैमाने पर बेनामी संपत्ति है।
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जनपद में तैनात रहे अफसर भी कम कमाल नहीं किए हैं। कई अफसर तो ऐसे हैं जो यहां से भारी मात्रा में काली कमाई अपने रिश्तेदारों के नाम से कर रखी है। इलाहाबाद, लखनऊ, वाराणसी में ऐसे अफसरों ने अपने करीबियों के जरिए प्रापर्टी मेें काली कमाई लगा रखी है। पूर्व में तैनात रहे राजस्व के एक अफसर तो अपने घर मोरंग, सीमेंट व ईंट तक पहुंचाए थे। उनकी कार्यशैली से मातहत काफी परेशान हो चुके थे। पुलिस विभाग के अफसर भी पीछे नही हैं। पूर्व में तैनात एक अफसर ने पुलिस लाइन से हरियाली खत्म करा दी। पेड़ों को कटवाकर अपने घर भेज दिया। हादसों के बाद कानून व्यवस्था व जनता के हित में उठाए जा रहे कदम के नाम पर व्यवसाइयों का धनादोहन किसी से छिपा नही है। फाइलों पर रिपोर्ट लगाने के नाम पर जमकर वसूली होती रही है।
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