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एनएच को पच नहीं रही सवा करोड़ की रकम
Pratapgarh
Updated Sun, 15 Dec 2013 05:41 AM IST
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एनएच को वन विभाग से मिली अनुमति में सवा करोड़ की रकम पच नहीं रही है। इसे लेकर उसने उठा पटक करनी शुरू कर दी है। शनिवार को एनएच के अधिकारी जिलाधिकारी व डीएफओ के साथ इसकी चर्चा करने के लिए पहुंचे।
पूर्व में 32 लाख रुपये के प्रस्ताव के स्थान एक करोड़ 38 लाख रुपये की धनराशि प्रस्तावित किए जाने के कारण एनएच मुसीबत में फंस गया है। उसने वन विभाग को देने के साथ ही वैकल्पिक पुल और परिवर्तित मार्ग के लिए 1 करोड़ 29 लाख रुपये लागत का बंदोबस्त किया था। उसने दिल्ली में इसके लिए प्रस्ताव भेजकर पैसा स्वीकृत करा लिया था। अब वन विभाग को देने के लिए ही उसे 1 करोड़ 38 लाख रुपये की जरूरत है। इस नई समस्या से निपटने के लिए उसके अधिकारी शनिवार को जिलाधिकारी विद्याभूषण और डीएफओ के साथ चर्चा करने पहुंचे। बैठक में इस पैसे को कम करने की मांग की गई। धरना प्रदर्शन जैसे दबाव को देखते हुए जिलाधिकारी ने डीएफओ से इस मामले का हल निकालने को कहा। इस पर उन्होंने बताया कि केंद्रीय वन विभाग के निर्देशों का पालन ही किया जा सकता है। वह जैसे प्रारूप तय करेगा वही माना जाएगा। इस पर जिलाधिकारी ने कुछ पैसे जमा करने के बाद काम चालू कराने की बात कही तो डीएफओ ने बिना पूरा पैसा जमा कराए पेड़ों को काटने से मना करते हुए कहा कि लखनऊ में बैठने वाले नोडल अधिकारी बीके द्विवेदी ही इस प्रस्ताव पर विचार कर सकते हैं। अगर वह प्रारूप में कुछ कटौती करते हैं तो उन्हें मान्य होगा। इसके बाद एनएच के अधिकारी पुन: लखनऊ के लिए रवाना हो गए।
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पूर्व में 32 लाख रुपये के प्रस्ताव के स्थान एक करोड़ 38 लाख रुपये की धनराशि प्रस्तावित किए जाने के कारण एनएच मुसीबत में फंस गया है। उसने वन विभाग को देने के साथ ही वैकल्पिक पुल और परिवर्तित मार्ग के लिए 1 करोड़ 29 लाख रुपये लागत का बंदोबस्त किया था। उसने दिल्ली में इसके लिए प्रस्ताव भेजकर पैसा स्वीकृत करा लिया था। अब वन विभाग को देने के लिए ही उसे 1 करोड़ 38 लाख रुपये की जरूरत है। इस नई समस्या से निपटने के लिए उसके अधिकारी शनिवार को जिलाधिकारी विद्याभूषण और डीएफओ के साथ चर्चा करने पहुंचे। बैठक में इस पैसे को कम करने की मांग की गई। धरना प्रदर्शन जैसे दबाव को देखते हुए जिलाधिकारी ने डीएफओ से इस मामले का हल निकालने को कहा। इस पर उन्होंने बताया कि केंद्रीय वन विभाग के निर्देशों का पालन ही किया जा सकता है। वह जैसे प्रारूप तय करेगा वही माना जाएगा। इस पर जिलाधिकारी ने कुछ पैसे जमा करने के बाद काम चालू कराने की बात कही तो डीएफओ ने बिना पूरा पैसा जमा कराए पेड़ों को काटने से मना करते हुए कहा कि लखनऊ में बैठने वाले नोडल अधिकारी बीके द्विवेदी ही इस प्रस्ताव पर विचार कर सकते हैं। अगर वह प्रारूप में कुछ कटौती करते हैं तो उन्हें मान्य होगा। इसके बाद एनएच के अधिकारी पुन: लखनऊ के लिए रवाना हो गए।
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