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कुपोषण के खिलाफ जंग की जमीन तैयार
Pratapgarh
Updated Sat, 19 Jul 2014 05:30 AM IST
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प्रतापगढ़। कुपोषित बच्चों की सेहत को लेकर स्वास्थ्य विभाग गंभीर दिखने लगा है। पोषण पुनर्वास केन्द्र तक उन्हें लाने की रणनीति पर काम शुरू हो चुका है। इस राह में बाल विकास विभाग को कांटा बताया जा रहा है। महकमे का चक्कर काट रहीं डीपीएम को कुपोषित बच्चों की ग्रेड वार सूचना नहीं मिल रही है। ये दशा स्वास्थ्य अफसरों के प्रयास में रोड़ा बनी हुई है।
आंगनबाड़ी केंद्रों की रिपोर्ट से यह साफ हो चुका है कि कुपोषित और अति कुपोषित बच्चों की संख्या 82 हजार के करीब है। सरकार ने ऐसे बच्चों की सेहत दुरुस्त करने के लिए जिला अस्पताल में पोषण पुनर्वास केन्द्र खोल रखा है। कुपोषित बच्चों को लेकर ‘अमर उजाला’ ने खबर प्रकाशित की। बाल विकास के अफसर इसके बाद भी नहीं चेते, लेकिन स्वास्थ्य अधिकारियों ने इसे गंभीरता से लिया। सीएमओ के निर्देश पर डीपीएम उन बच्चों की ब्लाकवार सूची तलाश रही हैं जो कुपोषण के दायरे में हैं। उनका तर्क है कि इस काम में बाल विकास सहयोग नहीं कर रहा। कई दफा जाने के बाद भी बाल विकास कार्यालय से सूची नहीं मिल रही है। यदि कुपोषित बच्चों की ब्लाक व गांववार सूची मिल जाए तो उनकी सेहत सुधारने का काम शुरू होगा। उन्होंने बताया कि सीएमओ चाह रहे हैं कि गांवों में तैनात आशा बच्चों को पोषण पुनर्वास केन्द्र में भर्ती कराने के लिए उनके परिजनों को प्रेरित करें।
पूर्व डीएम विद्याभूषण ने कुपोषित बच्चों की सेहत संवारने के लिए काम शुरू किया था। उनका निर्देश था कि बाल विकास, स्वास्थ्य विभाग की आशाएं और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता संयुक्त रूप से कुपोषित बच्चों पर नजर रखें। ऐसे बच्चों को पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती कराने का उन्हें सख्त निर्देश भी दिया था। निर्देश पर अमल होता इससे पहले उनका स्थानांतरण हो गया।
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जिला कार्यक्रम अधिकारी डॉ. आरती ने कहा कि कुपोषित और अति कुपोषित बच्चों की नई सूची तैयार कराई जा रही है। यह रिपोर्ट बनने के बाद डीपीएम को दे दी जाएगी। वैसे हमने पट्टी क्षेत्र के दो बच्चों को भेजा था। उन्हें केन्द्र में भर्ती नहीं किया गया।
वहीं, जिला परियोजना प्रबंधक कंचन बाला ने बताया कि मैं कुपोषित बच्चों की सूची मांगने विभाग में कई बार गई। मगर वहां से उन बच्चों का रिकार्ड नहीं मिला। जब तक बाल विकास विभाग कुपोषित बच्चों की गांव वार रिपोर्ट नहीं देगा उनकी सेहत सुधारने का काम सफल नहीं हो सकता।
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आंगनबाड़ी केंद्रों की रिपोर्ट से यह साफ हो चुका है कि कुपोषित और अति कुपोषित बच्चों की संख्या 82 हजार के करीब है। सरकार ने ऐसे बच्चों की सेहत दुरुस्त करने के लिए जिला अस्पताल में पोषण पुनर्वास केन्द्र खोल रखा है। कुपोषित बच्चों को लेकर ‘अमर उजाला’ ने खबर प्रकाशित की। बाल विकास के अफसर इसके बाद भी नहीं चेते, लेकिन स्वास्थ्य अधिकारियों ने इसे गंभीरता से लिया। सीएमओ के निर्देश पर डीपीएम उन बच्चों की ब्लाकवार सूची तलाश रही हैं जो कुपोषण के दायरे में हैं। उनका तर्क है कि इस काम में बाल विकास सहयोग नहीं कर रहा। कई दफा जाने के बाद भी बाल विकास कार्यालय से सूची नहीं मिल रही है। यदि कुपोषित बच्चों की ब्लाक व गांववार सूची मिल जाए तो उनकी सेहत सुधारने का काम शुरू होगा। उन्होंने बताया कि सीएमओ चाह रहे हैं कि गांवों में तैनात आशा बच्चों को पोषण पुनर्वास केन्द्र में भर्ती कराने के लिए उनके परिजनों को प्रेरित करें।
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पूर्व डीएम विद्याभूषण ने कुपोषित बच्चों की सेहत संवारने के लिए काम शुरू किया था। उनका निर्देश था कि बाल विकास, स्वास्थ्य विभाग की आशाएं और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता संयुक्त रूप से कुपोषित बच्चों पर नजर रखें। ऐसे बच्चों को पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती कराने का उन्हें सख्त निर्देश भी दिया था। निर्देश पर अमल होता इससे पहले उनका स्थानांतरण हो गया।
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जिला कार्यक्रम अधिकारी डॉ. आरती ने कहा कि कुपोषित और अति कुपोषित बच्चों की नई सूची तैयार कराई जा रही है। यह रिपोर्ट बनने के बाद डीपीएम को दे दी जाएगी। वैसे हमने पट्टी क्षेत्र के दो बच्चों को भेजा था। उन्हें केन्द्र में भर्ती नहीं किया गया।
वहीं, जिला परियोजना प्रबंधक कंचन बाला ने बताया कि मैं कुपोषित बच्चों की सूची मांगने विभाग में कई बार गई। मगर वहां से उन बच्चों का रिकार्ड नहीं मिला। जब तक बाल विकास विभाग कुपोषित बच्चों की गांव वार रिपोर्ट नहीं देगा उनकी सेहत सुधारने का काम सफल नहीं हो सकता।