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उत्तराखंड में तीन तीर्थयात्रियों की मौत से कोहराम
Pratapgarh
Updated Fri, 21 Jun 2013 05:30 AM IST
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प्रतापगढ़। जिले के विभिन्न क्षेत्रों से चार धाम की यात्रा पर उत्तराखंड गए तीन लोगों की मौत की सूचना मिलने से कोहराम मच गया है। कई लोगों का अब तक पता नहीं चल सका है। न तो तीर्थयात्री परिजनों को कोई सूचना दे पा रहे हैं और न ही उनके मोबाइल पर संपर्क हो रहा है। ऐसे में लोगों को हर पल अनहोनी की आशंका सता रही है।
जिले के संग्रामगढ़ थाना क्षेत्र के पूरे कुंदन, अर्रो गांव से चारधाम की यात्रा पर गए दो लोगों की मौत की सूचना आई है। इससे उनके घरों में कोहराम मचा है। अर्रो गांव निवासी शिवफेर तिवारी (60) अपनी पत्नी सुमित्रा और पूरे कुंदन के जगत नारायण मिश्र (62) भी चारधाम गए थे। केदारनाथ के रास्ते में यह लोग बाढ़ की चपेट में आ गए और शिवफेर की पत्नी सुमित्रा व जगत नारायण मिश्र की मौत हो गई। इसकी सूचना गुरुवार शाम घर पर आई तो कोहराम मच गया। उधर पट्टी के लोगों के साथ गई लंभुआ की कलावती की भी मौत हो गई है।
अभी भी कई लोगों का पता नहीं चल पा रहा है। शहर के शिवपुरी सदर बाजार मोहल्ले के वीरेंद्र मिश्र, उनकी पत्नी मायादेवी और विद्याप्रसाद व वंदना चारधाम की यात्रा पर गए थे। उत्तराखंड में आए जलजले के बाद से गुरुवार तक इनका कोई अता पता नहीं चल सका। परिजनों ने उन्हें फोन करने का तमाम प्रयास किया लेकिन कोई लोकेशन नहीं मिल सकी।
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कटरा मेदनीगंज प्रतिनिधि के अनुसार इलाके के पूरेरामचंद्र गांव से भी रिटायर्ड शिक्षक शीतला प्रसाद पांडेय और उनकी पत्नी सरस्वती देवी के साथ कई लोग चारधाम की यात्रा पर गए हैं। इनका भी अब तक कोई पता नहीं चल सका है। मानधाता के घाटमपुर गांव का शारदा प्रसाद कई दर्शनार्थियों को बस से लेकर चारधाम गया है। उसका भी पता न चलने पर पत्नी और बच्चे परेशान हैं। नगर कोतवाली के रामपुर मुस्तरका निवासी धनीराम और राजाराम यादव भी 5 जून को चारधाम की यात्रा पर गए थे। चार दिन से दोनों का संपर्क परिजनों से कट गया। गुरुवार को राजाराम का फोन परिजनों के पास आया था लेकिन वह भी अपने साथी धनीराम की बाबत कोई जानकारी नहीं दे सके। मोहनगंज बाजार के आसपास के गांवों से भी कई लोग चारधाम की यात्रा पर हैं। उसरहा का पुरवा निवासी जीतलाल, ईसीपुर के डा. हौसिला, ढेकाही के दिनेश सिंह, मोहनगंज के शीतला, सकरौली के नवल किशोर, पूरे रायजू के राम प्रताप सहित कई लोग चारधाम की यात्रा पर हैं। इनमें से अधिकांश लोगों का परिजनों से संपर्क नहीं हो पा रहा है।
पट्टी से चारधाम की यात्रा पर गए ज्यादातर लोग सुरक्षित ठिकाने पर पहुंच गए हैं। बस की एक महिलायात्री ने दम तोड़ दिया। उसकी मौत किसी घटना में नहीं बल्कि घटना देखकर दिल का दौरा पड़ने से हुई है। हेलीकाप्टर से इन लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दिया गया। पट्टी के रिटायर्ड कानूनगो अमृतलाल मिश्र के साथ बस में करीब 50 तीर्थयात्री चार धाम की यात्रा पर गए हैं। ऋषिकेश से करीब सौ किलोमीटर दूर केदारनाथ धाम से लौटते समय धरासू पहाड़ी के पास इनकी बस फंस गई। आगे और पीछे की सड़क पानी में बह जाने के कारण सभी लोग वहां फंस गए। तीन दिन तक बिना खाए, पीए लोग वहीं खडे़ रहे। हादसा देखकर बस में साथ गई लंभुआ सुल्तानपुर कलावती पत्नी राम सुमेर सिंह को दिल का दौरा पड़ा और उसकी मौत हो गई। लोगों ने कलावती का वहीं पर अंतिम संस्कार कर दिया। गुरुवार को सेना के हेलीकाप्टर से सभी को ऋषिकेश में सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया। गुरुवार को अमृतलाल का फोन घर आया तो लोगों ने राहत की सांस ली। सूचना कलावती के घर पहुंची तो वहां कोहराम मच गया। अमृतलाल के परिजनों ने बताया कि शनिवार तक सभी के घर आने की उम्मीद है।
चारधाम की यात्रा पर गए शहर के करीब पूरेओझा गांव के दस लोगों का भी पता नहीं चल सका है। गुरुवार को यहां के लोगों की खोजबीन के लिए गांव के निवासी कैप्टन सुभाष ओझा उत्तराखंड रवाना हुए। इलाके के कई गांवों के लोगों का जत्था बस से गया है। इसमें पूरे ओझा गांव के ही दस लोग कृष्ण कुमार, राममूर्ति ओझा, छेदी तिवारी, राजपति, हीरावती, कलावती, गया प्रसाद और उनकी पत्नी, अनिल कुमार व शकुंतला शामिल हैं। गुरुवार को एक बार राममूर्ति का परिजनों से संपर्क हुआ लेकिन वह साथियों की बाबत कोई जानकारी नहीं दे सके। राममूर्ति ने बताया कि उन्हें सेना के जवानों ने बचा लिया और वह सुरक्षित स्थान पर हैं।
चारधाम यात्रा पर गए तीर्थयात्रियों की जानकारी न मिलने से कंधई इलाके के भी कई गांवों के लोग परेशान हैं। लौवार कंधई निवासी रमाशंकर व यमुना शंकर, आमापुर के शीतला प्रसाद और उनकी पत्नी अमरावती, खूझी कला के राम करन शर्मा, नारंगपुर के हरिमूर्ति पांडेय और उनकी पत्नी शकुंतला भी सुल्तानपुर की एक बस से चारधाम की यात्रा पर गईं हैं। इनका हाल चाल परिजनों को नहीं मिल पा रहा है। इससे लोग परेशान हैं।
डीएम विद्याभूषण ने कहा कि उत्तराखंड हादसे पर उनकी नजर है। जिले के कई लोग वहां फंसे हैं। जिला प्रशासन को अभी वहां से जिले के लोगों के बारे में कोई सूचना नहीं आई है। यदि सूचना आती है तो लोगों को वहां से लाने की व्यवस्था की जाएगी।
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जिले के संग्रामगढ़ थाना क्षेत्र के पूरे कुंदन, अर्रो गांव से चारधाम की यात्रा पर गए दो लोगों की मौत की सूचना आई है। इससे उनके घरों में कोहराम मचा है। अर्रो गांव निवासी शिवफेर तिवारी (60) अपनी पत्नी सुमित्रा और पूरे कुंदन के जगत नारायण मिश्र (62) भी चारधाम गए थे। केदारनाथ के रास्ते में यह लोग बाढ़ की चपेट में आ गए और शिवफेर की पत्नी सुमित्रा व जगत नारायण मिश्र की मौत हो गई। इसकी सूचना गुरुवार शाम घर पर आई तो कोहराम मच गया। उधर पट्टी के लोगों के साथ गई लंभुआ की कलावती की भी मौत हो गई है।
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अभी भी कई लोगों का पता नहीं चल पा रहा है। शहर के शिवपुरी सदर बाजार मोहल्ले के वीरेंद्र मिश्र, उनकी पत्नी मायादेवी और विद्याप्रसाद व वंदना चारधाम की यात्रा पर गए थे। उत्तराखंड में आए जलजले के बाद से गुरुवार तक इनका कोई अता पता नहीं चल सका। परिजनों ने उन्हें फोन करने का तमाम प्रयास किया लेकिन कोई लोकेशन नहीं मिल सकी।
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कटरा मेदनीगंज प्रतिनिधि के अनुसार इलाके के पूरेरामचंद्र गांव से भी रिटायर्ड शिक्षक शीतला प्रसाद पांडेय और उनकी पत्नी सरस्वती देवी के साथ कई लोग चारधाम की यात्रा पर गए हैं। इनका भी अब तक कोई पता नहीं चल सका है। मानधाता के घाटमपुर गांव का शारदा प्रसाद कई दर्शनार्थियों को बस से लेकर चारधाम गया है। उसका भी पता न चलने पर पत्नी और बच्चे परेशान हैं। नगर कोतवाली के रामपुर मुस्तरका निवासी धनीराम और राजाराम यादव भी 5 जून को चारधाम की यात्रा पर गए थे। चार दिन से दोनों का संपर्क परिजनों से कट गया। गुरुवार को राजाराम का फोन परिजनों के पास आया था लेकिन वह भी अपने साथी धनीराम की बाबत कोई जानकारी नहीं दे सके। मोहनगंज बाजार के आसपास के गांवों से भी कई लोग चारधाम की यात्रा पर हैं। उसरहा का पुरवा निवासी जीतलाल, ईसीपुर के डा. हौसिला, ढेकाही के दिनेश सिंह, मोहनगंज के शीतला, सकरौली के नवल किशोर, पूरे रायजू के राम प्रताप सहित कई लोग चारधाम की यात्रा पर हैं। इनमें से अधिकांश लोगों का परिजनों से संपर्क नहीं हो पा रहा है।
पट्टी से चारधाम की यात्रा पर गए ज्यादातर लोग सुरक्षित ठिकाने पर पहुंच गए हैं। बस की एक महिलायात्री ने दम तोड़ दिया। उसकी मौत किसी घटना में नहीं बल्कि घटना देखकर दिल का दौरा पड़ने से हुई है। हेलीकाप्टर से इन लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दिया गया। पट्टी के रिटायर्ड कानूनगो अमृतलाल मिश्र के साथ बस में करीब 50 तीर्थयात्री चार धाम की यात्रा पर गए हैं। ऋषिकेश से करीब सौ किलोमीटर दूर केदारनाथ धाम से लौटते समय धरासू पहाड़ी के पास इनकी बस फंस गई। आगे और पीछे की सड़क पानी में बह जाने के कारण सभी लोग वहां फंस गए। तीन दिन तक बिना खाए, पीए लोग वहीं खडे़ रहे। हादसा देखकर बस में साथ गई लंभुआ सुल्तानपुर कलावती पत्नी राम सुमेर सिंह को दिल का दौरा पड़ा और उसकी मौत हो गई। लोगों ने कलावती का वहीं पर अंतिम संस्कार कर दिया। गुरुवार को सेना के हेलीकाप्टर से सभी को ऋषिकेश में सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया। गुरुवार को अमृतलाल का फोन घर आया तो लोगों ने राहत की सांस ली। सूचना कलावती के घर पहुंची तो वहां कोहराम मच गया। अमृतलाल के परिजनों ने बताया कि शनिवार तक सभी के घर आने की उम्मीद है।
चारधाम की यात्रा पर गए शहर के करीब पूरेओझा गांव के दस लोगों का भी पता नहीं चल सका है। गुरुवार को यहां के लोगों की खोजबीन के लिए गांव के निवासी कैप्टन सुभाष ओझा उत्तराखंड रवाना हुए। इलाके के कई गांवों के लोगों का जत्था बस से गया है। इसमें पूरे ओझा गांव के ही दस लोग कृष्ण कुमार, राममूर्ति ओझा, छेदी तिवारी, राजपति, हीरावती, कलावती, गया प्रसाद और उनकी पत्नी, अनिल कुमार व शकुंतला शामिल हैं। गुरुवार को एक बार राममूर्ति का परिजनों से संपर्क हुआ लेकिन वह साथियों की बाबत कोई जानकारी नहीं दे सके। राममूर्ति ने बताया कि उन्हें सेना के जवानों ने बचा लिया और वह सुरक्षित स्थान पर हैं।
चारधाम यात्रा पर गए तीर्थयात्रियों की जानकारी न मिलने से कंधई इलाके के भी कई गांवों के लोग परेशान हैं। लौवार कंधई निवासी रमाशंकर व यमुना शंकर, आमापुर के शीतला प्रसाद और उनकी पत्नी अमरावती, खूझी कला के राम करन शर्मा, नारंगपुर के हरिमूर्ति पांडेय और उनकी पत्नी शकुंतला भी सुल्तानपुर की एक बस से चारधाम की यात्रा पर गईं हैं। इनका हाल चाल परिजनों को नहीं मिल पा रहा है। इससे लोग परेशान हैं।
डीएम विद्याभूषण ने कहा कि उत्तराखंड हादसे पर उनकी नजर है। जिले के कई लोग वहां फंसे हैं। जिला प्रशासन को अभी वहां से जिले के लोगों के बारे में कोई सूचना नहीं आई है। यदि सूचना आती है तो लोगों को वहां से लाने की व्यवस्था की जाएगी।